Rajasthan Rakhi Market: जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर और कोटा जैसे शहरों में सजी 1 लाख से अधिक राखी स्टॉल्स ने राज्य को व्यापारिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से नई ऊंचाई दी है।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन से पहले राजस्थान का राखी बाजार पूरे शबाब पर है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर और कोटा जैसे शहरों में सजी 1 लाख से अधिक राखी स्टॉल्स ने राज्य को व्यापारिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से नई ऊंचाई दी है। 90 दिनों में 3 लाख लोगों की मेहनत, महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी और डिज़ाइनर राखियों की मांग ने इस सीजन में कारोबार को ₹1500 करोड़ तक पहुंचा दिया है।
जयपुर सबसे बड़ा राखी बाजार बनकर उभरा है, जहां अकेले ₹500 करोड़ का कारोबार हुआ। वैशाली नगर, जौहरी बाजार और बापू बाजार में 50,000 से अधिक दुकानों पर स्टोन, जरदोजी, म्यूजिकल और कार्टून राखियों की बिक्री जोरों पर रही हैं। बाज जोधपुर की करें तो जोधपुर ₹300 करोड़, उदयपुर ₹250 करोड़, बीकानेर ₹200 करोड़ और कोटा ₹150 करोड़, जैसे शहरों में भी स्टॉल्स और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। कुल मिलाकर पांच प्रमुख शहरों में 1 लाख से अधिक दुकानें सजीं। साल 2021 से 2023 तक का कारोबार करीब 6500 करोड़ रहा है। इनमें जयपुर का 1900 करोड़, जोधपुर का 1240 करोड़ और उदयपुर का 985 करोड़ का बिजनेस भी शामिल है। इसके अलावा करीब आठ लाख अस्सी हजार से ज्यादा लोग रोजगार से जुड़े हैं। तमाम आंकड़े कारोबार से जुड़े राजस्थान के व्यापारियों के अनुसार है।
राखी कारोबार से इस वर्ष 2 लाख लोगों को रोजगार मिला, जिनमें 60 फीसदी यानी 1.20 लाख महिलाएं हैं। जयपुर की 50,000 और उदयपुर की 30,000 महिलाएं राखी निर्माण से जुड़ीं। सीकर, चूरू जैसे ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों ने 30,000 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया। वहीं सरकारी योजनाओं ने डिज़िटल मार्केटिंग में मदद पहुंचाई है।
राखी निर्माण के लिए कच्चा माल 50 फीसदी गुजरात के सूरत, तीस फीसदी दिल्ली और बाकि स्थानीय स्तर यानी जयपुर, बीकानेर से आया। सूरत से ₹200 करोड़ का रेशम और स्टोन खरीदा गया है। कच्चे माल की कीमतों में 20 फीसदी वृद्धि से राखियों की कीमतें ₹10 से ₹500 तक रही। इसके बावजूद ग्राहकों में जोश बना रहा है।
ऑनलाइन खरीदारी का हिस्सा 20 फीसदी तक पहुंच गया है, जिससे स्थानीय दुकानदारों को चुनौती मिली है। राइजिंग राजस्थान 2025 में ₹50 करोड़ की सब्सिडी और जयपुर में हस्तशिल्प जोन बनाने का प्रस्ताव है। सरकार से मांग है कि कच्चे माल पर 30 फीसदी छूट दी जाए, जयपुर और उदयपुर में 50 वेंडिंग जोन बनाए जाएं और डिजिटल प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए। रक्षाबंधन वैसे तो एक दिन का त्योंहार है, लेकिन इतनी बड़े स्तर पर कारोबार है कि कई शहरों में कई महीनों पहले तैयारी शुरू हो जाती है। जयपुर शहर भी उनमें से एक है। अब यह त्योंहार सिर्फ भाई.बहन का त्योहार नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक बन गया है। यह लक्ष्मी वर्षा, महिलाओं के आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम की मिसाल है।