
Solar Pannel : राजस्थान में नई बहुमंजिला इमारतों (मल्टीस्टोरी) की तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आएगी। बिल्डिंग में कारों के लिए पार्किंग तो होगी ही, लेकिन उसी पार्किंग में इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज करने की जगह भी पहले से तय रखनी होगी। छत पर सोलर लगाने की व्यवस्था होगी और इमारत ऐसी बनानी होगी, जिसमें बिजली की खपत कम से कम हो। यानी नई बिल्डिंग सिर्फ ईंट-पत्थर और सीमेंट से खड़ी नहीं होगी, बल्कि ऊर्जा बचाने के इंतजाम भी उसके डिजाइन का हिस्सा होंगे।
राजस्थान में इसी दिशा में राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड के तहत काम करना जरूरी किया जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा 20 प्रतिशत पार्किंग को ईवी चार्जिंग के लिए तैयार रखने और ऊर्जा दक्षता के बेहतर मानक पूरे करने वाली बिल्डिंग को अतिरिक्त निर्माण की छूट देने के प्रावधान की है। यानि, बिल्डिंग जितनी ज्यादा ऊर्जा बचाएगी और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर होगी, बिल्डर को उतना ही फायदा मिलेगा। इसका सीधा फायदा फ्लैटधारकों को भी होगा।
खास यह है कि राजस्थान देश के उन टॉप 5 राज्यों में शामिल है, जहां इमारतों को ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। यह बदलाव सिर्फ नए नियमों की फाइल तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर आने वाले समय में बनने वाले बड़े मॉल, होटल, ऑफिस, अस्पताल और अन्य व्यावसायिक परिसरों में नजर आएगा। यानि, आने वाले समय में बड़े भवनों का नक्शा बनाते समय केवल यह नहीं देखना होगा कि कितनी जगह में कितना निर्माण होगा और कितनी पार्किंग मिलेगी। यह भी बताना होगा कि बिजली कैसे बचेगी, सोलर की व्यवस्था क्या होगी और इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा कहां होगी। सरकार इसका ड्राफ्ट जारी कर चुकी है।
मान लीजिए आप किसी नए मॉल, होटल या ऑफिस में कार लेकर पहुंचे। पार्किंग में कार खड़ी करने की जगह तो आसानी से मिल गई, लेकिन आपकी कार इलेक्ट्रिक है तो उसे चार्ज करने के लिए जगह ढूंढनी पड़ रही है। अब ऐसा नहीं होगा। नई बड़ी व्यावसायिक इमारतों में पार्किंग के साथ ही ईवी चार्जिंग की व्यवस्था भी पहले से करनी होगी। यानि, किसी परिसर में 100 कारों की पार्किंग है तो कम से कम 20 जगह ऐसी होंगी, जहां इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज किए जा सकेंगे। 500 कारों की पार्किंग है तो यह संख्या 100 तक पहुंच जाएगी।
देश में इस पर चर्चा काफी पहले ही शुरू हो चुकी थी। केंद्र सरकार ने 2019 में ही मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में नए भवनों की पार्किंग क्षमता के बीस प्रतिशत हिस्से को ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखने का प्रावधान सुझाया था। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने भवन नियमों में इसे शामिल करने की सलाह दी गई थी।
प्रस्तावित कोड में सिर्फ नियम और पाबंदियां नहीं हैं, बल्कि बिल्डर-डेवलपर्स के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान भी है। जो बिल्डिंग तय ऊर्जा मानकों से बेहतर बनेगी, उसे अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र का लाभ मिल सकेगा। इसे ऐसे समझिए- किसी भूखंड पर सामान्य नियमों के तहत 10 हजार वर्गमीटर निर्माण की अनुमति है। बिल्डिंग तय ग्रीन और ऊर्जा दक्षता मानकों को बेहतर तरीके से पूरा करती है तो 5 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण की स्थिति में 500 वर्गमीटर और 10 प्रतिशत पर 1000 वर्गमीटर तक अतिरिक्त निर्माण की अनुमति मिल सकती है।बिल्डर के लिए इसका सीधा आर्थिक फायदा है। अतिरिक्त निर्माण का मतलब ज्यादा फ्लोर एरिया और उससे अतिरिक्त बिक्री या किराए की संभावना। यानी सरकार का फॉर्मूला साफ है- बिल्डिंग को ज्यादा ग्रीन और ऊर्जा दक्ष बनाइए, बदले में अतिरिक्त निर्माण की सुविधा पाइए।
इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के अनुसार राजस्थान में आईजीबीसी रेटिंग हासिल करने वाली परियोजनाओं को रेटिंग के स्तर के आधार पर अतिरिक्त बीएआर का लाभ मिलता है। सिल्वर रेटिंग पर 5 प्रतिशत, गोल्ड पर 7.5 प्रतिशत और प्लेटिनम रेटिंग पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त बीएआर का प्रावधान है। यानि, प्रोजेक्ट जितनी बेहतर ग्रीन रेटिंग हासिल करेगा, उसे उतने ही अधिक अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र का लाभ मिल सकेगा।
नई व्यवस्था में सिर्फ सोलर पैनल लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भवन की बिजली जरूरत में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। प्रस्तावित व्यवस्था में 4 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्टेड बिजली डिमांड को नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करने या उपलब्ध छत के 50 प्रतिशत हिस्से पर सोलर अथवा अन्य नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली के लिए जगह रखने का विकल्प दिया गया है। बिल्डिंग की डिजाइन तैयार करते समय ही छत, बिजली व्यवस्था और ऊर्जा खपत का हिसाब रखना होगा। बाद में सोलर पैनल लगाने के लिए जगह तलाशने के बजाय इसकी योजना निर्माण के समय ही करनी होगी।
सरकार का जोर केवल इस पर नहीं है कि कितनी बिजली सौर ऊर्जा से आएगी, बल्कि पूरी बिल्डिंग की बिजली जरूरत कम करने पर भी है। इसके लिए दिन में प्राकृतिक रोशनी का ज्यादा इस्तेमाल, गर्मी को अंदर आने से रोकने, एयर कंडीशनिंग पर कम दबाव रखने और ऊर्जा बचाने वाली लाइटिंग व उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर होगा। बिल्डिंग की बिजली व्यवस्था भी ज्यादा कुशल बनानी होगी। भविष्य की बड़ी इमारतों में बिजली बचाने का काम निर्माण के बाद नहीं, बल्कि नक्शा और डिजाइन तैयार करने के साथ ही शुरू होगा।
हर घर या छोटी दुकान पर इसका असर नहीं होगा। इसके दायरे में मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक भवनों के लिए है। 2,000 वर्गमीटर या उससे अधिक बिल्टअप एरिया वाले व्यावसायिक भवन इसके दायरे में आएंगे। इसके अलावा 100 किलोवाट या उससे अधिक कनेक्टेड लोड या 120 केवीए या उससे अधिक कॉन्ट्रैक्ट डिमांड वाले भवन भी इसके दायरे में होंगे। बड़े मॉल, होटल, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, अस्पताल और अन्य व्यावसायिक भवनों का प्लान बनाते समय ऊर्जा बचत, सोलर और ईवी चार्जिंग की व्यवस्था को ध्यान में रखना होगा।
राजस्थान में सालभर अच्छी धूप मिलने से सौर ऊर्जा की बड़ी संभावनाएं हैं। दूसरी ओर शहरों में बहुमंजिला इमारतों और बड़े व्यावसायिक परिसरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि इन इमारतों की छत और पार्किंग को सौर ऊर्जा व ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाए तो दो जरूरतें एक साथ पूरी हो सकती हैं। छत से सौर बिजली पैदा होगी और पार्किंग में इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज हो सकेंगे। साथ ही, भवन की डिजाइन ऐसी होने से बिजली की खपत भी कम होगी। यही वजह है कि प्रस्तावित कोड को केवल सिर्फ नया बिल्डिंग नियम नहीं, बल्कि भविष्य के शहरों की जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी बढ़ रही है। वर्ष 2025 में भारत में करीब 23 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई। नए वाहनों में ईवी की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत रही। पीएम ई-ड्राइव डैशबोर्ड के अनुसार, 16 सितंबर 2026 तक योजना के तहत संबंधित श्रेणियों में 12.61 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ। ऐसे में केवल सड़कों पर चार्जिंग स्टेशन बनाना पर्याप्त नहीं होगा। ऑफिस, मॉल, अस्पताल, होटल और अन्य व्यावसायिक भवनों में भी चार्जिंग सुविधा जरूरी होगी।