
आजकल यूपीआई (UPI) से भुगतान करना आम बात हो गई है, लेकिन क्या आपको पता है कि इससे जुड़े टैक्स नियम और संभावित जोखिम क्या हैं? आइए इस लेख में समझते हैं कि यूपीआई ट्रांजैक्शनों को लेकर आयकर विभाग कैसे काम करता है और आप अपने टैक्स और बचत को कैसे बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकते हैं।
सरल भाषा में कहें तो, केवल यूपीआई, NEFT, RTGS या IMPS जैसे डिजिटल माध्यमों से पैसे भेजने या प्राप्त करने से आयकर विभाग नोटिस नहीं भेजता। यह केवल भुगतान का तरीका है, जो स्वाभाविक रूप से टैक्स नोटिस का कारण नहीं बनता। वास्तव में, विभाग इस बात पर ध्यान देता है कि आपके वित्तीय लेन-देन आपकी आयकर रिटर्न (ITR) में दर्शाई गई आय से मेल खाते हैं या नहीं।
लेकिन यदि आपके बैंक खाते में बड़ी या बार-बार आने वाली रकम है और आपने उसे अपनी ITR में नहीं दिखाया है, तो यह विभाग की जांच का कारण बन सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपको यूपीआई के जरिए नियमित रूप से व्यापारिक आय मिल रही है, लेकिन आपने उसे ITR में शामिल नहीं किया, तो नोटिस आ सकता है।
आयकर विभाग आपके वित्तीय लेन-देन को Annual Information Statement (AIS) और Statement of Financial Transactions (SFT) के माध्यम से ट्रैक करता है। AIS एक टैक्स पासबुक की तरह है, जिसमें आपकी TDS, SFT, टैक्स भुगतान, रिफंड और अन्य जानकारियां होती हैं। SFT में बैंक, म्यूचुअल फंड, रजिस्ट्रार आदि द्वारा रिपोर्ट किए गए बड़े लेन-देन शामिल होते हैं।
इन रिपोर्टों के आधार पर विभाग यह देखता है कि आपकी आय और खर्च की जानकारी ITR में सही है या नहीं। यदि कोई अंतर दिखता है, तो नोटिस भेजा जा सकता है।
हालांकि, AIS में दिखने वाला हर ट्रांजैक्शन टैक्स योग्य नहीं होता। उदाहरण के लिए, बचत खाते में जमा या निकासी केवल रिकॉर्ड होती है, इस पर टैक्स नहीं लगता।
सबसे पहले, अपनी AIS नियमित रूप से देखें और उसमें दर्शाई गई जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाएं। यदि कोई गलती हो, तो AIS में फीडबैक देने का विकल्प होता है।
यह सुनिश्चित करें कि आपकी ITR में सभी आय...चाहे वह यूपीआई से हो, बैंक से हो या अन्य स्रोत से, सही तरीके से शामिल हो। विशेष रूप से यदि कोई नियमित या बड़ा भुगतान हो रहा है, तो उसका स्रोत स्पष्ट होना चाहिए।
यदि आप व्यापार करते हैं और यूपीआई से नियमित आय होती है, तो उसे ITR में व्यापारिक आय के रूप में दिखाएं। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि यह वैध आय है।
यदि आपको लगता है कि AIS में कोई गलत जानकारी है, जैसे किसी और का ट्रांजैक्शन आपके नाम पर दिख रहा है, तो तुरंत फीडबैक दें और सुधार करवाएं।
यदि विभाग को आपके ट्रांजैक्शनों और ITR में अंतर दिखता है, तो वह स्पष्टीकरण मांग सकता है। यह नोटिस आमतौर पर ITR फाइलिंग के बाद आता है। ऐसे में आप अपने दस्तावेज जैसे बैंक स्टेटमेंट, बिल, रसीदें संग्रहित रखें और समय पर जवाब दें।