
हथियार छोड़ थामीं ईंटें (photo source- Patrika)
Surrender Naxal Story: बस्तर के घने जंगलों से एक ऐसी कहानी निकलकर सामने आ रही है, जो सिर्फ बदलाव की नहीं, बल्कि उम्मीद, पुनर्निर्माण और नई शुरुआत की मिसाल बन रही है। कभी जिन हाथों में बंदूकें थीं और जो बारूद से घर-आंगन उजाड़ने के लिए जाने जाते थे, आज वही हाथ ईंट और मिट्टी से भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्रों में आत्मसमर्पित नक्सलियों के जीवन में आया यह बदलाव पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बन चुका है।
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