
सतलुज को ZEE5 प्लेटफॉर्म से हटाने के बाद सिनेमा पर बैन को लेकर बहस खड़ी हो गई है। (Photo: AI)
Satluj Row : हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी और दिलजीत दोसांझ अभिनीत सतलुज (Satluj) 3 जुलाई 2026 को ZEE5 पर रिलीज़ हुई, लेकिन लगभग 48 घंटे बाद भारत में इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इसके बाद से देशभर में इस फिल्म को लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई। पिछले कुछ वर्षों में सतलुज कई बार विवादों में रही। फिल्म का नाम बदलने से लेकर इसमें कई कट लगाए जाने तक, इसे लगातार विवादों का सामना करना पड़ा। सतलुज विवाद के बहाने आइए जानते हैं कि पिछले एक दशक में किन-किन फिल्मों पर पूर्ण और आंशिक प्रतिबंध लगाए गए।
कई बार किसी फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है, जबकि कई मामलों में केवल कुछ देशों या राज्यों में उसकी रिलीज़ पर रोक लगती है। इसके अलावा, कुछ फिल्मों को दृश्य हटाने, आयु-सीमा तय करने या सीमित प्रदर्शन की अनुमति दी जाती है, जिसे आंशिक प्रतिबंध माना जाता है। पिछले एक दशक में कई ऐसी फिल्में रहीं, जो धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारणों से विवादों में आईं।
सतलुज मूल रूप से पंजाब 95 (Punjab '95) के नाम से बनाई गई थी। कई वर्षों तक प्रमाणन और अन्य विवादों के कारण इसकी थिएटर रिलीज़ नहीं हो सकी। इसके बाद 3 जुलाई 2026 को इसे ZEE5 पर सतलुज नाम से सीधे ओटीटी पर रिलीज़ किया गया। हालांकि, रिलीज़ के लगभग 48 घंटे बाद इसे भारत में ZEE5 से हटा दिया गया। यही वजह है कि इसकी कमाई का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत रिलीज़ से पहले ही बड़े विवाद में घिर गई। कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि फिल्म में रानी पद्मिनी के इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। विरोध इतना बढ़ा कि कई राज्यों ने शुरुआत में इसकी रिलीज़ पर रोक लगाने की घोषणा कर दी। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म की रिलीज़ सुनिश्चित कराई। इसके बावजूद कुछ राज्यों में शुरुआती दिनों में इसका प्रदर्शन नहीं हो सका। इसे फिल्म पर आंशिक प्रतिबंध का प्रमुख उदाहरण माना जाता है। विवादों के बावजूद फिल्म ने दुनिया भर में करीब 600 करोड़ रुपये की कमाई की।
द केरला स्टोरी (2023) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद हुआ। पश्चिम बंगाल सरकार ने 2023 में कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया था, जबकि तमिलनाडु में कई सिनेमाघरों ने सुरक्षा कारणों से इसका प्रदर्शन रोक दिया। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया। इस तरह यह फिल्म कुछ समय के लिए आंशिक रूप से प्रतिबंधित रही। फिल्म ने भारत और विदेशों में मिलाकर 300 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की।
द कश्मीर फाइल्स (2022) पर भारत में कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया, लेकिन कई देशों में इसे लेकर अलग-अलग निर्णय हुए। कुछ स्थानों पर इसका प्रदर्शन सीमित रहा, जबकि कुछ देशों ने सुरक्षा और सामाजिक तनाव की आशंका के चलते इसकी स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी। सिंगापुर ने फिल्म को रिलीज़ की अनुमति नहीं दी। वहां के सूचना एवं मीडिया विकास प्राधिकरण (IMDA) ने कहा कि फिल्म में मुसलमानों का "एकतरफा और उत्तेजक चित्रण" है, जिससे विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच तनाव और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
न्यूज़ीलैंड में फिल्म को पहले R16 प्रमाणन मिला था। बाद में मुस्लिम समुदाय की चिंताओं के बाद मुख्य सेंसर ने इसकी समीक्षा शुरू की। समीक्षा के दौरान स्थानीय वितरक ने स्वेच्छा से रिलीज़ टाल दी। बाद में फिल्म को R18 रेटिंग के साथ रिलीज़ की अनुमति मिल गई। वहीं, यूएई में फिल्म की रिलीज़ में देरी हुई और अतिरिक्त जांच कराई गई। इसके बाद यूएई के सेंसर बोर्ड ने फिल्म को 15+ आयु वर्ग के लिए बिना किसी कट के मंजूरी दे दी। कतर में यह फिल्म रिलीज़ नहीं हो सकी।
दिल्ली के निर्भया कांड पर आधारित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री इंडियाज़ डॉटर (India's Daughter) पर 2015 में भारत सरकार ने इसके प्रसारण और सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। सरकार का तर्क था कि इससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यह पिछले दशक के सबसे चर्चित पूर्ण प्रतिबंधों में से एक है।
उड़ता पंजाब पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था, लेकिन भारतीय सेंसर बोर्ड ने लगभग 90 कट लगाने का सुझाव दिया था। निर्माताओं ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और अदालत ने केवल एक मामूली कट के साथ फिल्म रिलीज़ करने की अनुमति दी। इसलिए इसे आंशिक सेंसरशिप का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। वर्ष 2016 में रिलीज़ हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसकी कमाई 100 करोड़ रुपये से कम रही।
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का को पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। बोर्ड का कहना था कि फिल्म महिलाओं की कामुकता पर अत्यधिक केंद्रित है। बाद में अदालती प्रक्रिया के बाद कुछ संशोधनों के साथ इसे 2017 में रिलीज़ की अनुमति मिल गई। कारोबार के लिहाज से यह फिल्म बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर लंबे समय तक बहस होती रही।
2019 के आम चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म की रिलीज़ पर मतदान पूरा होने तक रोक लगा दी थी। चुनाव समाप्त होने के बाद फिल्म रिलीज़ हुई। यह स्थायी नहीं, बल्कि चुनाव अवधि तक सीमित अस्थायी प्रतिबंध था। बॉक्स ऑफिस पर भी यह फिल्म औसत से कम प्रदर्शन कर सकी।
द साबरमती रिपोर्ट को भारत में रिलीज़ की अनुमति मिली, लेकिन कुछ देशों में इसके प्रदर्शन को लेकर अतिरिक्त समीक्षा और सीमित स्क्रीनिंग की स्थिति बनी। कुछ क्षेत्रों में इसे देर से रिलीज़ किया गया। हालांकि, इस पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं लगाया गया। भारत में आम चुनाव 2024 के दौरान लागू आचार संहिता और सेंसर प्रमाणन की प्रक्रिया के कारण इसकी रिलीज़ तारीख आगे बढ़ा दी गई थी। बाद में इसे CBFC प्रमाणपत्र मिलने के बाद सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया। कारोबार के लिहाज से यह फिल्म भी कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी।
देव पटेल की फिल्म मंकी मैन (Monkey Man) 2024 में कई देशों में रिलीज़ हुई, लेकिन भारत में इसे लंबे समय तक थिएटर में रिलीज़ नहीं किया जा सका। रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा और संवेदनशील धार्मिक संदर्भों के कारण इसकी रिलीज़ को लेकर चर्चा होती रही। फिल्म ने दुनिया भर में करीब 290 करोड़ रुपये की कमाई की।
भारतीय पृष्ठभूमि पर आधारित सैंटोश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, लेकिन भारत में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कई आपत्तियां उठाईं। निर्माताओं ने आवश्यक बदलाव स्वीकार नहीं किए, जिसके कारण फिल्म को भारतीय सिनेमाघरों में प्रमाणपत्र नहीं मिल सका और इसे भारत में रिलीज़ नहीं किया जा सका। यह फिल्म 2025 में रिलीज़ हुई और कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की गई।
Updated on:
10 Jul 2026 10:21 am
Published on:
10 Jul 2026 10:21 am
