
भारत सरकार ने कन्नड़ फिल्मों के वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान और पीढ़ियों को प्रेरित करने वाले सिनेमाई सफर के लिए वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार देने की घोषणा की है। सरकार ने दादा साहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की अनुशंसा पर यह निर्णय लिया है। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है, जो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। यह सम्मान कन्नड़ सिनेमा के लिए ऐतिहासिक है।
अभिनेता अनंत नाग को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलना कन्नड़ सिनेमा के लिए काफी अहम है। साल 1969 में शुरू हुए इस पुरस्कार के 57 वर्षों के इतिहास में कन्नड़ फिल्म जगत से अब तक केवल डॉ. राजकुमार (1995) को यह सम्मान मिला था। अनंत नाग के नाम के साथ 3 दशक बाद कन्नड़ सिनेमा की दूसरी बार इस सूची में वापसी हो रही है।
पिछले वर्ष मलयालम अभिनेता मोहनलाल को 2023 का फाल्के पुरस्कार 23 सितंबर 2025 को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदान किया था। 65 वर्ष की उम्र में मोहनलाल यह सम्मान पाने वाले सबसे कम आयु के कलाकार बने थे। 4 सितंबर 2026 को 78 वर्ष पूरे कर चुके अनंत नाग को यह पुरस्कार 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में मिलेगा। वर्ष 2024 के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा 18 जुलाई 2026 को हुई थी, जिसमें 'आर्टिकल 370' को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और 'कल्कि 2898 एडी' को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म चुना गया था।
अनंत नाग का वास्तविक नाम अनंत नागरकट्टे है। उनका जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल तालुक स्थित शिराली में एक कोंकणी भाषी परिवार में हुआ। माता-पिता आनंदी और सदानंद नागरकट्टे थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दक्षिण कन्नड़ के आनंदाश्रम और उत्तर कन्नड़ के चित्रापुर मठ के संरक्षण में हुई।
आगे की पढ़ाई के लिए वे बॉम्बे भेजे गए, जहां 8 साल तक शौकिया रंगमंच से जुड़े रहे। रंगमंच निर्देशक सत्यदेव दुबे ने उन्हें श्याम बेनेगल से मिलवाया और यहीं से उनका सिनेमाई सफर शुरू हुआ। अनंत नाग, दिवंगत निर्देशक-अभिनेता शंकर नाग के बड़े भाई हैं। रंगमंच की सुपरिचित अभिनेत्री अरुंधती नाग उनकी भाभी हैं। उनका विवाह 1987 में गायत्री से हुआ।
अनंत नाग ने फीचर फिल्मों में पदार्पण 1973 में प्रो. पी. वी. नंजराज उर्स की कन्नड़ फिल्म 'संकल्प' से किया, जिसने कर्नाटक में सात राज्य पुरस्कार जीते। समानांतर सिनेमा में उनकी एंट्री श्याम बेनेगल की 'अंकुर' (1974) से हुई। इसी दौर में उन्होंने बेनेगल की 'निशांत' (1975), 'मंथन' (1976), 'भूमिका' (1977), 'कोंडुरा' (1977) और 'कलयुग' (1981) में काम किया। एम. एस. सथ्यू और गिरीश कर्नाड जैसे फिल्मकारों के साथ भी उन्होंने काम किया।
पांच दशक के करियर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें 200 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में हैं। इसके अलावा हिंदी, तेलुगू, तमिल, मलयालम, मराठी और अंग्रेजी फिल्मों में भी वे नजर आए। उनकी चर्चित कन्नड़ फिल्मों में 'बयलु दारी' (1976), 'कन्नेश्वर राम' (1977), 'ना निन्ना बिडलारे' (1979), 'चंदनदा गोंबे' (1979), 'बेंकिया बले' (1983), 'हेंडतिगे हेलबेडी' (1989), 'गणेशन मदुवे' (1990), 'गौरी गणेश' (1991), 'मुंगारु माले' (2006), 'गोधी बन्ना साधारण मैकट्टु' (2016), 'राजकुमार' (2017), 'केजीएफ: चैप्टर 1' (2018), 'केजीएफ: चैप्टर 2' (2022) और 'गालीपटा 2' (2022) शामिल हैं। 'गोधी बन्ना साधारण मैकट्टु' में अल्ज़ाइमर से जूझते व्यक्ति के किरदार को समीक्षकों ने बेहद सराहा और इस प्रायोगिक फिल्म को व्यावसायिक सफलता भी मिली। छोटे पर्दे पर अनंत नाग आर. के. नारायण की कहानियों पर आधारित दूरदर्शन की मशहूर श्रृंखला 'मालगुडी डेज' में दिखे, जिसका निर्देशन उनके छोटे भाई शंकर नाग ने किया था।
अनंत नाग नाम 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ और पांच कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार हैं। राज्य का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार उन्हें 'मिंचिना ओट' (1979-80), 'होसा नीरु' (1985-86), 'अवस्थे' (1987-88) और 'गंगव्वा गंगामयी' (1994-95) के लिए मिला। 2011-12 में उन्हें डॉ. विष्णुवर्धन लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और 2007 में राज्योत्सव पुरस्कार मिला।
जनवरी 2025 में सरकार ने उन्हें कला के क्षेत्र में पद्म भूषण देने की घोषणा की, जो राष्ट्रपति ने 27 मई 2025 को प्रदान किया। राजनीति में भी वे सक्रिय रहे। 1970 के दशक से जनता पार्टी के प्रयोग से जुड़े रहे, 1988 से 1994 तक कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य रहे, 1994 में विधायक चुने गए और 1996 से 1999 तक मुख्यमंत्री से संलग्न राज्य मंत्री रहे।
यह पुरस्कार 1969 में भारतीय सिनेमा के जनक धुंडीराज गोविंद फाल्के (1870-1944) की जन्मशती के वर्ष में शुरू किया गया था। फाल्के ने 1913 में देश की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बनाई थी। पुरस्कार "भारतीय सिनेमा की वृद्धि और विकास में उत्कृष्ट योगदान" के लिए दिया जाता है और चयन फिल्म जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की विशेष समिति करती है। इसके लिए कोई आवेदन या प्रविष्टि नहीं मांगी जाती।
पहली विजेता अभिनेत्री देविका रानी थीं, जिन्हें 17वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया गया। पुरस्कार में स्वर्ण कमल पदक, शॉल और प्रमाण पत्र के साथ नकद राशि दी जाती है। वर्षों से यह राशि 10 लाख रुपये रही, लेकिन 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के आधिकारिक नियमों के मुताबिक इसे 15 लाख रुपये कर दिया गया है।
अब तक केवल दो एक्टर्स को मरणोपरांत पुरुस्कार मिला है। इसमे पृथ्वीराज कपूर (1971) और विनोद खन्ना (2017) शामिल हैं। पृथ्वीराज कपूर की ओर से पुरस्कार उनके बेटे राज कपूर ने लिया, जो 1987 में स्वयं भी इस सम्मान के विजेता बने।इस लिस्ट में 4 जोड़े भाई-बहनों के हैं। बी. एन. रेड्डी (1974) और बी. नागी रेड्डी (1986); राज कपूर (1987) और शशि कपूर (2014); लता मंगेशकर (1989) और आशा भोसले (2000); बी. आर. चोपड़ा (1998) और यश चोपड़ा (2001)।
1969 (देविका रानी) से 2023 (मोहनलाल) तक यह पुरस्कार 55 हस्तियों को दिया जा चुका है। इस सूची में मिथुन चक्रवर्ती 54वें विजेता थे, जिन्हें 2022 का पुरस्कार 8 अक्टूबर 2024 को 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में मिला। मोहनलाल 55वें विजेता बने। इस लिहाज से अनंत नाग दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के 56वें विजेता होंगे। विजेताओं में अब तक 8 महिलाएं शामिल हैं। देविका रानी, रूबी मायर्स (सुलोचना), कानन देवी, दुर्गा खोटे, लता मंगेशकर, आशा भोसले, आशा पारेख और वहीदा रहमान को यह पुरस्कार मिल चुका है।