
दिल की सेहत बुजुर्गों के लिए खास मायने रखती है - यह सिर्फ एक अंग की बात नहीं, बल्कि पूरा जीवन ही इस पर टिका होता है। उम्र बढ़ने के साथ दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है, लेकिन सही जानकारी, सावधानी और छोटे-छोटे बदलाव से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को प्रति सप्ताह कम से कम 150–300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि करनी चाहिए, या 75–150 मिनट तेज गति वाली गतिविधि, या दोनों का संयोजन।
साथ ही, सप्ताह में दो या अधिक दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी जरूरी हैं। ऐसे व्यायामों से दिल की बीमारी से मौत का जोखिम 32% तक कम हो सकता है।
WHO की गाइडलाइन के अनुसार सक्रिय रहने से यह लाभ 40% तक बढ़ जाता है। यदि चलने-फिरने में कठिनाई हो, तो संतुलन बढ़ाने वाले व्यायाम - जैसे हल्की स्ट्रेचिंग, कुर्सी से उठना-बैठना - सप्ताह में तीन दिन करने से गिरने का खतरा कम होता है।
भारत में 45 वर्ष और उससे ऊपर के लोगों में हृदय रोगों की स्थिति चिंताजनक है। Longitudinal Ageing Study in India (LASI) के डेटा से पता चला है कि इस उम्र वर्ग में हृदय रोगों की सेल्फ-रिपोर्टेड दर लगभग 5.2% है (महिलाओं में 4.6%, पुरुषों में 5.9%)। उसी अध्ययन में उच्च रक्तचाप (46.7%), मधुमेह (11.9%), उच्च कोलेस्ट्रॉल (2.3%) और शारीरिक निष्क्रियता (30.3%) जैसे जोखिम कारक सामने आए हैं।
ये सभी हृदय रोगों से जुड़े हैं - उदाहरण के लिए, उच्च रक्तचाप वाले बुजुर्गों में हृदय रोग का जोखिम महिलाओं में 2.6 गुना और पुरुषों में 1.88 गुना अधिक पाया गया।
LASI के एक अन्य विश्लेषण में पाया गया कि मधुमेह, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, पारिवारिक इतिहास, शराब सेवन और अवसाद जैसे कारक हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाते हैं, जिसमें मधुमेह का प्रभाव सबसे अधिक था। इसका मतलब है कि सिर्फ व्यायाम ही नहीं, बल्कि रक्त शर्करा, वजन और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है।
ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय की 2026 की गाइडलाइन बताती है कि 80 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों में रक्तचाप का लक्ष्य 150/90 mmHg से नीचे रखना चाहिए, जबकि सामान्य वयस्कों में यह 140/90 mmHg है।
लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे कम नमक (<5 ग्राम/दिन), स्वस्थ तेल, फल-सब्जी, मछली या ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ, रोजाना 30 मिनट शारीरिक गतिविधि और वजन नियंत्रण (BMI <23, कमर <90 सेमी पुरुषों में, <80 सेमी महिलाओं में) को प्राथमिकता दी जाती है। यदि जीवनशैली से पर्याप्त नियंत्रण नहीं होता, तो दवाओं का उपयोग—जैसे कैल्शियम चैनल ब्लॉकर (जैसे एम्लोडिपाइन), थियाजाइड डाइयुरेटिक, ACE इनहिबिटर या ARB—डॉक्टर की सलाह से किया जा सकता है।
ICMR की गाइड में बुजुर्गों के लिए आहार संबंधी सुझाव हैं - जैसे संतृप्त वसा कम करना, प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में लेना, और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अलसी, अखरोट, कैनोला तेल और कुछ मछलियां शामिल करना। ओमेगा-3 फैटी एसिड सूजन, हृदय संबंधी घटनाओं (जैसे अतालता, दिल का दौरा, कार्डियक मृत्यु), मधुमेह और मानसिक गिरावट को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
यदि कोई बुजुर्ग निम्नलिखित लक्षण महसूस करे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
ये संकेत हृदय या रक्तचाप से जुड़ी आपात स्थिति हो सकती है और तत्काल चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है।
बुजुर्गों के लिए दिल की सेहत में सुधार छोटे-छोटे कदमों से संभव है - जैसे हर दिन हल्की सैर, थाली में रंग-बिरंगी सब्जियां, नमक कम करना, और समय-समय पर रक्तचाप व शर्करा की जांच। परिवार और देखभाल करने वालों का सहयोग भी बहुत मायने रखता है।
यह लेख डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी नए व्यायाम, दवा या आहार योजना को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।