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Janmashtami Special: श्रीसांवलिया सेठ का बढ़ रहा खजाना, 60 देशों से आया चढ़ावा, इस्लामिक देशों से भी मिला भरपूर दान

Janmashtami 2026: एशिया-यूरोप-अफ्रीका के साथ मुस्लिम बहुल देशों से भी मंदिर को अपार विदेशी मुद्रा दान के रूप में मिल रहा है। इस वर्ष विदेशी मुद्रा में सबसे ज्यादा 45,351 अमरीकी डॉलर, दूसरे नंबर पर 21,485 यूएई का दिरहम रहा। करेंसी का कुल मूल्य 62,800 अमरीकी डॉलर के करीब रहा। आइए पढ़ते हैं पुष्पेन्द्र सिंह शेखावत की खास रिपोर्ट।
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Sep 04, 2026
Shri Sanwariya Seth
श्री सांवलिया सेठ मंदिर (Photo: Rajasthan Patrika)

Janmashtami 2026 : मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्रीसांवलिया सेठ के मंदिर में देश के साथ विदेशों से भी विदेशी मुद्रा पहुंच रही है। इस वर्ष के आठ महीनों में मंदिर के भंडार में करीब 60 देशों की मुद्राएं मिली हैं। इनमें अमरीका, यूएई, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित एशिया, यूरोप और अफ्रीकी देशों की करेंसी शामिल हैं। विदेशी मुद्रा में इस वर्ष अब तक सबसे ज्यादा 45,351 अमरीकी डॉलर मिले हैं। इसके बाद 21,485 यूएई दिरहम, 1,310.25 कुवैती दिनार, 1,367 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और 1,630 कनाडाई डॉलर प्राप्त हुए हैं।

मंदिर के भंडार में प्राप्त विभिन्न देशों की मुद्राओं को अमरीकी डॉलर में परिवर्तित करने पर इनका कुल मूल्य करीब 62,800 अमरीकी डॉलर आंका गया है। प्रचलित विनिमय दर के आधार पर यह राशि भारतीय मुद्रा में करीब 59 लाख रुपए है।

मुस्लिम बहुल देशों से भी विदेशी मुद्रा

सेठ के भंडार में मुस्लिम बहुल देशों की मुद्राएं भी पहुंच रही हैं। पिछले आठ महीने के आंकड़ों में यूएई से 21,485 दिरहम मिले हैं। इसके अलावा ईरान से 4,68,500 रियाल और इंडोनेशिया से 1,63,000 रुपिया प्राप्त हुए। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और खाड़ी देशों कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन व कतर की मुद्राएं भी भंडार में मिली हैं।

अप्रैल में डॉलर, अगस्त में दिरहम

16 अप्रैल 2026 की गणना में एक बार में 21,127 अमरीकी डॉलर मिले। वहीं 11 अगस्त 2026 की गणना में 8,955 यूएई दिरहम प्राप्त हुए। फरवरी-मार्च की गणनाओं में ईरान के 4,63,500 रियाल और वियतनाम के 2,29,000 डोंग भी मिले।

अधिकृत बैंकों से रुपए में बदली जाती है मुद्रा

मंदिर मंडल विदेशी नोटों को आरबीआई से अधिकृत बैंकों के जरिए भारतीय रुपए में परिवर्तित करवाता है। प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर के भंडारे और सामाजिक-धार्मिक सेवा कार्यों में किया जाता है।

सांवलियाजी मंदिर मंडल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिनेश चंद्र धाकड़ ने पत्रिका से बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिसमें विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। वे अपनी श्रद्धा, मन्नत और व्यापारिक सफलता के रूप में भंडार में विदेशी मुद्रा डालते हैं। मंदिर के भंडार से निकलने वाली विदेशी मुद्राओं को नियमों और पारदर्शिता के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अधिकृत बैंकों के माध्यम से भारतीय रुपए में बदला जाता है।

Updated on:
04 Sept 2026 08:59 am
Published on:
04 Sept 2026 08:59 am