30 सितंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दिल्ली-NCR में बढ़ते यौन अपराध प्रशासन की विफलता: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब, पूछा- ‘निर्भया’ के बाद 14 साल में क्या बदला?

दिल्ली-NCR में बढ़ते यौन अपराधों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख सवाल पूछे हैं और जवाब मांगा है।
2 min read
Google source verification

भारत

•

image

Vinay Shakya

•

Sep 30, 2026

Supreme Court strict on increasing sexual crimes in Delhi-NCR

सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि दिल्ली-NCR में रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों पर स्वत: संज्ञान वाली कार्यवाही शुरू की जाए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक प्रशासन से जुड़े तंत्र की व्यवस्थागत विफलता को दिखाती हैं। लॉबीट के अनुसार यह कार्यवाही 28 सितंबर 2026 को शुरू हुई।

दो घटनाओं का जिक्र

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने खासतौर पर दो मामलों का उल्लेख किया। पहला मामला 4 अगस्त का है। ग्रेटर नोएडा में स्लीपर बस में सवार एक नाबालिग लड़की से कंडक्टर और ड्राइवर ने कथित गैंगरेप किया और उसे पुरानी दिल्ली में कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। दोनों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि बस करीब 47 किलोमीटर चली और पुलिस उसे रोक नहीं पाई।

दूसरा मामला 21 सितंबर का है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में एक किशोरी से कथित गैंगरेप हुआ। आरोप है कि तीन लोग पुलिसकर्मी बनकर आए थे।

कोर्ट में 'निर्भया' का जिक्र

जस्टिस पारदीवाला ने 2012 के निर्भया कांड से तुलना करते हुए सवाल उठाया कि उसके बाद व्यवस्था में कितना सुधार हुआ। दिसंबर 2012 की उस घटना को अब करीब 14 साल हो चुके हैं। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया। कोर्ट के मुताबिक जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में गरिमा के साथ और हिंसा के लगातार भय के बिना जीने का अधिकार भी शामिल है।

पीठ ने यह भी कहा कि सड़कें, पार्क, बसें, मेट्रो स्टेशन, सब-वे और फुटओवर ब्रिज कम रोशनी, निगरानी या गश्त की कमी जैसी रोकी जा सकने वाली खामियों से "अधिक जोखिम वाले क्षेत्र" नहीं बनने चाहिए। अदालत का साफ संदेश रहा कि सिर्फ एकजुटता जताना इस सामाजिक बुराई का समाधान नहीं है। इसलिए अफसरों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका तय करने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक जवाबदेही जरूरी है।

एक और घटना भी दायरे में

इंडिया लीगल के अनुसार, पीठ ने दिल्ली के स्वरूप नगर में एक किशोरी के कथित गैंगरेप और हत्या की खबरों का भी संज्ञान लिया। आपके मसौदे में इस मामले का जिक्र नहीं था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर में दिल्ली में यौन उत्पीड़न के कम से कम 13 मामले सामने आ चुके हैं।

आंकड़ों की तस्वीर

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की "क्राइम इन इंडिया 2024" रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में देशभर में रेप के 29,536 मामले दर्ज हुए, यानी रोजाना औसतन करीब 81। इनमें 28,950 मामलों में पीड़िता 18 वर्ष या उससे अधिक की थी, जबकि 784 मामलों में 18 वर्ष से कम। राजस्थान में सबसे ज्यादा 4,871 मामले दर्ज हुए, उसके बाद उत्तर प्रदेश (3,209), महाराष्ट्र (3,091) और मध्य प्रदेश (3,061) रहे।

राजधानी की बात करें तो NCRB के अनुसार 2024 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 13,396 मामले दर्ज हुए, जो 19 महानगरों में सबसे ज्यादा है। इनमें 1,058 रेप के मामले थे। हालांकि यही रिपोर्ट दिल्ली में महिला-अपराध दर 176.8 प्रति लाख बताती है, जो जयपुर (199), लखनऊ (186) और इंदौर (181.5) से कम है। आंकड़ों की एक सीमा भी है। सीईडीए (अशोका विश्वविद्यालय) के विश्लेषण के अनुसार एनसीआरबी के आंकड़े दर्ज अपराधों का रिकॉर्ड हैं, अपराध की कुल घटनाओं का सीधा पैमाना नहीं।

बड़ी खबरें

View All

Patrika+

ट्रेंडिंग