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बस्तर में खत्म होती जा रही प्राकृतिक संपदा, हर्रा-बहेड़ा अब दुर्लभ वनौषधि बनने की ओर

Bastar Herbs Decline: बस्तर में हर्रा-बहेड़ा उत्पादन में 90% गिरावट, जंगलों की कटाई और मौसम बदलाव से वनोपज संकट गहराया। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर, वनौषधियों के संरक्षण की मांग तेज।
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जगदलपुर

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Laxmi Vishwakarma

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Updated: 30 May 2026, 12:22 PM IST

Forest Produce Decline

बस्तर में खत्म होती प्राकृतिक संपदा (photo source- Patrika)

बस्तर अंचल के जंगलों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली बहुमूल्य वनौषधियां हर्रा और बहेड़ा गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। पिछले तीन वर्षों से इनकी खरीदी लगभग बंद है और उत्पादन में करीब 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। जंगलों में फलन कम होने से वनाश्रित परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है, वहीं आयुर्वेदिक दवाओं का कारोबार भी संकट में आ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों की कटाई, अनियमित बारिश और बढ़ता तापमान इसके प्रमुख कारण हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है।

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