
भारतीय शहरों के लिए कचरे के विशाल पहाड़ (डंपिंग ग्राउंड्स) दशकों से पर्यावरणीय प्रदूषण, भूजल विषाक्तता और भूमि की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण रहे हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) की पारंपरिक व्यवस्था में पूरे शहर का कचरा ट्रकों में भर कर कई किलोमीटर दूर डंप यार्ड तक ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ईंधन जलता है और कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि होती है। इस पुराने और गैर-किफ़ायती मॉडल को समाप्त करने के लिए अब नगर निकाय वार्ड-स्तरीय विकेंद्रीकृत बायो-सीएनजी और क्लोज़्ड-लूप कंपोस्टिंग संयंत्र स्थापित करने की नई कार्ययोजना पर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
| प्रणाली व घटक | तकनीकी कार्यप्रणाली | नगर निकाय व नागरिक लाभ |
|---|---|---|
| वार्ड-स्तरीय बायो-सीएनजी | गीले कचरे का स्थानीय एनारोबिक डाइजेशन | कचरा वाहनों हेतु मुफ़्त ग्रीन फ़्यूल और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बचत |
| कॉम्पैक्ट रीसाइक्लिंग | सूखे कचरे की ऑन-साइट छँटाई व बेलिंग | डंपिंग यार्ड्स पर कचरे के कुल भार में 40% तक की कमी |
| क्लोज़्ड-लूप कंपोस्टिंग | जैविक अपशिष्ट से पोषक तत्व युक्त खाद निर्माण | पार्कों हेतु प्राकृतिक खाद की उपलब्धता और मीथेन उत्सर्जन पर रोक |
इस नए मॉडल का केंद्रीय विचार कचरे को उसके स्रोत के पास ही प्रोसेस करना है। सब्जी मंडियों, होटलों, रेस्टोरेंट्स और आवासीय सोसायटियों से निकलने वाले गीले कचरे (ऑर्गेनिक वेस्ट) को उसी वार्ड या ज़ोन में स्थापित कॉम्पैक्ट बायोगैस और कंपोस्टिंग यूनिट्स में भेजा जा रहा है।
ईंधन की आत्मनिर्भरता: इस गीले कचरे के अवायवीय पाचन (Anaerobic Digestion) से उच्च गुणवत्ता वाली बायो-सीएनजी (CBG) बनाई जा रही है।
सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल: उत्पन्न बायो-सीएनजी को सीधे स्थानीय नगर निगम के डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहनों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी जिस कचरे को उठाया जा रहा है, उसी की ऊर्जा से कचरा गाड़ियाँ संचालित हो रही हैं।
लॉजिस्टिक्स खर्च में भारी कटौती: डंपिंग ग्राउंड तक कचरे के लंबी दूरी के फेरे बंद होने से नगर निकायों के ईंधन बजट और वाहनों के रखरखाव खर्च में 35 से 40 प्रतिशत तक की सीधी बचत दर्ज की गई है।
वार्ड स्तर पर ही गीले कचरे के शत-प्रतिशत निस्तारण और सूखे कचरे की स्थानीय स्तर पर कॉम्पैक्ट रीसाइक्लिंग (छँटाई व बेलिंग) से बड़े डंपिंग यार्ड्स में पहुंचने वाले कचरे के कुल आयतन में 40% तक की कमी आई है। इसके साथ ही हवा में मिथेन गैस के रिसाव और डंप यार्ड्स में लगने वाली भीषण आग की घटनाओं पर भी लगाम लग रही है। स्थानीय स्तर पर बची हुई जैविक खाद (Fermented Organic Manure) का उपयोग पार्कों और हरित पट्टियों में किया जा रहा है, जिससे ज़ीरो-वेस्ट वार्ड का लक्ष्य साकार हो रहा है।