
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
फिल्म रिलीज होने से पहले सिर्फ स्टारकास्ट, कहानी और बॉक्स ऑफिस का गणित नहीं चलता। पर्दे पर फिल्म दिखाने से पहले उसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड की कसौटी से भी गुजरना पड़ता है। अब केंद्र सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं।
केंद्र सरकार द्वारा फिल्मों के सर्टिफिकेशन के लिए जारी गाइडलाइन में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। सेंसर बोर्ड ने नई गाइडलाइन में हिंसा, ड्रग्स, सामाजिक संवेदनशीलता, टाइटल और दूसरे देशों के साथ भारत के रिश्तों को लेकर नए नियम बनाए गए हैं। खास बात यह है कि इस गाइडलाइन में करीब 35 साल बाद बदलाव किया गया है। इसके पहले 1991 में सेंसर बोर्ड ने गाइडलाइन जारी की थी।
यह बदलाव सीबीएफसी के पुनर्गठन के फौरन बाद आया है। मंत्रालय ने हाल ही में 18 सदस्यों वाला नया सीबीएफसी बोर्ड घोषित किया था, जिसमें प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी और सुनील शेट्टी जैसे बॉलीवुड के जाने-पहचाने नाम शामिल हैं। यह बोर्ड Cinematograph Act, 1952 और Cinematograph (Certification) Rules, 2024 के तहत गठित किया गया है। इसका कार्यकाल 3 साल का होगा। नए फ्रेमवर्क की घोषणा इस पुनर्गठन के कुछ ही समय बाद हुई है।
नई गाइडलाइन में कहा गया है कि फिल्मों की वजह से भारत के दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए सावधानी रखनी होगी। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि फिल्मों में ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता पर सवाल उठाए या देश की सुरक्षा को खतरे में डाले।
नए नियमों के मुताबिक, फिल्मों में हिंसा का महिमामंडन नहीं होना चाहिए। अपराधियों के अपराध करने के तरीके को इस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए, जिससे अपराध करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिले। लोगों को उकसाने वाले दृश्य या शब्द भी गाइडलाइन के दायरे में आएंगे। कुल मिलाकर फिल्मों में जरूरत से ज्यादा मारधाड़ या हिंसा को अब बढ़ावा नहीं दिया जा सकेगा।
फिल्म में नशीले पदार्थों या साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी से जुड़े दृश्य दिखाए जाते हैं तो उनके साथ वैधानिक चेतावनी देनी होगी। नई गाइडलाइन में ड्रग्स के चित्रण वाली फिल्मों के लिए विशेष रूप से नए नियम लागू किए गए हैं और मादक पदार्थों से जुड़े दृश्यों पर निर्धारित वैधानिक चेतावनी अनिवार्य कर दी गई है, जबकि शराब, नशे की लत या तंबाकू के इस्तेमाल को सही या ग्लैमरस दिखाने पर रोक पहले की तरह जारी रहेगी।
नई गाइडलाइन के अनुसार, फिल्म में ऐसी सामग्री को लेकर भी सावधानी बरतनी होगी जो लोगों की भावनाओं या संवेदनशीलता को ठेस पहुंचा सकती है। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर सतर्क रहना होगा। सांप्रदायिक, अंधविश्वासी, गैर-वैज्ञानिक या राष्ट्र-विरोधी रवैये को बढ़ावा देने वाले दृश्यों से भी बचना होगा।
अब फिल्म की कहानी, कंटेंट और थीम के आधार पर उसे अलग-अलग सर्टिफिकेट कैटेगरी में रखा जा सकता है। कहानी, कंटेंट और थीम के आधार पर फिल्मों को UA, UA7 प्लस, UA13 प्लस, UA16 प्लस और A सर्टिफिकेट दिया जाएगा। अगर कोई फिल्म बाकी मानकों पर खरी उतरती है, लेकिन बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, तो उसे 'A' श्रेणी सर्टिफिकेट दिया जाता है। यदि फिल्म की कहानी या थीम के लिए अभिभावकों की निगरानी जरूरी मानी जाने पर फिल्म को UA7 प्लस, UA13 प्लस या UA16 प्लस में रखा जा सकता है। गौरतलब है कि ये उम्र-आधारित श्रेणियां Cinematograph Rules, 2024 के तहत पहले ही शुरू की जा चुकी थीं और मई 2025 में लागू इस उम्र-आधारित सर्टिफिकेशन व्यवस्था को नई गाइडलाइन में बरकरार रखा गया है।
अब फिल्म के टाइटल पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। टाइटल भड़काऊ, अश्लील, आपत्तिजनक या गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले नहीं होने चाहिए। हाल में मलयालम फिल्म 'जानकी वर्सेज स्टेट ऑफ केरल' का मामला भी इसी वजह से चर्चा में रहा था। केंद्रीय मंत्री व अभिनेता सुरेश गोपी की इस फिल्म पर सीबीएफसी ने आपत्ति जताई थी क्योंकि 'जानकी' नाम हिंदू धर्म में देवी सीता का पर्याय माना जाता है।
साथ ही फिल्म में किरदार के साथ संवेदनशील दृश्य थे। मामला केरल हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां बोर्ड ने पहले 96 कट सुझाए थे, लेकिन बाद में टाइटल में मामूली संशोधन 'जानकी वी वर्सेज स्टेट ऑफ केरल' और सिर्फ एक दृश्य में बदलाव के साथ फिल्म को मंजूरी दे दी गई। तीन दशक से ज्यादा समय बाद आया यह बदलाव नए CBFC बोर्ड के गठन के साथ मिलकर संकेत देता है कि आने वाले दिनों में फिल्मों की सामग्री, टाइटल और सामाजिक-राष्ट्रीय संवेदनशीलता को लेकर जांच और सख्त हो सकती है।
Updated on:
19 Sept 2026 03:18 pm
Published on:
19 Sept 2026 03:18 pm
