
Gourd farming Scaffolding method high profit farming tips
Gourd farming Scaffolding method: गोल लौकी की खेती में अब किसान कम लागत में बेहतर मुनाफा देख रहे हैं। विशेष रूप से मचान (ट्रेलिस) विधि अपनाकर खेती करने से फसल साफ, रोगमुक्त और बाजार में आकर्षक बनती है। इस लेख में हम देखेंगे कि गोल लौकी की खेती कैसे की जाए, इसमें लागत और लाभ कैसा है, और किसान इसे अपनाकर क्या-क्या फायदे प्राप्त कर सकते हैं।
गोल लौकी गर्म मौसम की सब्जी है। इसके लिए ऐसी मिट्टी उपयुक्त होती है जिसमें पानी जमा न हो, जैसे दोमट या बलुई-दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकासी अच्छी हो। खेत की अच्छी जुताई करके उसमें सड़ी हुई गोबर या जैविक खाद मिलाकर तैयारी करनी चाहिए। बीज की गुणवत्ता पर ध्यान दें और क्षेत्र की जलवायु के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करें।
मचान विधि में लौकी की बेल को जमीन पर फैलाने के बजाय ऊपर ट्रेलिस या मचान पर चढ़ाया जाता है। इससे फल जमीन से दूर रहते हैं, साफ रहते हैं और सड़न या कीट से बचे रहते हैं। इससे प्रकाश और हवा का बेहतर संचार होता है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और पैदावार बढ़ती है। खेत में नीचे जगह खाली रहने से सिंचाई, निराई-गुड़ाई और तुड़ाई जैसे कार्य आसान हो जाते हैं।
हालिया रिपोर्टों में दो किसान, उपेंद्र साहू (गोंडा) और रामहित कुशवाहा (मध्य प्रदेश, सीधी) ने लगभग दो बीघा में गोल लौकी की खेती मचान विधि से की। दोनों ने बताया कि लागत लगभग 10,000-12,000 रही और तीन से चार महीने के उत्पादन में आमदनी 1 लाख से 1.2 लाख तक होने की उम्मीद है। यह दर्शाता है कि लागत कम और लाभ अधिक हो सकता है।
हरदोई (उत्तर प्रदेश) के किसान रणजीत सिंह ने बताया कि एक एकड़ में लगभग 20,000 खर्च कर 100-150 क्विंटल लौकी का उत्पादन हुआ। मौजूदा बाजार भाव के अनुसार (लगभग 3,000 प्रति क्विंटल), इससे 3-5 लाख तक की आमदनी संभव है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि यदि बाजार भाव अनुकूल हो, तो मचान विधि से खेती अत्यंत लाभकारी हो सकती है।
गोल लौकी का आकार गोल और मोटा होता है, स्वाद में हल्का मीठापन होता है, और यह लंबे समय तक ताजा रहती है। लंबी लौकी की तुलना में यह सड़न और कीट रोगों से कम प्रभावित होती है, जिससे नुकसान का जोखिम कम होता है। त्योहारों या शादी समारोहों में इसकी मांग बढ़ जाती है, जिससे बाजार में बेहतर भाव मिल सकता है।
कृषक जगत की रिपोर्ट के अनुसार, गोल लौकी की उन्नत किस्मों में पूसा मंजरी, पूसा संदेश और हिसार सिलेक्शन गोल शामिल हैं। जैविक खेती में इन किस्मों के साथ जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग करने से गुणवत्ता बेहतर होती है और लागत घटती है।
मचान विधि से खेती करने पर फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है, सड़न कम होती है और तुड़ाई के बाद नुकसान भी कम होता है। इसके अलावा, यदि कोई किसान मचान बनाना सीख ले, तो वह दूसरों के खेतों में मचान बनाकर अतिरिक्त आय भी कमा सकता है।
हालांकि मचान विधि कई लाभ देती है, लेकिन लागत और मेहनत की तुलना में लाभ तभी होता है, जब बाजार भाव अनुकूल हो। मंडी भाव तेजी से बदलते हैं, इसलिए ताजा भाव जानने के लिए नजदीकी मंडी या eNAM पोर्टल देखें। साथ ही, बीज, खाद और सिंचाई पर खर्च बढ़ सकता है, इसलिए खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।
यदि आप गोल लौकी की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले खेत की मिट्टी और जल निकासी की जांच करें। फिर मचान बनाने की व्यवस्था करें। बांस या तार से मजबूत ट्रेलिस तैयार करें। जैविक खाद और संतुलित रासायनिक खाद का उपयोग करें। उपयुक्त गोल किस्म चुनें जैसे पूसा संदेश या पूसा मंजरी। सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कीट-रोग नियंत्रण पर ध्यान दें। और सबसे जरूरी बाजार भाव की जानकारी रखें और तुड़ाई के समय सही समय पर बेचें।
गोल लौकी की खेती, विशेषकर मचान विधि से, युवा और सक्रिय किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, बेहतर गुणवत्ता और बाजार में अलग पहचान के कारण यह खेती लाभदायक हो सकती है। यदि आप इसे अपनाते हैं, तो सही तैयारी और देखभाल से यह आपके खेत और परिवार की किस्मत बदल सकती है।
Updated on:
27 Aug 2026 05:34 pm
Published on:
27 Aug 2026 05:34 pm
