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दाल-तिलहन के लिए बड़ी राहत: UP, कर्नाटक और तेलंगाना में MSP पर 5,500 करोड़ से अधिक की खरीद मंजूर, किसानों को मिलेगा फायदा

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। MSP में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के लिए 675 रुपए प्रति क्विंटल की गई है।
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भारत

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Vinay Shakya

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Sep 30, 2026

Pulses and oilseeds MSP

सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत MSP पर 5,547.99 करोड़ रुपए की खरीद को मंजूरी दी।

किसानों को राहत पहुंचाने का प्रयास

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य बाजार कीमतों में गिरावट से किसानों को बचाना और उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है। खासतौर पर दाल और तिलहन उत्पादकों को इससे लाभ मिलेगा। मंजूर की गई खरीद में सबसे बड़ा 3,992.57 करोड़ रुपए का हिस्सा उत्तर प्रदेश का है। इसके तहत 4,66,000 मीट्रिक टन तुअर की 3,937.70 करोड़ रुपए में और 6,250 मीट्रिक टन मूंग की 54.87 करोड़ रुपए में एमएसपी पर खरीद की जाएगी।

कर्नाटक में दाल और तिलहन किसानों के लिए पीएसएस के तहत 1,107 करोड़ रुपए की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसमें 659.27 करोड़ रुपए से 1,15,500 मीट्रिक टन सोयाबीन की खरीद की जाएगी, जबकि 38,250 मीट्रिक टन मूंग 335.83 करोड़ रुपए में और 13,413 मीट्रिक टन सूरजमुखी 111.90 करोड़ रुपए में खरीदी जाएगी।

तेलंगाना में 448.42 करोड़ रुपए की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसमें मूल्य समर्थन योजना के तहत एमएसपी पर 62,000 मीट्रिक टन सोयाबीन की 353.90 करोड़ रुपए में और 10,766 मीट्रिक टन मूंग की 94.52 करोड़ रुपए में खरीद की जाएगी।

किसानों को मिलेगी आर्थिक सुरक्षा

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि इस फैसले से किसानों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, यह दालों और तिलहनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा, साथ ही दालों और खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों में योगदान देगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी निर्धारित खरीद केंद्रों पर खरीद की व्यवस्था पारदर्शी रहेगी और किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा- सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिले और खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं सुलभ बनाया जाए। मंजूर की गई खरीद योजना के तहत तीनों राज्यों के किसानों को प्रमुख दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर एमएसपी पर खरीद का लाभ मिलेगा।

किसानों की आय बढ़ेगी

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। MSP में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के लिए 675 रुपए प्रति क्विंटल की गई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों के MSP में 413 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, मसूर की एमएसपी में 390 रुपए प्रति क्विंटल, जौ में 136 रुपए प्रति क्विंटल, चने में 83 रुपए प्रति क्विंटल और गेहूं में 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की है।

किसानों को बढ़ावा देने की पहल

हाल के वर्षों में सरकार अनाज के अलावा दालों और तिलहनों जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए इन फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी की पेशकश की जा रही है। वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 LMT थी।

  • वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह रबी फसलों की खरीद बढ़कर 3,921 एलएमटी हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,302 एलएमटी थी।
  • वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में किया गया भुगतान बढ़कर 7.31 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2.56 लाख करोड़ रुपए था।
  • इसके अलावा, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह रबी फसलों के उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में किया गया भुगतान बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2.65 लाख करोड़ रुपए था।

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