
सांकेतिक इमेज (सोर्स-chatgpt)
आजकल खुद को फिट और स्वस्थ रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। सुबह उठकर योग करना न सिर्फ शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है, बल्कि मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक माना जाता है। अक्सर लोग योगाभ्यास पूरा होते ही अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लग जाते हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय ने योग के बाद शरीर को आराम देने और नहाने व भोजन के बीच उचित अंतर रखने की सलाह दी है।
आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करके बताया कि योगाभ्यास के बाद शरीर को आराम करने और सामान्य स्थिति में लौटने का समय देना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, योग करने के बाद नहाने या भोजन करने से पहले 20 से 30 मिनट का इंतजार करना बेहतर है। इस दौरान व्यक्ति को कुछ समय शांत रहना चाहिए और शरीर को सहज होने देना चाहिए।
ऐसा करने से योगाभ्यास के बाद दिनचर्या में लौटने के लिए एक अच्छा अंतराल मिल जाता है। यह सलाह आयुष मंत्रालय के कॉमन योगा प्रोटोकॉल (Common Yoga Protocol) पर आधारित है, जो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए तैयार किया गया है और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा संपादित है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के योग गाइडलाइन्स में भी कम से कम 30 मिनट तक स्नान, पानी या भोजन से बचने की सलाह दी गई है। दरअसल, योग के दौरान शरीर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और सांस लेने की गति में भी बदलाव आता है। ऐसे में अभ्यास पूरा होने के बाद कुछ समय आराम करना उपयोगी माना जाता है। योग के बाद जल्दबाजी करने के बजाय शांत बैठना, सामान्य तरीके से सांस लेना और शरीर को सहज होने देना चाहिए।
कई योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतराल से शरीर का तापमान सामान्य होता है, तंत्रिका तंत्र आराम पाता है और योग के लाभ पूरी तरह मिलते हैं।आयुष मंत्रालय ने योगाभ्यास के लिए खानपान से जुड़ी कुछ जरूरी बातें भी साझा की हैं। मंत्रालय के मुताबिक, संतुलित और पौष्टिक भोजन शरीर और मन को योग के लिए तैयार रखने में मदद करता है। आमतौर पर योगाभ्यास करने वालों के लिए शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा 30 वर्ष से अधिक उम्र के स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में दो बार भोजन पर्याप्त हो सकता है। हालांकि, बीमारी, अधिक शारीरिक गतिविधि या मेहनत वाला काम करने वाले लोगों की जरूरतें अलग हो सकती हैं। प्रोटोकॉल में कहा गया है कि योग खाली पेट या हल्के पेट पर करना चाहिए। अगर कमजोरी महसूस हो तो गुनगुने पानी में थोड़ा शहद ले सकते हैं।
योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी योग को स्वस्थ बुढ़ापे, तनाव कम करने, लचीलापन बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया है। WHO के अनुसार, योग गैर-संचारी रोगों (जैसे हृदय रोग, मधुमेह, सांस संबंधी समस्याएं) की रोकथाम और प्रबंधन में मदद कर सकता है। अमेरिकी नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ (NCCIH) के शोधों में योग को तनाव, चिंता, अवसाद के लक्षण, गर्दन-पीठ दर्द, वजन नियंत्रण और मेनोपॉज संबंधी समस्याओं में सहायक पाया गया है।
विभिन्न शोधों में योग को शारीरिक फिटनेस, मांसपेशियों और हड्डियों के बेहतर कामकाज तथा हृदय संबंधी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी पाया गया है। नियमित योगाभ्यास डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, सांस संबंधी समस्याओं और जीवनशैली से जुड़ी परेशानियों के प्रबंधन में भी मदद कर सकता है। इसके अलावा योग तनाव, चिंता, थकान और अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। महिलाओं में मासिक धर्म और मेनोपॉज से जुड़ी कुछ परेशानियों के प्रबंधन में भी योग लाभकारी माना जाता है।योग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अभ्यास शांत वातावरण में, आरामदायक सूती कपड़ों में और अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे किया जाए।
सत्र की शुरुआत प्रार्थना या इनवोकेशन से और अंत ध्यान या शांति पाठ से करना चाहिए। गर्भावस्था, मासिक धर्म या किसी गंभीर बीमारी में चिकित्सक या योग थेरेपिस्ट से परामर्श जरूरी है। कुल मिलाकर, आयुष मंत्रालय की यह सलाह योग के लाभों को अधिकतम करने और किसी भी असुविधा से बचने के लिए महत्वपूर्ण है। नियमित योगाभ्यास के साथ सही अंतराल और संतुलित आहार अपनाकर व्यक्ति शरीर व मन दोनों को स्वस्थ रख सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में सिर्फ 20-30 मिनट का नियमित योग भी लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकता है।
Updated on:
04 Oct 2026 05:40 pm
Published on:
04 Oct 2026 05:40 pm
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