
अमेरिका ने पर्यटक और कारोबारी वीजा (B-1/B-2) के लिए 50 देशों के नागरिकों पर वीजा बांड की शर्त की संशोधित सूची जारी कर दी है। अमरीकी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह सूची जारी की, जिसमें शामिल देशों के नागरिकों को 10, 15 या 20 हजार डॉलर का बांड जमा करना होगा। भारत इस सूची से बाहर है, जबकि बांग्लादेश, भूटान और नेपाल जैसे पड़ोसी देश इसके दायरे में हैं।
बांड की सटीक राशि वीजा साक्षात्कार के दौरान कांसुलर अधिकारी तय करेगा। यह शर्त उन्हीं आवेदकों पर लागू होती है जो अन्यथा वीजा के पात्र हैं। उन्हें गृह सुरक्षा विभाग (DHS) का फॉर्म I-352 भरना और अमरीकी ट्रेजरी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पे.गव के जरिए बांड की शर्तें स्वीकार करनी होती हैं। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि बांड जमा करने का मतलब वीजा मिलने की गारंटी नहीं है। बांड को आवेदक खुद या कोई तीसरा व्यक्ति, जैसे दोस्त, रिश्तेदार या कारोबारी सहयोगी, जमा कर सकता है। शर्तें पूरी होने पर रकम उसी को लौटाई जाती है, जिसने जमा की थी।
बांड जमा करने वाले यात्रियों को अमरीका में प्रवेश और वहां से प्रस्थान के लिए तय रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। यानी उन्हें व्यावसायिक हवाई अड्डों से ही आना-जाना होगा, जिनमें सीबीपी (कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन) के प्रीक्लियरेंस केंद्र भी शामिल हैं।
अमेरिका द्वारा पर्यटक और कारोबारी वीजा पर लागू किए गए नियम तुरंत लागू नहीं हुए हैं। इसकी शुरुआत अगस्त 2025 में एक साल के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी, जिसमें 15 हजार डॉलर तक के बांड का प्रावधान था। विदेश मंत्रालय ने 3 अगस्त 2026 को अंतिम नियम (फाइनल रूल) प्रकाशित कर इसे स्थायी कर दिया, जो तुरंत प्रभावी हुआ।
बर्री एपलमैन एंड लीडेन (BAL) के विश्लेषण के मुताबिक, पायलट के दौरान जिन देशों पर यह शर्त थी। वे स्थायी कार्यक्रम में भी शामिल रहेंगे और बांड की राशि पायलट से ज्यादा रखी गई है। बोस्टन यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एंड स्कॉलर्स ऑफिस के मुताबिक मार्च 2026 में पायलट में 12 और देश जुड़े थे और तब बांड $5 हजार, $10 हजार या $15 हजार का था। यानी अब हर स्तर पर राशि बढ़ चुकी है।
विदेश मंत्रालय की सूची के अनुसार, नेपाल और बांग्लादेश पर यह शर्त 21 जनवरी से लागू है, जबकि भूटान को 1 जनवरी से जोड़ा गया था। सूची में अफ्रीका, कैरेबियाई देश, मध्य एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देश शामिल हैं। वीजा वेवर कार्यक्रम वाले देश इस दायरे से बाहर हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, देशों का चयन डीएचएस की ‘एंट्री/एग्जिट ओवरस्टे रिपोर्ट’ में बी-1/बी-2 वीजा पर तय अवधि से ज्यादा रुकने की दर के आधार पर किया गया है। सूचना साझा करने की व्यवस्था, पहचान सत्यापन और जांच-पड़ताल की क्षमता भी पैमाने हैं। मकसद विदेशी नागरिकों के ओवरस्टे पर अंकुश लगाना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशी सरकारों को ओवरस्टे घटाने, सूचना साझा करने और पहचान सत्यापन को मजबूत करने के लिए प्रेरित करना भी था।
बांड सिर्फ ओवरस्टे पर नहीं, अन्य उल्लंघनों पर भी जब्त हो सकता है। नियम के तहत ओवरस्टे करने, या अमरीका में रहते हुए शरण या अन्य मानवीय संरक्षण की मांग करने पर बांड जब्त किया जा सकता है। संभावित उल्लंघनों को नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के पास भेजा जा सकता है, जो तय करती है कि बांड का उल्लंघन हुआ या नहीं। वकीलों के विश्लेषण के अनुसार नियम में बांड की शर्त से छूट मांगने की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है।
एक कानूनी विश्लेषण के मुताबिक, विदेश मंत्रालय का दावा है कि जुलाई 2026 तक प्रभावित देशों में वीजा जारी होने की संख्या पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 83 प्रतिशत घट गई और इसे बांड की सफलता का सबूत बताते हुए राशि बढ़ाई गई। यह आंकड़ा केवल एक स्रोत में मिला है। इसलिए इसे विदेश मंत्रालय के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भारतीय पासपोर्ट धारकों पर यह बांड नहीं लगेगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बी-1/बी-2 वीजा के सामान्य आवेदन और पात्रता नियम खत्म हो गए हैं। यह सूची बदली जा सकती है, क्योंकि विदेश मंत्रालय देशों को रोलिंग आधार पर जोड़ या हटा सकता है। इसलिए यात्रा से पहले ताजा सूची देख लेना बेहतर है। यह कार्यक्रम अगस्त 2025 से चल रहा है और 3 अगस्त 2026 को स्थायी हुआ।