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न कुंडी, न ताला, न किवाड़: राजस्थान का एक ऐसा अनोखा गांव जहां पुलिस की नहीं, संत के वरदान की चलती है गारंटी

भीलवाड़ा जिले में सारण के खेड़ा गांव में 300 साल से घरों के दरवाजे गायब हैं। यहां के लोग घरों के दरवाजे में ताले लगाने के नाम पर हंसने लग जाते हैं। इस गांव में ऐसी क्या बात है, जिसके चलते यहां लोगों ने तालों के बारे में सोचना छोड़ दिया। आइए इस बारे में अनिल सिंह की खास रिपोर्ट पढ़ते हैं।
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Sep 10, 2026
No Lock in Saran Kheda
भीलवाड़ा में एक ऐसा गांव है, जहां 300 वर्षों से किसी के घर ताला नहीं लगा। (Photo: Rajasthan Patrika, Designed by ChatGpt)

क्या आप ऐसे किसी गांव की कल्पना कर सकते हैं जहां किसी भी मकान के मुख्य द्वार पर दरवाजा ही न हो, जहां लोग बेफिक्र होकर सोते हैं और चोरी या डकैती का डर उनके आसपास भी नहीं फटकता। जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का एक जीता-जागता सच है।

100 परिवारों वाले गांव में एक भी मकान पर नहीं लगते ताले

भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ उपखंड क्षेत्र में स्थित महुआ पंचायत का सारण का खेड़ा गांव खूब चर्चा में है। करीब 100 परिवारों की आबादी वाले इस गांव की सबसे अजब-गजब बात यह है कि यहां पिछले 300 सालों से किसी भी मकान के मुख्य द्वार पर किवाड़ (गेट) नहीं लगाया गया। जानवरों को अंदर आने से रोकने के लिए लोग महज लकड़ी की टांटी या जाली का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मुख्य दरवाजे पर पक्का किवाड़ या ताला लगाने का रिवाज पूरी तरह गायब है।

महात्मा भगवानदास का चमत्कारिक वरदान

गांव के बुजुर्गों के अनुसार, लगभग तीन सदी पहले महात्मा भगवानदास गांव के पास बहने वाली उवली नदी के किनारे स्थित शिव मंदिर में तपस्या करते थे। गांव से प्रस्थान करते समय उन्होंने ग्रामीणों को आशीर्वाद देते हुए कहा था कि यदि वे अपने घरों के मुख्य द्वार पर किवाड़ नहीं लगाएंगे, तो गांव में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहेगी। संत के उस वचन का प्रभाव ऐसा है कि आज तक इस गांव में न तो कोई चोरी की घटना हुई है और न ही लूटपाट की।

जिन्होंने तोड़ी परंपरा, उन्हें भुगतना पड़ा अंजाम

गांव के लोगों का दावा है कि कुछ समय पहले जब कुछ परिवारों ने इस पुरानी परंपरा को तोड़कर मुख्य द्वार पर दरवाजा लगाने की कोशिश की, तो उनके साथ अस्वाभाविक घटनाएं घटने लगीं और उन्हें भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। इसके बाद से गांव का हर व्यक्ति इस परंपरा को पूरे नियम और आस्था के साथ निभा रहा है।

महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर जैसी है पहचान

जैसे महाराष्ट्र का प्रसिद्ध शनि शिंगणापुर गांव बिना दरवाजों और तालों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, ठीक उसी तरह राजस्थान का सारण का खेड़ा भी पुलिस प्रशासन और आम जनता के लिए मिसाल बन चुका है। अपराध-मुक्त और भरोसे पर टिकी यह अनूठी जीवनशैली साबित करती है कि आस्था और एकजुटता के आगे तालों की कोई जरूरत नहीं होती।

'संत के वचन की हम पालना कर रहे हैं'

इस गांव के निवासी पेमालाल बैरवा का कहना है कि राजस्थान में सम्भवतया सारण का खेड़ा गांव अनूठा होगा। हमारे गांव में मुख्य दरवाजे पर गेट नहीं लगाया जाता है। महात्मा ने ​​शिव मंदिर में तपस्या की थी। यहां से जाते समय आशीर्वाद देकर गए थे कि घरों में दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे तो गांव में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहेगी। संत के इस वचन की हम सब ग्रामीण पालना कर रहे है। करीब तीन सौ साल पुरानी परम्परा ग्रामीण निर्वाहन कर रहे है। यहां ना कभी चोरी होती है और ना ही लूटपाट। मवे​शियों को घर में जाने से रोकने के लिए कांटों की बाड़ जरूरी लगाए रखते है।

'पुलिस प्रशासन के लिए भी हमारा गांव बना मिसाल'

वहीं इस गांव के बुजुर्ग शंकर सिंह का कहना है कि संत के आशीर्वाद देकर गेट नहीं लगाने की बरसों पुरानी परम्परा जारी है। जिस परिवार ने इस परम्परा को तोड़ा उनके परिवार में अस्वाभाविक हुआ। परिवार में कोई नाम लेने वाला नहीं है। उन्हें भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। इसके बाद से गांव का हर व्यक्ति इस परंपरा को पूरे नियम और आस्था के साथ निभा रहा है। जैसे महाराष्ट्र का प्रसिद्ध शनि शिंगणापुर गांव बिना दरवाजों और तालों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, ठीक उसी तरह राजस्थान का सारण का खेड़ा भी पुलिस प्रशासन और आम जनता के लिए मिसाल बन चुका है।

Updated on:
10 Sept 2026 12:10 pm
Published on:
10 Sept 2026 11:50 am