Patrika Special News

Operation Sindoor के बाद पाकिस्तानी नागरिकों पर सख्ती, कोई नहीं कर पाया घुसपैठ, सिर्फ 5 को मिली एंट्री, जानें नया प्रोटोकॉल

Operation Sindoor: पाकिस्तान से भारत आने वाले हरेक नागरिक पर काफी निगरानी रखी जा रही है। एफआरओ से हरी झंडी मिलने के बाद ही पाक नागरिकों को वीजा दिया जा रहा है। भारत में आते ही उन्हें एफआरओ में हाजिरी देनी होती है। इस बारे में पढ़िए पत्रिका के सीनियर रिपोर्टर मुकेश शर्मा की विस्तृत रिपोर्ट।
3 min read
Jul 11, 2026
India Pakistan Tension Operation Sindoor Pakistani Citizens in India FRRO Rules
भारत में पाकिस्तानी नागरिकों की एंट्री पर सख्ती से बदली तस्वीर (Photo: IANS)

Operation Sindoor: भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े सुरक्षा तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों की निगरानी पहले से कहीं अधिक कड़ी कर दी गई है। अब यदि कोई पाकिस्तानी नागरिक भारत आता है, तो उसे वीजा देने की अनुमति विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) से लेनी होती है। यहां उसे सबसे पहले अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है, ताकि सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में उसकी एंट्री हो सके। इसके बाद ही वह निर्धारित शर्तों के अनुसार अपने गंतव्य तक जा सकता है।

पाकिस्तान नागरिकों पर रखी जाती है खास निगरानी

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भारत की आंतरिक सुरक्षा को देखते हुए पाकिस्तान से आने वाले प्रत्येक नागरिक की गतिविधियों पर निगरानी रखना आवश्यक है। यही कारण है कि वीजा जारी होने से लेकर भारत में प्रवेश, प्रवास और वापसी तक की पूरी प्रक्रिया बहुस्तरीय सुरक्षा जांच से गुजरती है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरी तरह से बदली तस्वीर

एफआरओ और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर से पहले राजस्थान में लगभग 400 पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान की गई थी। शुरुआती कार्रवाई में 129 नागरिकों को राज्य से बाहर भेजा गया, जबकि इसके बाद की कार्रवाई को सुरक्षा कारणों से गोपनीय रखा गया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि जयपुर में एक भी नया पाकिस्तानी मुस्लिम नागरिक प्रवेश नहीं पा सका है, जबकि निर्धारित नियमों के तहत पांच पाकिस्तानी अल्पसंख्यक नागरिक शहर पहुंचे। वहीं पहले से रह रहे पाक अल्पसंख्यकों को लंबी अवधि के वीजा (Long Term Visa) की प्रक्रिया के अंतर्गत राहत दी गई। इससे पहले जयपुर में रह रहे सात पाकिस्तानी मुस्लिम नागरिकों को वापस भेज दिया गया था।

राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में अधिक आवाजाही

राजस्थान में पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों की सबसे अधिक आवाजाही जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में होती रही है। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में रिश्तेदारी, धार्मिक और मानवीय कारणों से लोगों का आना-जाना लंबे समय से होता रहा है, लेकिन अब प्रत्येक मामले में सुरक्षा एजेंसियां पहले से कहीं अधिक सतर्क हैं।

भारत आने से पहले ही शुरू हो जाती है जांच

पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों को दूसरे विदेशी नागरिकों की तुलना में कहीं अधिक सघन जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। वीजा आवेदन के समय आवेदक को भारत आने का स्पष्ट कारण बताना होता है। देश की सुरक्षा एजेंसियां उसकी पृष्ठभूमि, यात्रा के उद्देश्य और दस्तावेजों का सत्यापन करती हैं। भारत में जिस व्यक्ति ने उसे आमंत्रित किया है, उससे शपथ-पत्र लिया जाता है। इसमें यह जानकारी भी देनी होती है कि मेहमान कहां ठहरेगा, किन लोगों से मिलेगा, किन शहरों में जाएगा और कितने दिन भारत में रहेगा। भारत पहुंचने के बाद भी संबंधित एजेंसियां समय-समय पर उसके ठहरने और गतिविधियों पर नजर रखती हैं। यदि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन होता है तो तत्काल कार्रवाई की जा सकती है।

FRRO में दर्ज करानी होती है मौजूदगी

भारत पहुंचने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को सबसे पहले एफआरआरओ (FRRO) कार्यालय पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। मान लीजिए कि उसे जयपुर आना है तो वह शहर पहुंचने के बाद एफआरओ कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा। यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि वह किसी अन्य स्थान पर जाना चाहता है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जानकारी भी संबंधित एजेंसियों को देनी होती है।

इन श्रेणियों में मिलती है भारत आने की अनुमति

भारत सरकार विशेष परिस्थितियों में पाकिस्तानी नागरिकों को विभिन्न श्रेणियों के वीजा जारी करती रही है।

  • राजनयिक वीजा
  • मेडिकल वीजा
  • पर्यटक वीजा
  • धार्मिक वीजा
  • विद्यार्थी वीजा
  • खेल वीजा
  • विवाह समारोह में शामिल होने का वीजा
  • रिश्तेदारों से मिलने का वीजा
  • अन्य विशेष मानवीय परिस्थितियों के वीजा

राजस्थान में पांच साल में कई जासूसी नेटवर्क का खुलासा

राजस्थान के कुछ जिले भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगने के कारण लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्राथमिकता में रहे हैं। बीते पांच वर्षों में राजस्थान में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में करीब 20 से अधिक लोगों को विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है। इनमें सरकारी कर्मचारी, संविदाकर्मी, सीमा क्षेत्र के निवासी तथा सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के संपर्क में आए लोग शामिल रहे हैं।

राजस्थान में ये एजेंसियां रखती नजर

जासूसी करने वालों पर राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा, एटीएस, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों तथा सेना की इंटेलिजेंस विंग संयुक्त रूप से करती हैं। यहां तक की हाल ही में जयपुर में पाकिस्तानी आतंकी शज्जात उर्फ खरगोश जयपुर में रहकर भाग निकला था। हाल के वर्षों में कई गिरफ्तारियां जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर व अन्य जिलों से हुईं। इनमें कुछ मामलों में सरकारी विभागों से जुड़े कर्मचारियों पर गोपनीय सूचनाएं साझा करने के आरोप लगे, जबकि कुछ लोग आर्थिक लालच या हनी ट्रैप के जरिए पाकिस्तानी एजेंटों के संपर्क में आए।