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एनर्जी बूस्टर: बच्चों में 67% तक खून की कमी; जानें कारण, लक्षण और हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाली सही डाइट

क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे की ऊर्जा और मानसिक विकास का राज उनकी थाली में छिपा है? जानिए कैसे कुछ आसान सुपरफूड्स एनीमिया को मात देकर आपके बच्चे को स्वस्थ और सक्रिय बना सकते हैं।
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Aug 27, 2026
Blood
खून बढ़ाने वाले 5 सुपरफूड्स (AI)

बचपन ऊर्जा, खेल-कूद और तेजी से सीखने का दौर होता है। इस उम्र में यदि बच्चा बार-बार थका हुआ महसूस करे, चिड़चिड़ा रहे या पढ़ाई में ध्यान न लगा पाए, तो इसका एक मुख्य कारण शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया (Anemia) हो सकता है। भारत में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, 6 से 59 महीने की उम्र के लगभग 67.1% बच्चे एनीमिया से प्रभावित हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि बच्चों की थाली में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।

एनीमिया क्या है और बच्चों पर इसका असर

एनीमिया वह स्थिति है जिसमें रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के सभी अंगों और मस्तिष्क तक पहुंचाता है। जब शरीर को पर्याप्त आयरन, विटामिन B12 या फोलेट नहीं मिलता, तब हीमोग्लोबिन का निर्माण धीमा हो जाता है।

बच्चों में एनीमिया के प्रमुख प्रभाव:

  • शारीरिक विकास में रुकावट: मांसपेशियों का कमजोर होना और कद या वजन सही गति से न बढ़ना।
  • संज्ञानात्मक (Cognitive) विकास पर असर: सीखने की क्षमता, याददाश्त और एकाग्रता में कमी।
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता: बार-बार सर्दी, खांसी या अन्य संक्रमणों की चपेट में आना।
  • सुस्ती और सांस फूलना: थोड़ा सा खेलने पर ही अत्यधिक थकान महसूस होना।

बच्चों की थाली के लिए 6 शक्तिशाली सुपरफूड्स

बच्चों के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए आहार में आयरन, विटामिन C और फोलेट से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना सबसे सुरक्षित और टिकाऊ उपाय है।

1.रागी (Finger Millet)

  • पारंपरिक भारतीय अनाजों में रागी आयरन और कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है। प्रति 100 ग्राम रागी में लगभग 3.9 मिलीग्राम आयरन होता है।
  • कैसे खिलाएं: रागी का चीला, डोसा, स्वादिष्ट हलवा या दूध/पानी के साथ दलिया बनाकर दिया जा सकता है।2. दालें और फलियां (राजमा, मसूर, चना)
  • दालें शाकाहारी बच्चों के लिए प्रोटीन और नॉन-हीम आयरन का प्रमुख आधार हैं। मसूर दाल और राजमा में प्रति 100 ग्राम लगभग 3 से 3.5 मिलीग्राम आयरन पाया जाता है।
  • कैसे खिलाएं: दाल-चावल, अंकुरित मूंग की चाट, या उबले हुए राजमा को मैश करके पराठे के भरावन में इस्तेमाल करें।


3. हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, सहजन/ड्रमस्टिक)





  • हरी पत्तेदार सब्जियों में आयरन के साथ-साथ फोलेट भी भरपूर मात्रा में होता है, जो नई लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए अनिवार्य है। विशेष रूप से सहजन की पत्तियां (Moringa) आयरन का पावरहाउस मानी जाती हैं।
  • कैसे खिलाएं: पालक-पनीर, मेथी पराठा, सूप या दाल में बारीक कटी पत्तियां मिलाकर पकाएं।


  1. गुड़ (Jaggery) और सूखे मेवे (खजूर, मुनक्का, अंजीर)
  • सफेद चीनी की जगह ऑर्गेनिक गुड़ का उपयोग आयरन की मात्रा बढ़ाने का आसान तरीका है। खजूर और रात भर भीगे हुए मुनक्के बच्चों के हीमोग्लोबिन स्तर को तेजी से सुधारते हैं।
  • कैसे खिलाएं: शाम के स्नैक के रूप में 2-3 भीगे मुनक्के, खजूर के लड्डू, या तिल-गुड़ की चिक्की दें।
  1. अंडा और चिकन (मांसाहारी विकल्प)
  • यदि परिवार मांसाहारी भोजन पसंद करता है, तो अंडा (विशेषकर जर्दी/Yolk) और चिकन हीम-आयरन (Heme Iron) के श्रेष्ठ स्रोत हैं। हीम-आयरन को शरीर बहुत तेजी से और आसानी से सोखता है।

कैसे खिलाएं: उबला अंडा, आमलेट, या हल्का पका हुआ चिकन सूप।

  1. विटामिन C से भरपूर फल (आंवला, संतरा, अमरूद, नींबू)

पौधों से मिलने वाले आयरन (Non-Heme Iron) को शरीर तब तक पूरी तरह अवशोषित नहीं कर पाता, जब तक उसे विटामिन C का साथ न मिले। विटामिन C आयरन के अवशोषण को 2 से 3 गुना तक बढ़ा देता है।

कैसे खिलाएं: भोजन के तुरंत बाद संतरा, अमरूद या कीवी दें; दाल और सब्जियों में ऊपर से ताजा नींबू का रस निचोड़ें।

सुपरफूड्स और उपयोग गाइड

सुपरफूडप्रमुख पोषक तत्वपरोसने का सबसे आसान तरीका
रागीआयरन, कैल्शियम, फाइबरदलिया, डोसा, पैनकेक, रागी लड्डू
राजमा व मसूर दालआयरन, फोलेट, प्रोटीनगाढ़ी दाल, अंकुरित चाट, दाल पराठा
पालक व सहजनआयरन, विटामिन A, फोलेटसूप, प्यूरी, दाल या पराठे में मिलाकर
गुड़ व खजूरआयरन, प्राकृतिक ऊर्जास्नैक के रूप में, खजूर शेक, तिल-गुड़
अंडाहीम-आयरन, विटामिन B12नाश्ते में उबला अंडा या आमलेट
आंवला व अमरूदविटामिन C (अवशोषण वर्धक)ताजे फल, आंवला कैंडी, नींबू का रस

पोषण के सुनहरे नियम: क्या करें और किन गलतियों से बचें

सिर्फ आयरन युक्त भोजन देना ही पर्याप्त नहीं है, उसका शरीर में सही तरीके से लगना भी उतना ही आवश्यक है।

  • दूध और भोजन का सही समय: दूध और पनीर में मौजूद कैल्शियम आयरन के अवशोषण में बाधा डालता है। इसलिए आयरन युक्त मुख्य भोजन (लंच या डिनर) और दूध पीने के समय में कम से कम 1.5 से 2 घंटे का अंतर रखें।
  • चाय/कैफीन से दूरी: बच्चों को चाय या कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रखें, क्योंकि इनमें मौजूद टैनिन और फाइटेट्स आयरन को शरीर में सोखने से रोकते हैं।
  • लोहे के बर्तनों का उपयोग: दाल, साग या सूखी सब्जियां पकाने के लिए पारंपरिक लोहे की कड़ाही का उपयोग करें। इससे भोजन में प्राकृतिक आयरन की मात्रा बढ़ जाती है।
  • पेट के कीड़ों की रोकथाम (डीवॉर्मिंग): पेट में कीड़े (Worms) बच्चों के पोषण को चूस लेते हैं। सरकारी स्वास्थ्य निर्देशों के अनुसार डॉक्टर की सलाह से हर 6 महीने में बच्चे को एल्बेंडाजोल (Albendazole) की खुराक जरूर दें।

डॉक्टर से परामर्श कब लें?

  • यदि स्वस्थ खान-पान के बावजूद बच्चे के नाखून, जीभ या आंखों की निचली परत सफेद/पीली दिखे, बच्चा लगातार मिट्टी या चॉक खाने की जिद करे (Pica विकार), या उसकी भूख बिल्कुल खत्म हो जाए, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से संपर्क करें।
  • गंभीर एनीमिया के मामलों में केवल भोजन पर्याप्त नहीं होता; वहां डॉक्टर की देखरेख में आयरन सप्लीमेंट्स (सिरप या ड्रॉप्स) की आवश्यकता होती है।
  • बच्चों को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए किसी महंगे सप्लीमेंट के बजाय स्थानीय, मौसमी और पारंपरिक खाद्य पदार्थों का संतुलित मेल ही सबसे असरदार समाधान है।
Updated on:
27 Aug 2026 01:56 pm
Published on:
27 Aug 2026 01:56 pm