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PKC-ERCP : राजस्थान में नदियां लाएंगी खुशियां, प्रदेश के 17 जिलों में बढ़ेगी हरियाली, जानें क्या है पूरी योजना?

PKC-ERCP : ईआरसीपी-पीकेसी से राजस्थान के 17 जिले सरसब्ज होंगे। चंबल नदी से पांच लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित की जा सकेगी। यह योजना किसानों के लिए कैसे वरदान साबित होने वाली है, इस बारे आशीष जोशी की खास रिपोर्ट पढ़िए।
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Oct 21, 2026
Green Revolution
राजस्थान के 17 जिले होंगे सरसब्ज। (photo: rajasthan Patrika)

PKC-ERCP Project : देश में हाड़ौती जलशक्ति के रूप में उभर रहा है। देश-दुनिया में एक ओर राजस्थान की छवि मरुप्रदेश और सूखे प्रदेश की है, वहीं कोटा संभाग से गुजर रही नदियां खुशियों की सौगात ला रही हैं। नदियों के कारण हाड़ौती संभाग सरसब्ज हो गया है। आने वाले सालों में कोटा संभाग प्रदेश में सबसे अधिक सिंचित क्षेत्र होगा और इन नदियों के पानी से आधे राजस्थान की प्यास बुझेगी।

वहीं पार्वती-कालीसिंध-चंबल ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (PKC-ERCP) योजना का पहला बांध कोटा जिले में बनकर तैयार हो गया है। इस परियोजना में प्रदेश के 17 जिलों के सपने सरसब्ज होंगे। यह किसानों के लिए वरदान साबित होगी।

चंबल नदी से पांच लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित

राजस्थान की एकमात्र सदानीरा चंबल नदी से राजस्थान और मध्य प्रदेश की पांच लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। चंबल नदी पर चार बांध बने हुए हैं। गांधी सागर बांध मध्यप्रदेश में है, जबकि राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध कोटा बैराज राजस्थान में है। चंबल नदी की दाईं ओर मुख्य नहर से मध्य प्रदेश तक पानी पहुंचता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच हाल ही में चंबल जल बंटवारा तय हो गया है। मार्च तक नहरों में जल प्रवाह जारी रहेगा।

(Photo: Rajasthan Patrika)

सबसे बड़ा सिंचित क्षेत्र होगा

राजस्थान में झालावाड़ पहला जिला है, जहां नदियों को इंटरलिंक किया गया है। इससे चंवली बांध की सूखी पड़ी जमीन सरसब्ज हो गई है। हाड़ौती में दो दर्जन से अधिक नदियां बहती है। जो चम्बल की सहायक नदियां है। आगामी सालों में हाड़ौती प्रदेश का सबसे बड़ा सिंचित क्षेत्र होने वाला है। इससे कृषि के क्षेत्र में हाड़ौती का दबदबा और बढ़ेगा।

देश की सबसे बड़ी वाटर टनल बन रही

परवन वृहद सिंचाई परियोजना देश की पहली अत्याधुनिक और पाइप लाइन से सिंचित करने वाली परियोजना होगी। इसमें देश की सबसे बड़ी वाटर टनल बनाई जा रही है। पर्वत को काटकर नहर निकाली जाएगी। परवन नदी पर अकावद के पास बांध का निर्माण कार्य चल रहा है। अकावद क्षेत्र ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। वन क्षेत्र की जमीन अवाप्ति की लम्बी प्रक्रिया थी। कई दशकों के प्रयासों के बाद भी वन क्षेत्र से नहर की अनुमति नहीं मिली। पहाड़ों को काटकर नहर बनाने से भी उतनी ही लागत आती, जितनी टनल बनाने में आ रही है। इसलिए विशेषज्ञों की राय पर पहाड़ों के करीब 50 मीटर नीचे टनल बनाई जा रही है, जिससे बारां जिले को सिंचाई का पानी मिलेगा। यह देश की सबसे लम्बी वाटर टनल है।

(Photo: Rajasthan Patrika)

परवन बांध पर 8 मीटर व्यास की 8.7 किमी लम्बी जल परिवहन की भारत की सबसे लम्बी टनल का निर्माण कार्य चल रहा है। परवन सिंचाई सिंचाई परियोजना में 9000 किलोमीटर पाइप लाइन बिछानी है। यह ऐसी पहली परियोजना है। इसमें किसानों को आधुनिक तकनीक से सिंचाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण देने के बाद किसान खुद ही कम्प्यूटाइज तरीके से खेतों में फसलों को पानी देंगे।

तीन जिलों की भूमि होगी सरसब्ज, तकनीक से 70% जल बचेगा

महत्वाकांक्षी परवन वृहद बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना से तीन जिलों की दो लाख एक हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मुहैया होगी। परवन नदी पर अकावद कलां गांव में 7 हजार 355.23 करोड़ रुपए की लागत से योजना मूर्त रूप ले रही है। परवन बांध निर्माण 490 मिलियन घन मीटर क्षमता का बांध है। दो लाख एक हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिचाई सुविधा मिलेगी। बांध से तीन जिले कोटा, बारां, झालावाड़ के कुल 637 गांवों में 2.01 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं 1821 गांव में पेयजल सुविधा मिलेगी। परवन बांध प्रदेश का पहला ऐसा बांध है जिसमें आधुनिक तकनीकी से 70 फीसदी जल बचाया जा सकेगा।

(Photo: Rajasthan Patrika)

पहले था डार्क जोन, अब हरित क्रांति

चंवली बांध निर्माण से पहले क्षेत्र डार्क जोन था और भूजल स्तर पाताल में समा गया था। सिंचाई के जल स्रोत सूख गए थे। इस कारण खेत पड़त रहने लग गए थे, लेकिन बांध के निर्माण के बाद क्षेत्र की दशा और दिशा बदल गई। बांध बनने के बाद क्षेत्र में सिंचाई होने लगी है। इससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन भी बम्पर होने लगा है। बांध निर्माण से पूर्व क्षेत्र में सिंचाई के स्रोत कम थे। सिंचाई कुओं व परम्परागत जल स्रोतों से होती थी, जो अपर्याप्त थी। इस क्षेत्र को डार्क जोन घोषित करने से बैंक किसानों को ऋण नहीं देते थे। चंवली बांध बनने के बाद किसानो की सम्पन्नता बढ़ी है और क्षेत्र से डार्क जोन का दाग हट गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की नदियों को आपस में जोड़ने का सपना देखा था। इस दिशा में कार्य योजनाएं भी तैयार की गई थी। चम्बल, कालीसिंध, पार्वती नदी को आपस में जोड़ने की डीपीआर भी तैयार हुई थी, लेकिन वह साकार नहीं हो पाई। आहू नदी से चैनल बनाकर चंवली को आपस में जोड़ा गया। नदियों को जोड़ने के सपने को झालावाड़ में साकार कर दिया। चैनल बनाकर आहू नदी का पानी चंवली में डालने की योजना बनाई है।

नौनेरा बांध तैयार, दो और बैराज बनेंगे

पार्वती-कालीसिंध-चंबल ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (पीकेसी-ईआरसीपी) का पहला बांध नौनेरा तैयार हो गया है। इसकी नहरों का कार्य जोरों पर चल रहा है। इस परियेाजना में दो और बैराज बनाए जाएंगे। नौनेरा बैराज से नहर के जरिए बीसलपुर और ईसरदा तक पानी पहुंचाया जाएगा। रामगढ़ बैराज, महलपुर बैराज, नौनेरा में नहरी तंत्र और पंपिंग स्टेशन व मेज नदी पर पपिंग स्टेशन बनाया जाएगा। साथ ही 2.6 किलोमीटर लंबी टनल भी तैयार की जाएगी, जो 12 मीटर चौड़ी होगी। इसकी लागत करीब 9600 करोड़ रुपए आंकी गई है।

(Photo: Rajasthan Patrika. Designed: ChatGpt)

17 जिले होंगे लाभान्वित

नौनेरा बांध से प्रदेश के 158 बांध-तालाब और अन्य जल स्रोत तक पानी पहुंचेगा। जल संसाधन विभाग ने 17 जिलों के लिए नए सिरे से तैयार डीपीआर में छोटे-बड़े बांधों के अलावा तालाब व अन्य जल स्रोतों को भी जोड़ा जाएगा।

Updated on:
21 Oct 2026 10:51 am
Published on:
21 Oct 2026 10:51 am