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सिलिका सेंड में छिपा है भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का भविष्य: राजस्थान, MP और छत्तीसगढ़ की सिलिका से बनेगी चिप

राजधानी में आयोजित सेमीकॉन-इंडिया 2026 आयोजन में देश-विदेश के सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी हस्तियां शामिल हुई हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे ले जाना है।
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Sep 19, 2026
made in india chips
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

दिल्ली के यशोभूमि में जारी सेमीकॉन इंडिया 2026 में देश-विदेश की सेमीकंडक्टर हस्तियां जुटी हैं, लेकिन गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के सपने की है। सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों की राय है कि भारत के पास सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की भरपूर संभावनाएं हैं। इसके लिए राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में मौजूद कच्चे माल सिलिका सेंड का तेजी से दोहन और प्रोसेसिंग होना जरूरी है। फिलहाल, भारत चिप के इस बुनियादी कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है और चीन, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका व सिंगापुर से सिलिका मंगाता है।

जानकारों के मुताबिक, चिप निर्माण लायक उच्च शुद्धता वाला सिलिकॉन देने वाली सिलिका सेंड देश के 10 राज्यों में मौजूद है, जिनमें राजस्थान व छत्तीसगढ़ प्रमुख हैं। मध्यप्रदेश में भी इसके भंडार होने के संकेत मिले हैं। अभी चिप निर्माण के मोर्चे पर गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में सबसे तेज गति से काम चल रहा है।

रेत से चिप तक का सफर

सिलिका सेंड से शुद्ध सिलिका अलग करके कार्बन के साथ रासायनिक प्रक्रिया से सिलिकॉन बनाया जाता है, जिसे पॉलीसिलिकॉन में बदलकर छड़ और फिर गोल वेफर की शक्ल दी जाती है। वेफर पर फोटोलिथोग्राफी, एचिंग और डोपिंग जैसी सैकड़ों प्रक्रियाओं से परतें चढ़ाई जाती हैं, तब जाकर तैयार चिप्स की पैकेजिंग होती है। सिलिका के दोहन से लेकर शुद्धता जांच तक की यह प्रक्रिया लंबी है, जिसे भारत में विकसित करने पर तेजी से काम चल रहा है।

राजस्थान: 'ट्रिपल-एस' की ताकत

राजस्थान में करीब 332.46 मिलियन टन सिलिका सेंड संसाधन आंके गए हैं। अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अलवर, जोधपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बूंदी, कोटा और कोटपूतली में सिलिका सेंड मिलती है। जयपुर के झीर-खोरी-निमोरा क्षेत्र में करीब 8 मिलियन टन संसाधन और लगभग 97.9% शुद्धता वाली सिलिका सेंड का जिक्र है। इसी साल राज्य ने भिवाड़ी में अपना पहला सेमीकंडक्टर क्लस्टर भी शुरू किया, जो 50 एकड़ में फैला है और जिसमें सालाना करीब 6 करोड़ चिप का उत्पादन लक्ष्य रखा गया है।

अब तक 20 कंपनियों से 1,200 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। राज्य सरकार इसे सिलिका, स्किल और सौर ऊर्जा वाले 'ट्रिपल-एस' फैक्टर के रूप में प्रचारित कर रही है। इसी साल भिवाड़ी में सहस्र सेमीकंडक्टर्स ने भारत की पहली SME-नेतृत्व वाली सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग व पैकेजिंग (ATMP/OSAT) फैसिलिटी भी शुरू की, जिससे चिप कंपोनेंट्स का निर्यात बढ़ेगा।

राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी

राजस्थान ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़ी छलांग लगाते हुए भिवाड़ी में प्रदेश का पहला सेमीकंडक्टर क्लस्टर स्थापित किया है। यहां हर साल 6 करोड़ चिप का उत्पादन होगा। 1200 करोड़ रुपए के निवेश वाले इस इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर से करीब 2,500 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही देश में सेमीकंडक्टर प्लांट की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।

मध्यप्रदेश: झाबुआ-छतरपुर पर नजर

मध्यप्रदेश के झाबुआ व छतरपुर जिलों में सिलिका सेंड की संभावनाएं सामने आई हैं। राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 6,200 करोड़ रुपये की परियोजना की घोषणा हो चुकी है और इसके लिए IT पार्क भी विकसित किया जा रहा है। निवेश जुटाने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही दिल्ली में जापान, कोरिया व अमेरिका की कंपनियों से बातचीत भी की है।

छत्तीसगढ़: देश की पहली चिप फैक्ट्री

छत्तीसगढ़ के दुर्ग, राजनांदगांव व बिलासपुर में सिलिका सेंड के भंडार बताए जाते हैं। चेन्नई मूल की पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स करीब 1,143 करोड़ रुपये के निवेश से रायपुर के पास एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर संयंत्र लगा रही है, जिसका लक्ष्य 2030 तक हर साल 10 अरब चिप्स बनाना है। कंपनी की ये चिप्स टेलीकॉम, मोबाइल (6जी-7जी तकनीक), लैपटॉप, डेटा ट्रांसमिशन-एनालिसिस और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल होंगी। राज्य सरकार इसे खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलने वाला कदम बता रही है।

आयोजन की पृष्ठभूमि और मंत्री का बयान

सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के यशोभूमि में किया, जहां यह सम्मेलन 17 से 19 सितंबर तक भारत सेमीकंडक्टर मिशन और SEMI के संयुक्त तत्वावधान में चल रहा है, और इसकी थीम 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम' रखी गई है। जुलाई 2026 में मंजूर हुई सरकार की सेमीकॉन 2.0 योजना का कुल परिव्यय 1,27,500 करोड़ रुपये है। यह डिजाइन, मशीन व सामग्री, फैब, असेंबली-पैकेजिंग, अनुसंधान व टैलेंट, इन 6 स्तंभों पर केंद्रित है।

केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में कहा कि सेमीकंडक्टर कंपनियों को लागत व गुणवत्ता में वैश्विक स्तर पर मुकाबला करना होगा तथा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, प्रोडक्ट लाइफ साइकिल व बिजली खपत जैसी बातों का भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 28 से ज्यादा देशों की कंपनियां हिस्सा ले रही हैं और एक वैश्विक साझेदार ने पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है। सम्मेलन में स्वदेशी कंपनियों की मौजूदगी भी दिखी। L&T सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज ने अपना पहला सिलिकॉन कार्बाइड प्लेटफॉर्म समेत 40 प्रोडक्ट लॉन्च किए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सिलिका सेंड के दोहन व शुद्धिकरण की रफ्तार बढ़े, तो भारत आयातित कच्चे माल पर निर्भरता घटाकर सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

Updated on:
19 Sept 2026 01:46 pm
Published on:
19 Sept 2026 01:46 pm
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