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Women Vote Bank: महिला वोटरों पर फोकस का नया ट्रेंड, बंगाल में भी उठा शोर, लेकिन तमिलनाडु ने पांच दशक पहले सुलझा ली थी गुत्थी

Women Voter: महिला वोटरों को एकजुट करने के लिए पिछले कुछ सालों से सभी राजनीतिक पार्टियां जोर लगाती हैं। उनके लिए नई घोषणाएं भी करती हैं। वहीं तमिलनाडु में 1970 के दशक में ही राजनीतिक पार्टियों ने महिला वोटर बैंक को एकजुट करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया था। पश्चिम बंगाल में महिला विकास का नया शोर, तमिलनाडु में अब काफी परिपक्वता हासिल कर चुका है।

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Apr 27, 2026
तमिलाडु के नेताओं ने महिला वोटर की ताकत बहुत पहले समझ ली थी। (Photo: IANS)

Women Vote Bank in India: पिछले एक-दो दशकों में महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए नकद हस्तांतरण, सब्सिडी पर सिलेंडर, छात्राओं को मुफ्त साइकिल, लैपटॉप और स्मार्ट फोन का वितरण, मुफ्त बस यात्रा, स्वयं सहायता ऋण, पोषण सहायता आदि मुख्य हथियार बन चुके हैं। अब पार्टियां महिलाओं के वोट बैंक पर फोकस करते हुए उन्हें नए हथियार की तरह देखने लगी हैं। बिहार चुनाव में महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये का ट्रांसफर इसका सबसे ताजा उदाहरण है। पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव में भी महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और भाजपा तीनों ही प्रमुख पार्टियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया हुआ है। हालांकि, महिलाओं के मत की महत्ता को तमिलनाडु ने बहुत पहले समझ लिया था।

देश के अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिला मतदाता अब निर्णायक भूमिका में आ चुकी हैं। पिछले एक दशक में राज्य की प्रमुख पार्टियों तृणमूल कांग्रेस (TMC), भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) ने महिलाओं को केंद्र में रखकर अपने-अपने चुनावी वादे तैयार किए। इन वादों में आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में पहले से चल रही है कई योजनाएं

Schemes for Women in West Bengal: आइए सबसे पहले राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की बात करते हैं। तृणमूल ने महिलाओं के लिए राज्य में पहले से लागू 'लक्ष्मी भंडार', 'कन्याश्री', 'रूपश्री' आदि योजनाओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में पेश किया है। 'लक्ष्मी भंडार' के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपये हर महीने नकद सहायता और अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं को 1,200 रुपये की राशि दी जाती है। इसका उद्देश्य महिलाओं घरेलू खर्च (राशन, दवाइयां, बच्चों की जरूरतें आदि) में सहायता प्रदान करना है।

शिक्षा और शादी के लिए भी राज्य में चल रही है योजनाएं

पश्चिम बंगाल में स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को वार्षिक छात्रवृत्ति लगभग 1,000 रुपये सालाना दिया जाता है, ताकि वे पढ़ाई जारी रख सकें। वहीं 18 वर्ष की उम्र पूरी करने और अविवाहित रहने पर उन्हें एकमुश्त राशि (25,000 रुपये) दी जाती है। इसका उद्देश्य लड़कियों को शिक्षित करना है। वहीं 'रूपश्री' योजना के तहत गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। मौजूदा विधानसभा चुनाव के दौरान टीएमसी ने अक्सर इन योजनाओं की राशि बढ़ाने, दायरा विस्तार करने और नई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जोड़ने का वादा किया। इसके साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष हेल्पलाइन, पुलिस में महिला भर्ती बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों को सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया है।

(Photo: IANS/Ashok Nath Dey)

बीजेपी ने भी राज्य की महिलाओं से किए बड़े वादे

BJP Made promises in West Bengal: वहीं राज्य में बीजेपी ने ममता सरकार की महिलाओं के लिए चल रही 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाओं से अधिक नकद सहायता देने का वादा किया है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सीधे लाभ मिल सके। इसके अलावा, उज्ज्वला योजना के विस्तार के तहत मुफ्त या सस्ती गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने, गरीब महिलाओं को आवास योजनाओं में प्राथमिकता देने और शौचालय निर्माण जैसी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने की बात की गई है। भाजपा ने महिलाओं की सुरक्षा को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है। बीजेपी ने कानून व्यवस्था सुधारने, न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने, महिला पुलिस स्टेशनों की संख्या बढ़ाने और मानव तस्करी तथा हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई के वादे किए हैं। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूहों को केंद्र सरकार की योजनाओं से जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ाने का दावा भी किया गया है।

(Photo: IANS/PMO)

कांग्रेन ने भी गरीब महिलाओं को नकदी सहायता देने का किया वादा

कांग्रेस ने राज्य की महिलाओं से 'न्याय' और 'आर्थिक सहायता' प्रदान करने के वादे किए हैं। कांग्रेस ने गरीब महिलाओं को नियमित नकद सहायता देने, महंगाई से राहत दिलाने और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की बात कही है। इसके अलावा, महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, मुफ्त या सस्ती दवाइयां, मातृत्व लाभ और पोषण योजनाओं के विस्तार का वादा किया गया है। कांग्रेस ने लड़कियों की शिक्षा पर भी जोर दिया है। लड़कियों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति, स्कूल-कॉलेज में सुविधाओं का विस्तार और ड्रॉपआउट दर कम करने की चर्चा की है। रोजगार के मोर्चे पर, महिलाओं के लिए विशेष कौशल विकास कार्यक्रम और सरकारी नौकरियों में अवसर बढ़ाने की बात कही गई है।

तमिलनाडु ने 1970 में पहचान ली थी महिला वोटरों की ताकत

वहीं तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टियों ने महिला मतदाओं को करीब पांच-छह दशक पहले ही वोट बैंक समझ लिया था। इसे यूं भी समझा जाना चाहिए कि तमिलनाडु में महिलाओं को सिर्फ परिवार के अंदर पुरुषों पर आश्रित के रूप में नहीं, बल्कि उन्हें राजनीतिक हितधारक के रूप में देखना शुरू कर दिया था। महिलाओं के वोट को साधा गया। उन्हें संगठित किया गया। उन्हें प्रतीकात्मक रूप दिया गया और समय के साथ, कल्याणकारी राजनीति के एक लंबे प्रयोग के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाया गया।

MGR ने शुरू कराई थी स्कूलों में भोजन की व्यवस्था

वर्ष 1970 के दशक में तमिलनाडु की राजनीति में एम. जी. रामचंद्रन, जिन्हें प्यार से पूरी दुनिया एमजीआर पुकारती थी, वह फिल्मों से राजनीति में आए। पहले उन्होंने 1970 के आसपास द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पार्टी ज्वाइन की। वर्ष 1972 में पार्टी के अंदर मतभेद के चलते उन्होंने अपनी पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) की स्थापना की। वे 1977 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और लगभग 10 वर्षों तक अपने पद पर बने रहे। उन्होंने सरकारी स्कूलों में निम्न आय वर्ग से आने वाले बच्चों के ड्रॉपआउट को रोकने और उनके पोषण में सुधार लाने के लिए हर रोज मुफ्त मिड-डे मील (Mid-Day-Meal) योजना को बड़े पैमाने पर लागू किया। इसके अलावा उन्होंने लोक कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। सस्ती राशन, सब्सिडी समेत कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बढ़ावा दिया।

तमिलनाडु में सबसे पहले शुरू हुई मिड डे मील योजना

दरअसल, यह के. कामराज के 1950 में मद्रासकालीन भोजन योजना का ही विस्तार है। इस योजना को राज्य में एम. करुणानिधि ने 1970 में शुरू कराया और एमजीआर ने 1980 के दशक में इसे पूरे राज्य में लागू करवाया। बाद में डीएमके सरकार ने मिड-डे-मील में अंडे भी शामिल करवाए। पहले सप्ताह में एक से दो अंडे, फिर तीन अंडे किए गए। 2010 तक आते-आते स्कूल के हर दिवस पर एक अंडे भोजन में शामिल किए गए। शाकाहारी बच्चों के लिए केले की व्यवस्था की गई। वर्ष 2021 में 43,000 से अधिक भोजन केंद्रों के जरिए राज्य के 55 लाख से अधिक बच्चों को पौष्टिक भोजन (Nutritional Food For School Child) मुहैया कराया जा रहा था। स्टालिन ने सत्ता में आने के बाद दोपहर की जगह बच्चों को सुबह का नाश्ता देना शुरू कर दिया। दरअसल, यह तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों की दृष्टि ही थी कि वह भोजन बच्चों को खिला रहे थे, लेकिन आत्मा उनकी मांओं की तृप्त हो रही थीं।

(Photo:IANS/Amit Shah Twitter)

MGR के काम को जयललिता ने और विस्तार दिया

एमजीआर ने अपनी सरकार के दौरान लोक कल्याण और महिला कल्याण की नींव रखी, बाद में प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी जय​ललिता ने उनके उत्तराधिकारी की तरह उनके काम को आगे बढ़ाने का काम किया। जयललिता (Jayalalitha) 1991 से लेकर 2016 के बीच राज्य की कई बार मुख्यमंत्री बनी। अपने शासन के दौरान जयललिता ने बच्चियों के विवाह के समय आर्थिक सहायता, मातृत्व सहायता, महिला स्वयं सहायता समूह, रियायती आवश्यक वस्तुएं मुहैया करवाईं। जयललिता ने बाद में 'अम्मा' ब्रांड के तहत कैंटीन, नमक, पानी, फार्मेसी और सीमेंट आदि की काफी रियायतती दरों पर उपलब्ध करवाया।

(Photo: IANS)

अम्मा कैंटीन का मामला रहा जनता के बीच सुपरहिट

अम्मा कैंटीन में गरीब और कामकाजी महिलाओं को 1 रुपये में इडली, 5 रुपये में सांभर-चावल और 10 रुपये में पूरा पौष्टिक भोजन मिल जाता था। इससे कामकाजी और गरीब महिलाओं का घर में खाना पकाने का बोझ और खर्च दोनों कम हो जाते थे। दरअसल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों ने महिलाओं को सीधे नकद देने की बजाए उनकी आर्थिक परेशानियों को कम करने, समय बचाने के साथ उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखा, जिसके चलते महिलाएं एक सॉलिड वोट बैंक के रूप में तब्दील होती गईं। हालांकि अब वहां की वर्तमान स्टालिन सरकार ने महिलाओं को प्रत्येक महीना 1,000 रुपये देने की व्यवस्था भी की है।

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