
दीपावली से पहले पटाखों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना रुख साफ कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से त्योहार मनाने वालों की भावनाएं आहत हो सकती हैं, जबकि दिनभर पटाखे फोड़ने की छूट बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों पर बुरा असर डालेगी। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पटाखे चलाने का समय तय किया जाएगा। यह भी बताया जाएगा कि कौन से पटाखे चल सकेंगे।
बुधवार की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने कहा- न हम पूर्ण प्रतिबंध के लिए सहमत हैं और न ही 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति देंगे। कोर्ट ने कहा कि समाधान ऐसा हो, जिसमें तय समय-सीमा हो और अनुमति वाले पटाखों की श्रेणी भी स्पष्ट हो।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि बेरियम वाले पटाखों की आउटडोर टेस्टिंग अभी बाकी है। इसके लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा गया है, अदालत ने यह समय दे दिया। भाटी के अनुसार, CSIR-नीरी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली, भोपाल, कोलकाता और चेन्नई में आउटडोर परीक्षण की सिफारिश की है, ताकि अलग-अलग वायु-गुणवत्ता में बेरियम वाले ग्रीन पटाखों का असर परखा जा सके। इससे पहले 2 सितंबर को अदालत ने नीरी को इस अध्ययन के लिए दो सप्ताह दिए थे।
सुनवाई का एक अहम पहलू जुड़े हुए पटाखों यानी "लड़ी" से जुड़ा है। लड़ी में कई पटाखे एक ही फ्यूज से जुड़े होते हैं और एक के बाद एक फूटते हैं। पीठ ने संकेत दिया कि वह शर्तों के साथ इसकी अनुमति देने के सुझाव को मानने की ओर झुकी है। सरकार की ओर से कहा गया कि सुरक्षा उपायों के साथ जुड़े पटाखों की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन बेरियम के इस्तेमाल का फैसला आउटडोर टेस्ट के नतीजों पर निर्भर करेगा।
2018 के मामले में अर्जुन गोपाल फैसले में केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति थी, बेरियम और लड़ी पर रोक थी, ई-कॉमर्स बिक्री प्रतिबंधित थी और दीपावली पर पटाखे फोड़ने का समय रात 8 से 10 बजे तक तय था। अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों की सीमित बिक्री और इस्तेमाल की छूट दी थी। उस आदेश में सुबह 6 से 7 और रात 8 से 10 बजे का समय तय था और लड़ी व ई-कॉमर्स पर रोक बरकरार रही। उस दौरान जस्टिस गवई ने कहा था कि पटाखों की तस्करी हो रही है, जो ग्रीन पटाखों से ज्यादा नुकसान करती है।
अदालत 15 अक्टूबर को सीपीसीबी और केंद्र की रिपोर्ट देखकर तय करेगी कि कौन-से पटाखे चलेंगे और किस समय। निर्माताओं की दलील है कि मंजूर फॉर्मूले वाले पटाखे दशहरा और दीपावली से पहले बनाने, बांटने और बेचने के लिए पर्याप्त समय चाहिए। सुनवाई में एक वकील ने यह भी कहा कि दीपावली के समय पराली जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है। यानी बहस अब पटाखों बनाम प्रदूषण की सीधी लड़ाई से आगे बढ़कर समय, किस्म और जांच-आधारित नियमों की ओर जा रही है।