
प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI
खेती में मिट्टी की सेहत जानना अब केवल वैज्ञानिकों का काम नहीं रहा - यह किसानों के लिए सीधे तौर पर फसल की गुणवत्ता, लागत और आय से जुड़ा हुआ है। मिट्टी की जांच से किसान जान सकते हैं कि उनकी जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्व हैं, कौन से कम हैं, और किस प्रकार की खाद या सुधार की आवश्यकता है।
आइए जानते हैं कि किसान अपनी मिट्टी की सेहत कैसे जांच सकते हैं, इससे उन्हें क्या लाभ मिलते हैं, और इस पूरी प्रक्रिया में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
मिट्टी की जांच से पता चलता है कि उसमें pH (अम्लता या क्षारीयता), इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC, नमक की मात्रा), ऑर्गेनिक कार्बन (मिट्टी की उर्वरता का संकेत), और मुख्य पोषक तत्व - नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K) कितने हैं। विस्तृत जांच में सल्फर, कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे माध्यमिक पोषक तत्व तथा जिंक, आयरन, मैंगनीज, कॉपर, बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी शामिल होते हैं। यह जानकारी किसान को अनावश्यक रासायनिक खाद के खर्च से बचने और संतुलित पोषण देने में सहायक होती है।
सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना 19 फरवरी 2015 को शुरू हुई थी। इस योजना के तहत किसानों को उनकी जमीन की मिट्टी की स्थिति बताने वाला एक कार्ड दिया जाता है, जिसमें 12 प्रमुख पैरामीटरों की जानकारी होती है - pH, EC, ऑर्गेनिक कार्बन, N, P, K, सल्फर और सूक्ष्म पोषक तत्व (जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन)। कार्ड स्थानीय भाषा में मिलता है और इसमें खाद की मात्रा एवं प्रकार की सलाह भी दी जाती है।
कार्ड कितने अंतराल पर दोबारा जारी होता है, इस पर योजना के अलग-अलग चरणों और राज्यों में कुछ भिन्नता रही है - मूल डिज़ाइन में इसे हर दो वर्ष पर जारी करने का लक्ष्य रखा गया था, ताकि समय के साथ मिट्टी में आए बदलाव का पता चल सके। सटीक अंतराल अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या नजदीकी कृषि कार्यालय से जरूर पता कर लें।
मिट्टी की जांच के लिए नमूना लेने का तरीका सरल, किंतु सावधानीपूर्वक होना चाहिए:
गहरी जड़ वाली फसलों (जैसे गन्ना, अरहर, फलदार पेड़) के लिए 0–15 सेमी और 15–30 सेमी - दो अलग गहराई के नमूने लेना ज्यादा उपयोगी माना जाता है।
मिट्टी का नमूना सामान्यतः रबी या खरीफ फसल कटने के बाद, या जब खेत में फसल न हो, तब लेना बेहतर रहता है - बुवाई या रोपाई से लगभग एक महीने पहले। इससे रिपोर्ट के आधार पर समय रहते खाद और सुधार की योजना बनाई जा सकती है।
मिट्टी की जांच के लिए किसान अपने नजदीकी सरकारी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला (Soil Testing Laboratory - STL) या मोबाइल लैब का उपयोग कर सकते हैं। कई राज्यों में कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से जुड़े केंद्र भी यह सेवा प्रदान करते हैं। यह जांच सरकारी योजना के तहत नि:शुल्क या मामूली शुल्क पर उपलब्ध होती है - सटीक जानकारी के लिए स्थानीय कृषि कार्यालय से संपर्क करें।
जांच रिपोर्ट में मिट्टी के प्रत्येक पैरामीटर के लिए ‘कम’, ‘मध्यम’, ‘उच्च’ जैसी श्रेणियां होती हैं। pH सबसे पहले देखा जाता है, क्योंकि यह अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित करता है - अधिकतर फसलों के लिए 6.5–7.5 के बीच का pH सामान्य माना जाता है। उसके बाद ऑर्गेनिक कार्बन और फिर N, P, K की स्थिति समझी जाती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में रंग कोड (जैसे हरा, पीला, लाल) भी होते हैं, जो समझने में आसानी प्रदान करते हैं।
मिट्टी जांच से किसानों को संतुलित खाद का उपयोग करने में सहायता मिलती है, जिससे लागत कम होती है और फसल की पैदावार बढ़ती है। साथ ही, यह मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक होता है और अंधाधुंध रासायनिक खाद के इस्तेमाल को रोकता है।
मिट्टी जांच तभी उपयोगी होती है जब नमूना सही तरीके से लिया गया हो और रिपोर्ट समय पर प्राप्त हो। गलत नमूना लेने या लैब में देरी होने से रिपोर्ट का फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय के प्रशिक्षित कर्मचारियों से सहायता लेना बेहतर रहता है।
| कदम | विवरण |
|---|---|
| नमूना लेना | खेत में 8–10 स्थानों से 15–20 से.मी. गहराई तक मिट्टी लेना |
| मिश्रण | सभी नमूनों को मिलाकर आधा किलो मिट्टी तैयार करना |
| भेजना | कृषि कार्यालय या मोबाइल लैब में भेजना |
| रिपोर्ट पढ़ना | pH, EC, OC, NPK और अन्य पोषक तत्वों की स्थिति समझना |
| सलाह लेना | मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई खाद और सुधार की सलाह अपनाना |
मिट्टी की जांच करवाने के बाद अगला कदम है मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई सलाह के अनुसार खाद और जैविक सुधार अपनाना। समय-समय पर जांच दोहराते रहें, ताकि मिट्टी की सेहत पर नजर बनी रहे और जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधार किया जा सके।
मिट्टी की जांच केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि खेती की सफलता और मिट्टी की दीर्घकालिक सेहत का आधार है। इसे अपनाकर किसान न केवल अपनी फसल की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं, बल्कि मिट्टी को भी स्वस्थ रख सकते हैं।
Updated on:
24 Aug 2026 05:19 pm
Published on:
24 Aug 2026 05:19 pm
