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Malnutrition in India : कुपोषण की कब होगी छुट्टी, 11% अंडरवेट और 28% का विकास उम्र के हिसाब से कम

Malnutrition in India : देश में 6.69 करोड़ बच्चों की स्वास्थ्य जांच में यह खुलासा हुआ है कि 11 फीसदी बच्चे औसत से कम वजन के हैं। वहीं राजस्थान में 30 लाख बच्चों की जांच में 12% अंडरवेट, मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 22%; छत्तीसगढ़ में 12% बच्चे कम वजन के हैं। पढ़िए जग्गो सिंह धाकड़ की रिपोर्ट।
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Sep 01, 2026
Indias underweight Child
भारत के बच्चे कुपोषण के शिकार (Photo: ChatGPT)

Malnutrition in India : कुपोषण के खिलाफ जंग के बीच देश में बच्चों की सेहत की तस्वीर चौंकाने वाली है। देश में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर पोषण ट्रैकर के जुलाई 2026 तक के आंकड़ों में बड़ी तस्वीर सामने आई है। देशभर में 0 से 5 वर्ष तक के 6,69,92,507 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 11 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट, 5 प्रतिशत ओवरवेट, 28 प्रतिशत बच्चों का शारीरिक विकास उम्र के हिसाब से मध्यम या गंभीर रूप से अवरुद्ध और 3 प्रतिशत बच्चे गंभीर या मध्यम तीव्र कुपोषण की श्रेणी में पाए गए।

राज्यों के आंकड़ों में भी स्थिति अलग-अलग नजर आती है। मध्यप्रदेश में अंडरवेट बच्चों का प्रतिशत 22 है, जबकि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में यह 12-12 प्रतिशत है। वहीं मध्यम रूप से अवरुद्ध शारीरिक विकास और गंभीर रूप से अवरुद्ध शारीरिक विकास (स्टंटिंग) के मामले में मध्यप्रदेश 39 प्रतिशत के साथ इन राज्यों में सबसे आगे है।

राजस्थान में 30 लाख बच्चों की जांच, 12% अंडरवेट

राजस्थान में जुलाई 2026 तक 30,29,160 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 12 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट, 7 प्रतिशत ओवरवेट, 27 प्रतिशत स्टंटिंग और 4 प्रतिशत गंभीर तीव्र कुपोषण और मध्यम तीव्र कुपोषण (वेस्टिंग) की श्रेणी में मिले। राजस्थान में अंडरवेट बच्चों के मामले में झालावाड़ 25 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद सलूम्बर 24 प्रतिशत, डूंगरपुर 23 प्रतिशत, प्रतापगढ़ 21 प्रतिशत और टोंक-बूंदी 20 प्रतिशत पर रहे। ओवरवेट बच्चों के मामले में जालोर 19 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद बाड़मेर 13 प्रतिशत, बांसवाड़ा 12 प्रतिशत तथा डीग और डीडवाना-कुचामन 11-11 प्रतिशत पर रहे।

मध्यप्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा 22%

मध्यप्रदेश में 51,05,885 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। यहां 22 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट, 4 प्रतिशत ओवरवेट, 39 प्रतिशत स्टंटिंग और 7 प्रतिशत वेस्टिंग की श्रेणी में पाए गए। तीनों राज्यों में मध्यप्रदेश में अंडरवेट और स्टंटिंग दोनों के आंकड़े सबसे ज्यादा हैं। अंडरवेट का आंकड़ा राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 12 प्रतिशत के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक है।

छत्तीसगढ़ में अंडरवेट 12%, स्टंटिंग 22%

छत्तीसगढ़ में 17,29,273 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 12 प्रतिशत अंडरवेट, 1 प्रतिशत ओवरवेट, 22 प्रतिशत स्टंटिंग और 6 प्रतिशत वेस्टिंग की श्रेणी में मिले। छत्तीसगढ़ में ओवरवेट बच्चों का आंकड़ा 1 प्रतिशत है, जो राजस्थान के 7 प्रतिशत और मध्यप्रदेश के 4 प्रतिशत से कम है। हालांकि वेस्टिंग का आंकड़ा 6 प्रतिशत है, जो राजस्थान के 4 प्रतिशत और राष्ट्रीय स्तर के 3 प्रतिशत से अधिक है।

राष्ट्रीय तस्वीर में राजस्थान कहां?

राष्ट्रीय स्तर पर अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा 11 प्रतिशत है। राजस्थान में यह 12 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 22 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 12 प्रतिशत है। ओवरवेट के मामले में राष्ट्रीय आंकड़ा 5 प्रतिशत है। राजस्थान में यह 7 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 4 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 1 प्रतिशत है। स्टंटिंग का राष्ट्रीय आंकड़ा 28 प्रतिशत है। राजस्थान में 27 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 39 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 22 प्रतिशत बच्चे इस श्रेणी में पाए गए। वेस्टिंग का राष्ट्रीय आंकड़ा 3 प्रतिशत है। राजस्थान में यह 4 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 7 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 6 प्रतिशत है।

राजस्थान: पोषण सेवाओं से जुड़े 40.68 लाख लाभार्थी

राजस्थान में जुलाई 2026 तक 40,68,765 पात्र लाभार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 0 से 6 वर्ष के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां शामिल हैं। इनमें 6 महीने से 3 वर्ष के 17,57,943 बच्चे, 3 से 6 वर्ष के 13,40,599 बच्चे, 4,14,605 गर्भवती महिलाएं, 0 से 6 महीने के 2,65,388 नवजात, 2,63,360 स्तनपान कराने वाली माताएं और 26,870 किशोरियां शामिल हैं।

आंगनबाड़ी नेटवर्क के जरिए निगरानी

राजस्थान में कुल 62,120 आंगनबाड़ी केंद्र हैं और इनमें 60,989 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कार्यरत हैं। इनमें 25,961 केंद्रों के पास अपनी इमारत, 61,155 में पेयजल सुविधा और 49,109 में कार्यात्मक शौचालय उपलब्ध हैं।

राजस्थान को चार साल में 3,452 करोड़ का केंद्रीय फंड

मिशन सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 के तहत वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के दौरान राजस्थान को कुल 3,452.63 करोड़ रुपए का केंद्रीय फंड जारी हुआ। इसमें से राज्य ने 3,362.35 करोड़ रुपए, यानी करीब 97.39 प्रतिशत का उपयोग किया।

वित्त वर्ष 2021-22 में 682.65 करोड़ रुपए जारी हुए और 771.64 करोड़ रुपए उपयोग किए गए। 2022-23 में 936.17 करोड़ रुपए जारी और 974.02 करोड़ रुपए उपयोग हुए। 2023-24 में 1,091.96 करोड़ रुपए जारी हुए और 880.87 करोड़ रुपए का उपयोग हुआ। 2024-25 में 741.85 करोड़ रुपए जारी हुए और 735.82 करोड़ रुपए का उपयोग किया गया। 2025-26 में 843.51 करोड़ रुपए जारी हुए हैं।

Updated on:
01 Sept 2026 05:27 pm
Published on:
01 Sept 2026 05:27 pm