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Water Crisis: रावी, ब्यास और सतलुज का कम हुआ जल प्रवाह, 20% बारिश कम, पाकिस्तान के बांधों में रह गया एक तिहाई पानी

Water Crisis: भारत के हिमाचल प्रदेश और पंजाब के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में इस बार बहुत कम बारिश हुई है। नतीजा यह हुआ कि रावी ब्यास और सतलुज में जल प्रवाह कम हुआ है। एक ताजे अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पिछले सात दशकों में इस इलाके में 20 प्रतिशत बारिश कम हुई है। जानिए पाकिस्तान और भारत पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
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रावी, ब्यास और सतलुज के कैचमेंट एरिया में 20% बारिश कम दर्ज की गई है। (Photo: IANS)

Water Crisis in Pakistan: भारत में हिमाचल प्रदेश और पंजाब के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में इस साल बारिश काफी कम दर्ज की गई है। इसके चलते रावी, ब्यास और सतलुज नदियों में भी पानी की आवक कम हो गई। इसका असर भारत के प्रमुख जलाशयों से छोड़े जाने वाले पानी में भी कमी आई। वहीं एक ताजे अध्ययन के अनुसार, रावी, ब्यास और सतलुज जैसी तीन पूर्वी नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Area) में 1951 से 2024 के बीच वर्षा में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है। इसका असर भारत से लेकर पाकिस्तान तक के बांधों में पानी कम हुआ है।

वर्ष 2025 के अप्रैल महीने में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया और उसके बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को "स्थगित" करने का निर्णय लिया। हालांकि भारत ने संधि को कानूनी रूप से "रद्द" नहीं किया, बल्कि उसके प्रावधानों के पालन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित रखा है। हालांकि इससे पहले 2023 और 2024 में भारत पाकिस्तान को संधि की समीक्षा और संशोधन के लिए एक से अधिक नोटिस भेज चुका था। इस नोटिस में भारत ने यह तर्क दिया था कि बढ़ती जनसंख्या, जल की बढ़ती जरूरत, स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के तेज विकास की आवश्यकता और जलवायु परिवर्तन के कारण जल उपलब्धता में आए बदलाव को देखते हुए 1960 में हुए भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु समझौते की समीक्षा होनी चाहिए।

वर्ष 2026 में कहां कितनी हुई बारिश

रावी, ब्यास और सतलुज के कैचमेंट क्षेत्रों में इस अवधि में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई। रावी क्षेत्र में लगभग 14 मिमी, ब्यास में 28 मिमी और सतलुज क्षेत्र में केवल 7 मिमी वर्षा दर्ज होने के कारण भारत ने पोंग, रंजीत सागर और भाखड़ा जैसे बांधों से जल छोड़ने में कमी की। इसका असर नीचे की ओर बहने वाले प्रवाह पर पड़ा।

पिछले 10 वर्षों के उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि रावी (रंजीत सागर), ब्यास (पोंग) और सतलुज (भाखड़ा) के कैचमेंट एरिया में वर्षा में काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। भाखड़ा–ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) नियमित रूप से भाखड़ा और पोंग कैचमेंट में हुई वार्षिक वर्षा का रिकॉर्ड प्रकाशित करता है, लेकिन रंजीत सागर (रावी) का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है।

भाखड़ा कैचमेंट में औसतन 1400 मिमी बारिश होती है

भाखड़ा (सतलुज) कैचमेंट में वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक कुल वार्षिक वर्षा (मिमी) क्रमशः लगभग 961, 926, 892, 1352, 1382, 874, 1161, 2519 और 1651 मिमी दर्ज की गई है। हालांकि, भाखड़ा–ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने वर्ष 2023-24 का वार्षिक वर्षा का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया। इन उपलब्ध वर्षों का औसत लगभग 1,400 मिमी प्रति वर्ष बैठता है। वर्ष 2022-23 सबसे अधिक 2519 मिमी वर्षा हुई।

पोंग कैचमेंट में 2120 मिमी सालाना बारिश

पोंग (ब्यास) कैचमेंट में इसी अवधि के उपलब्ध आंकड़े क्रमशः 1785, 1770, 1916, 2426, 1987, 1283, 1786, 3614 और 2519 मिमी रहे। इन वर्षों का औसत लगभग 2,120 मिमी प्रति वर्ष निकलता है। वर्ष 2022-23 में यहां असाधारण रूप से 3614 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जो पिछले दशक में सर्वाधिक रही।

रंजीत सागर बांध में 1,600–2,000 मिमी औसत बारिश

रंजीत सागर बांध (रावी) कैचमेंट के लिए BBMB द्वारा भाखड़ा और पोंग की तरह सार्वजनिक वार्षिक वर्षा तालिका जारी नहीं की जाती। हालांकि परियोजना एवं मौसम विभाग के दस्तावेज बताते हैं कि यह हिमाचल प्रदेश के चंबा तथा आसपास के ऊपरी पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित है, जहां सामान्यतः लगभग 1,600–2,000 मिमी वार्षिक वर्षा होती है। वर्ष-दर-वर्ष इसमें भी बड़ा उतार-चढ़ाव देखा जाता है।

भारत ने बांधों से कितना कम पानी छोड़ा?

वर्ष 2026 के ​लिए मौसम विभाग ने अधिक वर्षा का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक बारिश अनुमान से काफी कम रही। इसी कारण बांधों में अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं पहुंचा। कम वर्षा के कारण भारतीय बांध प्रबंधन ने जल संरक्षण के उद्देश्य से डिस्चार्ज घटा दिया।

  • पोंग बांध (ब्यास) से छोड़ा जाने वाला पानी लगभग 50,000 क्यूसेक से घटाकर पहले 24,000 क्यूसेक और बाद में लगभग 17,000 क्यूसेक कर दिया गया।
  • रंजीत सागर बांध (रावी) से कुछ समय के लिए शून्य डिस्चार्ज रखा गया।
  • भाखड़ा बांध (सतलुज) से लगभग 31,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता रहा, क्योंकि उसकी संचालन आवश्यकताएं अलग थीं।

क्या संधि स्थगित होने से पाकिस्तान के बांधों में पानी कम हो गया?

भारत द्वारा संधि स्थगित करने के बाद पाकिस्तान ने कई बार आरोप लगाया कि उसके जलाशयों में पानी की उपलब्धता कम हुई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने भी बताया कि भारत ने कुछ परियोजनाओं में जलाशयों की सफाई (desilting) और फ्लशिंग की, जिससे कुछ समय के लिए पाकिस्तान की ओर जाने वाले प्रवाह में तेज उतार-चढ़ाव आया। हालांकि अब तक भारत या पाकिस्तान की किसी आधिकारिक एजेंसी ने यह आंकड़ा जारी नहीं किया है कि पाकिस्तान के किसी विशेष बांध जैसे मंगला, तरबेला या चश्मा में पानी कितने प्रतिशत या कितने टीएमसी कम हो गया।

पाकिस्तान के किन बांधों पर पड़ सकता प्रभाव है?

  • सिंधु नदी पर तरबेला बांध (Tarbela Dam)
  • झेलम नदी पर मंगला बांध (Mangla Dam)
  • सिंधु नदी पर चश्मा बराज (Chashma Barrage)

इन परियोजनाओं में जल स्तर नदी के प्रवाह, मानसून, हिमपात के पिघलने तथा स्थानीय वर्षा पर निर्भर करता है। भारत द्वारा पश्चिमी नदियों पर बड़े पैमाने पर पानी रोकने की क्षमता अभी भी सीमित है, इसलिए दीर्घकालिक और बहुत बड़ी कमी तत्काल संभव नहीं मानी जाती।

क्या भारत तुरंत पाकिस्तान का पानी रोक सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में भारत के पास पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर इतनी बड़ी भंडारण क्षमता नहीं है कि वह लंबे समय तक पाकिस्तान जाने वाला अधिकांश पानी रोक सके। हालांकि संधि स्थगित होने के बाद भारत जल प्रवाह संबंधी आंकड़े साझा न करने, बांधों की फ्लशिंग अपनी सुविधा से करने, और नई जलविद्युत और भंडारण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने जैसे कदम उठा सकता है। इनका भविष्य में अधिक प्रभाव दिखाई दे सकता है।