
कभी-कभी हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न देना आसान होता है, खासकर तब जब लक्षण धीरे-धीरे शुरू हों या आते-जाते रहें। नए या असामान्य लक्षणों को गंभीरता से लेना और जल्द मदद लेना जरूरी हो सकता है। आमतौर पर लोग अक्सर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट शब्दों का इस्तेमाल एक-दूसरे की जगह पर करते हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग हैं।
ज्यादातर हार्ट अटैक से कार्डियक अरेस्ट नहीं होता है। लेकिन जब कार्डियक अरेस्ट होता है, तो हार्ट अटैक इसका एक आम कारण होता है। दूसरी समस्याओं की वजह से भी दिल धड़कना बंद कर सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है।
ऐसा आमतौर पर किसी इलेक्ट्रिकल समस्या के कारण होता है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। जब दिल पंप करना बंद कर देता है, तो वह दिमाग, फेफड़ों और शरीर के अन्य जरूरी अंगों तक खून नहीं पहुंचा पाता। कार्डियक अरेस्ट होने पर व्यक्ति कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है। मरीज की सांस रुक जाए या वे सिर्फ हांफने लगें, तो ऐसी स्थिति में अगर उन्हें तुरंत मदद न मिले, तो उनकी मौत हो सकती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने बताया कि अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट हो जाए, तो तुरंत सीपीआर देने से उनके बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो सकती है। सबसे पहले, स्थानीय इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। फिर सीपीआर शुरू करें। अगर आस-पास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) है, तो जितनी जल्दी हो सके उसका इस्तेमाल करें।
अगर दो लोग मदद कर रहे हैं, तो एक को सीपीआर शुरू करना चाहिए। दूसरे को इमरजेंसी कॉल करना चाहिए और एईडी ढूंढना चाहिए। हर मिनट कीमती है। बिना मदद के हर मिनट बचने की संभावना 10 फीसदी कम हो जाती है। इमरजेंसी स्टाफ़ भी ऐसे व्यक्ति को बचाने में मदद कर सकता है जिसका दिल धड़कना बंद हो गया हो।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, हार्ट अटैक में दिल के किसी हिस्से तक खून नहीं पहुंच पाता, क्योंकि खून सप्लाई करने वाली कोई मुख्य नस ब्लॉक हो जाती है। अगर खून के बहाव की इस समस्या को जल्दी ठीक नहीं किया जाता, तो दिल का वह हिस्सा जिसे पर्याप्त खून नहीं मिल रहा है, उसकी कोशिकाएं नष्ट होना शुरू हो सकती हैं।
हार्ट अटैक के लक्षण अचानक दिख सकते हैं। हार्ट अटैक में सीने में तेज दर्द, शरीर के ऊपरी हिस्से के दूसरे हिस्सों में बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, ठंडा पसीना आना, जी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होता है। कभी-कभी, लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और घंटों या दिनों तक बने रहते हैं।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट के उलट, हार्ट अटैक के दौरान दिल आमतौर पर धड़कता रहता है। मदद मिलने में जितनी ज्यादा देर होती है, दिल के लिए उतना ही अधिक खतरा होता है। हार्ट अटैक किसी को भी हो सकता है। महिलाओं, डायबिटीज वाले लोगों और बुजुर्गों में लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि उनमें सीने का दर्द न हो।
अगर यह हार्ट अटैक है, तब भी अपने लोकल इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। ऐसी स्थिति में हर मिनट कीमती है। सबसे अच्छा यही है कि आप अपने लोकल इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें, ताकि तुरंत इमरजेंसी रूम पहुंच सकें। इमरजेंसी मेडिकल सर्विस कर्मचारी पहुंचते ही इलाज शुरू कर सकते हैं। एम्बुलेंस से आने वाले सीने में दर्द के मरीजों को अस्पताल में आमतौर पर जल्दी इलाज भी मिलता है।