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AI Delhi Traffic Control : दिल्ली में एआई से ट्रैफिक जाम में 33% की कमी, प्रोजेक्ट संगम से बदल रही सड़क की तस्वीर

AI Delhi Traffic Control : दिल्ली में एआई आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट से जाम में लगभग 33% की कमी दर्ज हुई है। जानिए क्या है 'प्रोजेक्ट संगम', आंकड़े, जाम से कौन से इलाके हुए मुक्त और क्या है भविष्य की चुनौतियां।
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Jul 27, 2026
Delhi traffic reduced Delhi AI Traffic Control
जानिए प्रोजेक्ट संगम की पूरी कहानी (Photo: ChatGpt)

AI Delhi Traffic Control : देश की राजधानी दिल्ली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली के उल्लेखनीय परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में लागू की गई एआई-संचालित निगरानी, डेटा विश्लेषण और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन उपायों के चलते राजधानी में ट्रैफिक जाम में लगभग 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। दिल्ली में सड़क पर जाम से मुक्ति पाने के लिए क्या—क्या उपाय किए गए हैं, आइए जानते हैं।

गूगल मैप्स के आंकड़ों से मिला सुधार का प्रमाण

दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक की वास्तविक स्थिति आंकने के लिए Google Maps के लाइव ट्रैफिक डेटा का इस्तेमाल किया। हर 15 मिनट में जाम की लंबाई का विश्लेषण किया गया।

दिल्ली की सड़क पर घट रहा है औसत ट्रैफिक जाम

  • राजधानी में जनवरी-मार्च 2026 के दौरान औसत ट्रैफिक जाम की लंबाई 48.25 किलोमीटर थी।
  • अप्रैल से 25 जून 2026 के बीच यह घटकर 32.43 किलोमीटर रह गई।
  • राजधानी में जाम की औसत लंबाई में करीब 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े महानगर में महज तीन महीनों में इस स्तर का सुधार दिखाता है कि डेटा-आधारित ट्रैफिक प्रबंधन पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक असरदार साबित हो सकता है।

क्या है 'प्रोजेक्ट संगम'?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की 'प्रोजेक्ट संगम' पहल का मकसद राजधानी के सबसे अधिक प्रभावित ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स की पहचान कर वहां वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान लागू करना है। यह परियोजना केवल तकनीक तक सीमित नहीं है। इसके तहत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन (MWA) जैसे स्थानीय संगठनों को भी शामिल कर नागरिक भागीदारी बढ़ाई जा रही है, ताकि इलाके-विशेष समस्याओं का समाधान स्थानीय जरूरतों के हिसाब से हो सके।

62 ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स का चयन, 48 लाख से ज्यादा चालान कटे

  • राजधानी के 62 प्रमुख ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स चिन्हित किए गए, जिनमें से 34 स्थानों पर महीने-दर-महीने सुधार दर्ज किया गया।
  • ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई और पैदल गश्त बढ़ाई गई।
  • सड़क इंजीनियरिंग में सुधार किए गए, जिनमें 8 सिग्नल-फ्री कॉरिडोर (उत्तरी दिल्ली में छह और पूर्वी दिल्ली में दो) का निर्माण शामिल है। इसके लिए अनावश्यक सिग्नल हटाए गए। अनधिकृत मीडियन कट बंद किए गए और U-टर्न व चौराहों को व्यवस्थित किया गया।
  • एआई आधारित कैमरों और डिजिटल निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल किया गया।
  • वर्ष 2026 की पहली छमाही में 48.4 लाख से अधिक चालान काटे गए और तकनीक-आधारित प्रवर्तन को मजबूत किया गया।
  • अप्रैल की शुरुआत से अब तक करीब 30 बैठकों में 6,000 से अधिक निवासियों ने भाग लेकर पार्किंग उल्लंघन, ई-रिक्शा प्रबंधन और पैदल यात्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर 50 से अधिक सुझाव दिए हैं।

किन इलाकों में सबसे अधिक सुधार हुआ?

कई प्रमुख चौराहों और मार्गों पर ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

  • कैलाश नगर (पुश्ता रोड) – 82.59% कमी
  • खजूरी चौक – 74.29% कमी
  • तीन मूर्ति राउंडअबाउट – 66.01% कमी

इन क्षेत्रों में बेहतर लेन प्रबंधन, अतिक्रमण हटाने, सिग्नल टाइमिंग में बदलाव और लगातार निगरानी से सकारात्मक नतीजे मिले हैं।

किन इलाकों में बढ़े ट्रैफिक जाम

हालांकि ज़्यादातर स्थानों पर सुधार हुआ है, लेकिन चार हॉटस्पॉट्स पर ट्रैफिक दबाव बढ़ने की भी सूचना मिली है, जिसकी बड़ी वजह वहां चल रहा निर्माण कार्य बताई जा रही है-

  • नारायणा फ्लाईओवर – 1.28% वृद्धि
  • साउथ एक्सटेंशन पार्ट-I – 7.55% वृद्धि
  • मैक्स अस्पताल, साकेत – 14.93% वृद्धि
  • भवभूति मार्ग – 349.87% वृद्धि

इसके अलावा, समीक्षा में यह भी सामने आया कि द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और द्वारका के धौला कुआं जाने वाले गोल चक्कर (डाबरी गोल चक्कर) जैसे पुराने बॉटलनेक अब भी बने हुए हैं, जिन्हें तत्काल इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन संबंधी हस्तक्षेप की जरूरत है। अधिकारियों का कहना है कि इन इलाकों में निर्माण कार्य, बढ़ता यातायात, पार्किंग की समस्या और सड़क क्षमता पर बढ़ता दबाव मुख्य कारण हो सकते हैं। इन जगहों पर आगे अध्ययन और इंजीनियरिंग समाधान पर काम किया जा रहा है।

एआई कैसे ट्रैफिक जाम से दिलाता है मुक्ति?

आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन में एआई सिर्फ कैमरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर वास्तविक समय (रियल-टाइम) में फैसले लेने में मदद करता है।

  • लाइव ट्रैफिक कैमरों से वाहन घनत्व का विश्लेषण करती है।
  • जरूरत के अनुसार ट्रैफिक सिग्नलों की टाइमिंग समायोजित कर सकती है।
  • दुर्घटना, खराब वाहन या असामान्य भीड़ की तुरंत पहचान करती है।
  • वैकल्पिक मार्गों का सुझाव देने में मदद करती है।
  • भविष्य में संभावित जाम वाले क्षेत्रों का पूर्वानुमान लगाने में भी सक्षम है।

क्या है गूगल का प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट?

गूगल का अपना 'प्रोजेक्ट ग्रीन लाइट' (Project Green Light) भी इसी दिशा में एक वैश्विक उदाहरण है, जिसमें गूगल मैप्स के डेटा से सिग्नल टाइमिंग को अनुकूलित कर गाड़ियों के रुकने-चलने की संख्या और उत्सर्जन कम करने की कोशिश की जाती है। यह पहल दुनिया के करीब एक दर्जन शहरों में पहल में लाया गया। इन शहरों में भारत का बेंगलुरु भी शामिल है। इसके अलावा सिंगापुर, लंदन, सियोल और दुबई जैसे शहर पहले से ही एआई आधारित स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में भी दिल्ली के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

ट्रैफिक में सुधार के लिए विभागों के बीच समन्वय जरूरी

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि ट्रैफिक सुधार सिर्फ पुलिस के प्रयासों से संभव नहीं है, इसलिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इनमें शामिल हैं-

  • दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC)
  • लोक निर्माण विभाग (PWD)
  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
  • दिल्ली परिवहन निगम (DTC)
  • नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC)
  • नगर निगम दिल्ली (MCD)

इन एजेंसियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण, नियमित समीक्षा बैठकें और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि ट्रैफिक प्रवाह बेहतर बनाया जा सके।

ट्रैफिक जाम में कमी के क्या हैं फायदे?

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रैफिक जाम में कमी सिर्फ यात्रा आसान नहीं बनाती, बल्कि इसके कई व्यापक फायदे भी हैं।

  • यात्रियों का समय बचता है।
  • ईंधन की खपत घटती है।
  • वाहनों से निकलने वाला कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
  • वायु प्रदूषण में कमी आती है।
  • एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही तेज होती है।
  • व्यापारिक गतिविधियों और सार्वजनिक परिवहन की दक्षता बढ़ती है।
  • नागरिकों की उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।

उपराज्यपाल ने दिए 24×7 डिजिटल निगरानी के निर्देश

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कुछ समय पहले हुई बैठक में एआई आधारित निगरानी और डिजिटल प्रवर्तन प्रणाली को 24 घंटे, सातों दिन प्रभावी ढंग से चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक जाम सिर्फ समय और ईंधन की बर्बादी नहीं करता, बल्कि राजधानी में प्रदूषण बढ़ाने का भी बड़ा कारण है। उन्होंने दिल्ली की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए निर्बाध आवागमन को जरूरी बताते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पूर्ण प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया।

उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मजबूत करने का निर्देश दिया और यह भी कहा कि वे स्वयं कई ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स का निरीक्षण कर सुधार कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

एआइ की मदद से सुधरेंगे सड़क पर जाम के हालात

दिल्ली में एआई आधारित ट्रैफिक प्रबंधन की शुरुआती सफलता यह संकेत देती है कि आने वाले समय में तकनीक शहरी परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल बना सकती है। हालांकि द्वारका मोड़, सराय काले खां, मुकरबा चौक और भावभूति मार्ग जैसे कुछ संवेदनशील इलाकों में चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, लेकिन डेटा आधारित निर्णय, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, डिजिटल प्रवर्तन और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से राजधानी को जाम-मुक्त बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर इस मॉडल को लगातार बेहतर किया गया और अन्य महानगरों में भी लागू किया गया, तो भारत के शहरी यातायात प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Updated on:
27 Jul 2026 01:11 pm
Published on:
27 Jul 2026 01:11 pm