
Free Trade Agreements Benefits: छोटे व्यापारियों और स्टार्टअप्स के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) नए अवसरों के द्वार खोलते हैं, लेकिन साथ ही चुनौतियां भी लाते हैं। भारत ने हाल के वर्षों में कई FTAs पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें यूके, यूरोपीय संघ (EU), न्यूजीलैंड, ओमान और अन्य शामिल हैं, जो MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। आइए देखें कि ये समझौते छोटे व्यवसायों पर कैसे असर डालते हैं और आप इन अवसरों का भरपूर लाभ कैसे उठा सकते हैं?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में हुए FTA के तहत भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड में 100% उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है। इसमें MSMEs और महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया है। यह समझौता अप्रैल 2026 में अंतिम रूप दिया गया था और अप्रैल के अंत में लागू हुआ।
इससे गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में MSME क्लस्टरों को लाभ मिलेगा- जैसे ज्वेलरी, फार्मा, हैंडिक्राफ्ट, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स आदि।
भारत-EU FTA जनवरी 2026 में लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद अंतिम रूप पाया। यह समझौता भारतीय MSMEs को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल होने, निर्यात विविधीकरण और उत्पादकता बढ़ाने का अवसर देता है। लेकिन इसके साथ ही, EU के कड़े पर्यावरणीय और सामाजिक नियमों (जैसे ESG रिपोर्टिंग, कार्बन फुटप्रिंट, डेटा सुरक्षा) का पालन करना MSMEs के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
1 जून 2026 को लागू हुए India–Oman CEPA के तहत ओमान की लगभग 98% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है। यह समझौता विशेष रूप से टेक्सटाइल, परिधान और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है। लेकिन एक बड़ी समस्या यह है कि केवल लगभग 25% योग्य SMEs ही इस समझौते का लाभ उठा पा रहे हैं। इसका कारण जागरूकता और अनुपालन संबंधी बाधाएं हैं।
DGFT (Directorate General of Foreign Trade) के अतिरिक्त निदेशक आर.के. मिश्रा के मुताबिक, सरकार FTAs के माध्यम से MSMEs को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए एक व्यापक समर्थन तंत्र तैयार कर रही है, जिसमें निर्यात क्रेडिट गारंटी और वित्तीय सहायता शामिल है। इसके अलावा, MSMEs के लिए विशेष योजनाएं जैसे मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस, पैकेजिंग प्रशिक्षण और डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
अधिकांश MSMEs FTAs का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें समझौते की शर्तों, नियमों और दस्तावेजीकरण की जानकारी नहीं है। CRIF-SIDBI के आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक छोटे व्यवसायों का कुल क्रेडिट एक्सपोजर 45.3 लाख करोड़ था, जो वर्ष-दर-वर्ष 19.3% बढ़ा। यह दर्शाता है कि वित्तीय पहुंच बढ़ रही है, लेकिन जागरूकता अभी भी कम है।
जानिए क्या हैं वे व्यावहारिक कदम, जिन्हें छोटे व्यवसाय अपना सकते हैं-
FTAs छोटे व्यापारियों के लिए नए बाजार खोलते हैं, लेकिन उनका लाभ उठाने के लिए जागरूकता, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता आवश्यक है। सरकार और संस्थाएं MSMEs को इन समझौतों से जोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं, लेकिन अब यह छोटे व्यापारियों की जिम्मेदारी है कि वे सक्रिय हों और इन अवसरों को अपने व्यवसाय की वृद्धि में बदलें।
यदि आप एक छोटे व्यापारी, स्टार्टअप या MSME संचालक हैं, तो FTAs को केवल एक समझौता न समझें, यह आपके व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर ले जाने का एक अवसर है। अगले कदम के रूप में, DGFT या संबंधित विभाग से संपर्क करें, समझौते की जानकारी प्राप्त करें, और अपने उत्पादों को नए बाजारों में ले जाने की तैयारी शुरू करें।