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रायपुर बन सकता है मध्य भारत का कैंसर हब, पत्रिका से खास बातचीत में पद्मभूषण डॉ. आडवानी ने कहा- अब डर नहीं, तकनीक से जीतेंगे

Personalized Cancer Treatment: कैंसर के इलाज में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां इसे एक ही तरह की बीमारी मानकर सभी मरीजों को एक जैसा इलाज दिया जाता था, वहीं अब चिकित्सा विज्ञान ने इसे कई अलग-अलग प्रकारों में समझना शुरू कर दिया है।
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Apr 11, 2026
पद्मभूषण डॉ. सुरेश एच. अडवानी (फोटो सोर्स- पत्रिका)
पद्मभूषण डॉ. सुरेश एच. अडवानी (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ताबीर हुसैन। Personalized Cancer Treatment: अब हम कैंसर को केवल एक नाम से नहीं जानते। उदाहरण के तौर पर, 'लंग कैंसर' सिर्फ एक बीमारी नहीं है, बल्कि इसके 50 अलग-अलग प्रकार हैं। अब हम 'मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस' और 'जीन लेवल' पर जाकर देखते हैं कि मरीज को कौन सा म्यूटेशन है। इसी को 'पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट' कहते हैं, जहां हर मरीज की शारीरिक बनावट और जीन के हिसाब से अलग-अलग दवा दी जाती है।

ये कहा एशिया के टॉप कैंसर विशेषज्ञ सूची में शुमार और इंडियन ऑन्कोलॉजी के जनक पद्मभूषण डॉ. सुरेश एच. अडवानी ने। वे राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। इस दौरान पत्रिका से खास बातचीत की।

अब कीमोथेरेपी का खौफ नहीं

मरीजों में कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स (उल्टी, बाल झड़ना) के डर पर डॉ. अडवानी ने कहा कि अब वह जमाना लद गया। नई दवाओं और 'प्रिसिजन टेक्नोलॉजी' की वजह से अब साइड इफेक्ट्स बहुत कम हो गए हैं। पहले मरीज हफ्तों बिस्तर पर रहता था, अब कीमो लेकर उसी दिन घर जाकर खाना खाता है और अगले दिन ऑफिस जा सकता है।

रायपुर में डॉक्टर्स बढ़ेगे तो बाहर जाना रुकेगा

रायपुर के बढ़ते मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर उन्होंने कहा कि यहां सुविधाएं बहुत अच्छी हुई हैं। अब 100 में से शायद एक ही मरीज को मुंबई जाने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे-जैसे यहां विशेषज्ञों की संख्या बढ़ीगी, रायपुर मध्य भारत का सबसे बड़ा कैंसर ट्रीटमेंट हब बन जाएगा।

युवाओं को संदेश: घबराएं नहीं रास्ता बनाएं

बचपन में पोलियो के कारण व्हीलचेयर पर आए डॉ. अडवानी का जीवन संघर्षों की मिसाल है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन बाधाओं से घबराने के बजाय उनके साथ रास्ता बनाना सीखना चाहिए।

सर्वाइकल टीके का साइड इफेक्ट नहीं

छत्तीसगढ़ की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान पर डॉ. अडवानी ने टीकों को लेकर फैले भ्रम को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, यह टीका 'डेड वायरस' से बना है, जिससे साइड इफेक्ट का सवाल ही नहीं उठता। पूरी दुनिया में इसे परखा गया है और यह भविष्य में कैंसर को रोकने का सबसे अचूक हथियार है।

50 साल में लैंडमार्क चेंजेस

डॉ. अडवानी ने अपने 50 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले कैंसर को मौत की दस्तक माना जाता था। लेकिन आज लैब से क्लिनिक तक पहुंची तकनीक ने सब बदल दिया है। उन्होंने कहा, लैंडमार्क चेंजेस आए हैं। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की मेहनत से अब रिकवरी रेट और इलाज के नतीजे पूरी तरह बदल चुके हैं।

स्टेज-1: 100% जीत की गारंटी

उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर 'अर्ली डायग्नोसिस' (समय पर पहचान) हो जाए, तो कैंसर पूरी तरह खत्म हो सकता है। जैसे ब्रेस्ट कैंसर में अगर 2 सेंटीमीटर का ट्यूमर स्टेज-1 पर पकड़ा जाए, तो न ब्रेस्ट खोने का डर रहता है और न ही लंबे इलाज की जरूरत। छोटी सी सर्जरी और कम डोज कीमो से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है।

Updated on:
12 Apr 2026 12:47 pm
Published on:
11 Apr 2026 05:00 pm