Patrika+

ज़बान का टेस्ट या दिमाग़ का खेल? जानिए फैटी फ़ूड और मोटापे का सच! नई रिसर्च में दावा

Obesity:जापान के रिसर्चर्स ने दिमाग़ में एक ऐसे प्रोटीन की खोज की है, जो फैट वाले खाने की क्रेविंग और मोटापे को कंट्रोल करता है। इस रिसर्च से यह भी साफ हुआ है कि जेंट्स और लेडीज पर वज़न घटाने वाली दवाइयों का असर अलग क्यों होता है। पढ़ें स्पेशल स्टोरी:
4 min read
Aug 13, 2026
High Fat Food Habit News
फैटी फूड की लत के पीछे है दिमाग के OPA1 प्रोटीन का बड़ा खेल। ( फोटो: AI)

दिमाग़ से जुड़ी एक आश्चर्यजनक खोज से यह समझने में मदद मिल सकती है कि हम फैटी फ़ूड अधिक क्यों खाते हैं। रिसर्चर्स ने दिमाग़ पर आधारित एक आश्चर्यजनक तंत्र (मैकेनिज़्म) का पता लगाया है जो यह समझाने में मदद कर सकता है कि फैटी फ़ूड का विरोध करना इतना मुश्किल क्यों हो सकता है। यह ऐतिहासिक स्टडी मोटापे से जंग में एक नई दिशा दिखा सकती है।

मोटापे का ख़तरा और वज़न घटाने वाली दवाइयों का असर

भूख को कंट्रोल करने वाली दिमाग़ की सेल्स में पाया जाने वाला एक प्रोटीन, ख़ास तौर पर हाई फैट वाले ख़ाद्य पदार्थों की उपलब्धता के समय, अधिक खाने और मोटापे को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जेंट्स और लेडीज़ के बीच अप्रत्याशित अंतर यह समझाने में भी सहायक हो सकते हैं कि मोटापे का ख़तरा और वज़न घटाने वाली दवाओं के प्रति प्रतिक्रियाएं अलग-अलग क्यों हो सकती हैं।

दिमाग़ में मौजूद प्रोटीन वसा की लालसा को कम कर सकता है

क्या आपने कभी सोचा है कि फ्रेंच फ्राइज़, बर्गर्स या तेल-घी से भरपूर मसालेदार खाना सामने आते ही हमारी नीयत क्यों डोलने लगती है? अक्सर हम इसके लिए अपनी टेस्ट या पेट को कोसते हैं, लेकिन असल खेल तो हमारे दिमाग़ के अंदर चल रहा होता है। हाल ही में ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी (Osaka Metropolitan University) के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ह्यूमन लाइफ एंड इकोलॉजी (Graduate School of Human Life and Ecology) में प्रोफेसर शिगेनोबू मात्सुमुरा (Shigenobu Matsumura) के नेतृत्व में रिसर्चर्स की एक रिसर्च टीम ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है।

दिमाग़ के एक अंदरूनी मैकेनिज़्म की खोज की है

वैज्ञानिकों ने दिमाग़ के एक अंदरूनी मैकेनिज़्म की खोज की है, जो यह बताती है कि फैटी फ़ूड देखते ही हम खुद पर कंट्रोल क्यों खो बैठते हैं। इतना ही नहीं, यह स्टडी यह भी साफ़ करती है कि मोटापा और वज़न घटाने वाले ट्रीटमेंट जेंट्स और लेडीज़ पर अलग-अलग असर क्यों डालते हैं।

खाने में फैट और दिमाग़ का न्यूरोलॉजिकल नेटवर्क कनेक्शन

मोटापा आज के समय में पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। यह न सिर्फ़ बॉडी का साइज़ बदलता है, बल्कि डायबिटीज़, दिल की बीमारियां और मेटाबॉलिक डिस्ऑर्डर जैसी गंभीर समस्याओं का न्योता भी देता है। कहने को तो हम कह देते हैं कि ज़्यादा खाने से मोटापा आता है, लेकिन सुपरमार्केट और रेस्टोरेंट में आसानी से मिलने वाले हाई-फैट फ़ूड्स हमें ज़रूरत से ज़्यादा खाने के लिए उकसाते हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात को समझने में जुटे थे कि हमारे खाने में फैट और दिमाग़ का न्यूरोलॉजिकल नेटवर्क आपस में कैसे बात करते हैं।

ज़बान या दिमाग़ का खेल? मोटापे का सच! ( फोटो: AI)

भूख कंट्रोल करने से जुड़ा एक दिमाग़ी प्रोटीन

इस उलझन को सुलझाने के लिए प्रो. मात्सुमुरा की रिसर्च टीम ने दिमाग़ के हाइपोथैलेमस हिस्से में मौजूद MC4R न्यूरॉन्स (MC4R Neurons) और उसमें पाए जाने वाले ऑप्टिक एट्रोफी 1 (OPA1) नामक प्रोटीन पर अपना ध्यान केंद्रित किया। यह प्रोटीन सेल्स के अंदर ऊर्जा बनाने वाले 'पावरहाउस' यानी माइटोकॉन्ड्रिया को दुरुस्त रखने और एनर्जी मेटाबॉलिज्म को संभालने का काम करता है।

रिसर्च ने बताया,प्रोटीन भूख और बॉडी वेट को कैसे प्रभावित करता है

रिसर्चर्स ने प्रयोगशाला में सामान्य चूहों की तुलना ऐसे चूहों से की, जिनके MC4R न्यूरॉन्स से OPA1 प्रोटीन को हटा दिया गया था। इसके बाद जानवरों को सोयाबीन तेल (जो डाइट फैट का बेहतरीन ज़रिया है) असीमित मात्रा में दिया गया, ताकि यह देखा जा सके कि यह प्रोटीन भूख और बॉडी वेट को कैसे प्रभावित करता है।

खाने में फैट की मात्रा का जेंट्स और लेडीज़ पर अलग-अलग असर

रिसर्च के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे। जब सामान्य नर चूहों को फैट वाला खाना मिला, तो उनके दिमाग़ में OPA1 प्रोटीन का लेवल अपने आप बढ़ गया-मानो दिमाग़ फैट को कंट्रोल करने का सिग्नल दे रहा हो, लेकिन मादा चूहों में ऐसा कोई बदलाव देखने को नहीं मिला।

दूसरी ओर, जिन चूहों में OPA1 प्रोटीन की कमी कर दी गई थी, उन्होंने जम कर खाना खाया। उम्र बढ़ने के साथ उनका वज़न बेतहाशा बढ़ा और वे मोटापे का शिकार हो गए। दिलचस्प बात यह रही कि जब चूहों को सामान्य खाने और सोयाबीन तेल में से चुनने की आज़ादी दी गई, तो OPA1 की कमी वाले चूहों ने केवल फैटी खाना चुना। यह असर नर चूहों के मुकाबले मादाओं में बहुत ज़्यादा और साफ तौर पर देखा गया।

मोटापे की दवा के प्रति प्रतिक्रिया भी लिंग के अनुसार अलग होती है

बात सिर्फ़ खाने तक ही सीमित नहीं रही, वैज्ञानिकों ने मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा सेटमेलानोटाइड (Setmelanotide) का भी परीक्षण किया। यह दवा MC4R को एक्टिवेट करके भूख दबाने का काम करती है।

प्रयोग के दौरान इस दवा ने सामान्य और OPA1 की कमी वाले नर चूहों की भूख आसानी से कम कर दी। लेकिन जब इसे OPA1 की कमी वाली मादाओं पर आज़माया गया, तो दवा का असर बेहद कमज़ोर साबित हुआ। यानी दिमाग़ का यह प्रोटीन लेडीज़ में वज़न घटाने वाली दवाओं के असर को भी तय करता है।

एक्सपर्ट कमेंट: जेंडर-स्पेसिफिक और पर्सनल मेडिसिन डवलप करने में मील का पत्थर

"हमारे नतीजे दिमाग़ की ऊर्जा खपत और मेटाबॉलिज्म के नज़रिये से मोटापे की गहराई को समझने में मदद करते हैं। OPA1 प्रोटीन के व्यवहार में पुरुषों और महिलाओं के बीच देखा गया अंतर फ्यूचर में जेंडर-स्पेसिफिक (लिंग-आधारित) और पर्सनल मेडिसिन डवलप करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।"

-प्रोफेसर शिगेनोबू मात्सुमुरा,ग्रेजुएट स्कूल ऑफ ह्यूमन लाइफ एंड इकोलॉजी, ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी।