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भोरमदेव अभयारण्य में बाघों के लिए खाली होंगे गांव, प्राकृतिक धरोहर बचाने की कवायद

CG Eco Tourism: भोरमदेव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने की तैयारी तेज है। बाघों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए 6 गांवों के पुनर्वास की योजना बनाई जा रही है।

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Apr 15, 2026
भोरमदेव में विकास और संरक्षण की नई कहानी (photo source- Patrika)

यशवंत झारिया/CG Eco Tourism: छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में एक बड़ा और दूरगामी फैसला आकार ले रहा है। भोरमदेव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस योजना का सबसे अहम हिस्सा है-अभयारण्य के भीतर बसे गांवों का पुनर्वास। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।

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CG Eco Tourism: 352 वर्ग किलोमीटर में फैला जंगल, 26 गांवों की मौजूदगी

भोरमदेव अभयारण्य करीब 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जो जैव विविधता से भरपूर है। इस घने वन क्षेत्र के भीतर 26 गांव बसे हुए हैं, जहां लोग वर्षों से निवास कर रहे हैं। लेकिन अब यही मानव बस्तियां वन्यजीवों, खासकर बाघों के लिए बाधा बनती जा रही हैं। सरकार ने इनमें से 6 गांवों को प्राथमिकता के आधार पर शिफ्ट करने की योजना बनाई है, ताकि जंगल को “कोर एरिया” के रूप में विकसित किया जा सके, जहां बाघों का निर्बाध विचरण संभव हो।

मानव-वन्यजीव संघर्ष: एक बड़ी चुनौती

भोरमदेव क्षेत्र में चीतल, सांभर, गौर जैसे शाकाहारी जीवों के साथ-साथ तेंदुआ और बाघ जैसे खतरनाक शिकारी भी पाए जाते हैं। ऐसे में जब जंगल के बीच मानव बस्तियां मौजूद होती हैं, तो संघर्ष की स्थिति बनना स्वाभाविक है। अक्सर मवेशियों के शिकार, खेतों को नुकसान और कभी-कभी इंसानों पर हमले जैसी घटनाएं सामने आती हैं। यह न सिर्फ वन्यजीवों के लिए खतरा है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन और आजीविका पर भी गंभीर असर डालता है।

पुनर्वास: केवल विस्थापन नहीं, बेहतर भविष्य की ओर कदम

सरकार इस योजना को केवल गांव हटाने के रूप में नहीं, बल्कि “पुनर्वास और पुनर्स्थापन” के रूप में लागू करना चाहती है।

पुनर्वास के तहत:

  • पक्के मकान और सुरक्षित आवास
  • स्वच्छ पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच
  • आजीविका के नए साधन और रोजगार के अवसर

इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को नई जगह पर बेहतर जीवन मिल सके।

टाइगर रिजर्व बनने से क्या बदलेगा?

यदि भोरमदेव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलता है, तो इसका सीधा असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।

  • बाघों और अन्य वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि
  • जैव विविधता का संरक्षण
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान
  • ईको-टूरिज्म को बढ़ावा

टाइगर रिजर्व बनने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए गाइड, होटल, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का संतुलन

यह योजना केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है। ईको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और गांवों के आसपास छोटे-छोटे व्यवसाय विकसित हो सकते हैं।

CG Eco Tourism: चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि यह योजना जितनी महत्वाकांक्षी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।

  • ग्रामीणों का अपने पुश्तैनी घरों से भावनात्मक जुड़ाव
  • पुनर्वास की पारदर्शिता और उचित मुआवजा
  • नई जगह पर सुविधाओं की समय पर उपलब्धता

इन सभी मुद्दों को संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ संभालना सरकार के लिए बेहद जरूरी होगा।

भोरमदेव: एक मॉडल बन सकता है...

अगर यह योजना सफल होती है, तो भोरमदेव अभयारण्य न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे वन्यजीव संरक्षण और मानव विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। यह कहानी सिर्फ जंगल और बाघों की नहीं, बल्कि उन लोगों की भी है, जिनकी जिंदगी इस बदलाव से जुड़ी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल किस तरह जमीन पर उतरती है और क्या वाकई यह “प्राकृतिक धरोहर” को बचाने के साथ-साथ लोगों के जीवन को बेहतर बना पाती है।

Published on:
15 Apr 2026 12:00 pm
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