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Independence Day: 21 तोपों की सलामी से भारतीय सेना की ताकत तक, जानें ATAGS की पूरी कहानी व इसकी खासियतें

ATAGS In Indian Army: भारत की स्वदेशी 155 मिमी/52 कैलिबर ATAGS तोप भारतीय सेना के आर्टिलरी आधुनिकीकरण में अहम भूमिका निभाने जा रही है। DRDO के डिजाइन पर विकसित इस तोप के लिए 307 यूनिट का करीब ₹6,900 करोड़ का अनुबंध किया जा चुका है। जानिए इसकी रेंज, तकनीक और सेना के लिए इसका महत्व।
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Aug 13, 2026
Advanced Towed Artillery Gun System
ATAGS भारत की स्वदेशी तोप है, जो आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय सेना की आर्टिलरी ताकत को नई धार देती है। ( फोटो: AI)

भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में ATAGS (Advanced Towed Artillery Gun System) एक अहम स्वदेशी उपलब्धि है। यह 155 मिमी/52 कैलिबर की आधुनिक टोव्ड आर्टिलरी गन है, जिसे DRDO की पुणे स्थित Armament Research and Development Establishment (ARDE) ने विकसित किया है। इसके विकास और उत्पादन में भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ध्यान रहे कि हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण के बाद 21 तोपों की सलामी दी जाती है। यह फायरिंग निश्चित अंतराल पर क्रमवार की जाती है, जिसे औपचारिक सैन्य सम्मान माना जाता है। यह सलामी राष्ट्र, तिरंगे और सर्वोच्च संवैधानिक सम्मान के प्रति भारतीय सशस्त्र बलों की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है।

ATAGS क्या है?

ATAGS एक 155 मिमी/52 कैलिबर की टोव्ड हॉवित्जर तोप प्रणाली है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना की पुरानी और छोटी कैलिबर वाली तोपों की जगह अधिक आधुनिक, लंबी दूरी और बेहतर स्वचालन वाली आर्टिलरी प्रणाली उपलब्ध कराना है। PIB के अनुसार ATAGS में उन्नत फायर-कंट्रोल, सटीक लक्ष्य निर्धारण, ऑटोमेटेड लोडिंग और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मारक क्षमता 40 किलोमीटर से अधिक बताई गई है, जबकि परीक्षणों में विशिष्ट गोला-बारूद के साथ करीब 48 किलोमीटर तक की रेंज दर्ज की गई है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है?

ATAGS की खासियत सिर्फ इसकी लंबी रेंज नहीं है। इसमें All-Electric Drive जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। Tata Advanced Systems के अनुसार यह पारंपरिक हाइड्रोलिक ड्राइव की तुलना में लंबे समय तक फील्ड संचालन में विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित की गई है।

इसमें ऑटोमेटिक एम्युनिशन हैंडलिंग सिस्टम, ऑटो-लेइंग और लक्ष्य निर्धारण से जुड़ी आधुनिक प्रणालियां भी शामिल हैं। ATAGS Bi-Modular Charge System (BMCS) के Zone-7 तक फायर करने की क्षमता के लिए भी जानी जाती है।

48 किलोमीटर की रेंज क्यों अहम है?

तोपखाने की लड़ाई में लंबी दूरी का मतलब है कि अपनी स्थिति को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखते हुए दूर स्थित लक्ष्य पर प्रहार करने की क्षमता। ATAGS ने परीक्षणों के दौरान 155 मिमी/52 कैलिबर श्रेणी में करीब 48 किलोमीटर तक की फायरिंग क्षमता प्रदर्शित की है। हालांकि, वास्तविक रेंज इस्तेमाल किए जाने वाले गोला-बारूद और परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

21-गन सलामी में भी दिखी ताकत

ATAGS को 15 अगस्त 2022 को लाल किले पर आयोजित औपचारिक 21-गन सलामी में शामिल किया गया था। यह पहली बार था जब स्वदेशी रूप से विकसित इस तरह की तोप ने इस राष्ट्रीय समारोह में हिस्सा लिया।

307 तोपों का बड़ा ऑर्डर

ATAGS के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव मार्च 2023 में आया, जब रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय सेना के लिए 307 ATAGS की खरीद के प्रस्ताव को Acceptance of Necessity (AoN) प्रदान की। इसके बाद मार्च 2025 में रक्षा मंत्रालय ने करीब ₹6,900 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए।

इन अनुबंधों में 307 ATAGS के साथ 327 High Mobility 6×6 Gun Towing Vehicles भी शामिल हैं। PIB के अनुसार यह खरीद भारतीय सेना की 15 आर्टिलरी रेजिमेंट को लैस करने के लिए है।


दुश्मन को नेस्तनाबूद करने में सक्षम भारत की स्वदेशी तोप ATAGS. (फोटो डिजाइन:पत्रिका)

कठिन इलाकों में भी उपयोगी

ATAGS को अलग-अलग भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में परीक्षणों से गुजारा गया है। इसके डिजाइन में ऊंचाई वाले और कठिन इलाकों में संचालन को ध्यान में रखा गया है। यही वजह है कि यह भारतीय सेना के आर्टिलरी आधुनिकीकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण प्रणाली मानी जाती है।

अब आगे क्या होगा?

मार्च 2025 के अनुबंध के बाद अब मुख्य चुनौती बड़े पैमाने पर उत्पादन और निर्धारित समयसीमा में सेना को आपूर्ति की है। ATAGS के अलावा इसी तकनीकी आधार पर DRDO ने Mounted Gun System (MGS) भी विकसित किया है, जिसमें 155 मिमी/52 कैलिबर गन को 8×8 पहिएदार वाहन पर लगाया गया है। इसका उद्देश्य अधिक तेजी से तैनाती और स्थान बदलने की क्षमता हासिल करना है।

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए क्यों अहम ?

ATAGS सिर्फ एक तोप प्रणाली नहीं, बल्कि भारत के स्वदेशी रक्षा अनुसंधान और उत्पादन मॉडल की बड़ी मिसाल है। DRDO के डिजाइन, भारतीय उद्योग की निर्माण क्षमता और सेना की जरूरतों के बीच तालमेल से तैयार यह प्रणाली देश की आर्टिलरी क्षमता को आधुनिक बनाने में योगदान दे सकती है।

स्वदेशी आर्टिलरी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

307 ATAGS की खरीद से भारतीय सेना की 15 आर्टिलरी रेजिमेंट को आधुनिक 155 मिमी/52 कैलिबर तोपें मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इससे पुरानी प्रणालियों के स्थान पर अधिक आधुनिक और स्वदेशी आर्टिलरी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

भारतीय सेना के आर्टिलरी आधुनिकीकरण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण प्रणालियों में शामिल

बहरहाल ATAGS भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, आधुनिक तकनीक और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी का अहम उदाहरण है। इसकी लंबी दूरी, स्वचालन और आधुनिक फायर-कंट्रोल क्षमताएं इसे भारतीय सेना के आर्टिलरी आधुनिकीकरण कार्यक्रम की महत्वपूर्ण प्रणालियों में शामिल करती हैं।

Updated on:
13 Aug 2026 12:44 pm
Published on:
13 Aug 2026 11:52 am