
प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI
बारिश के मौसम में शरीर को पानी की जरूरत उतनी ही होती है, जितनी गर्मियों में। ठंडे और नम मौसम में प्यास का एहसास कम होता है, इसलिए अक्सर लोग पानी पीना भूल जाते हैं लेकिन यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आइए जानते हैं मानसून में सही तरीके से हाइड्रेटेड रहने का तरीका।
ठंडे मौसम में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर की पानी की जरूरत कम नहीं होती। पर्याप्त पानी न पीने से पाचन संबंधी समस्याएं (जैसे कब्ज, एसिडिटी), थकावट, सिरदर्द और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है, और लंबे समय में गुर्दे के कार्य पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में 2–3 लीटर तरल पदार्थ लें, और केवल प्यास लगने पर ही नहीं, बल्कि नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। यह मात्रा उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
मानसून में पानी दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे हैजा, टाइफाइड, पेचिश जैसी जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। इसलिए इस मौसम में हमेशा उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या भरोसेमंद पैक्ड पानी ही पीना चाहिए। उबालना पानी को शुद्ध करने का एक भरोसेमंद और सिद्ध तरीका है, क्योंकि यह बैक्टीरिया और वायरस दोनों को प्रभावी रूप से खत्म कर देता है।
RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्यूरीफायर आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और हानिकारक रसायनों को अच्छी तरह हटा देते हैं, बशर्ते फिल्टर की ठीक से सर्विसिंग होती रहे। हालांकि RO प्रक्रिया में पानी से कुछ जरूरी मिनरल्स भी निकल सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक सिर्फ RO पानी पर निर्भर रहने की बजाय संतुलित आहार से जरूरी पोषक तत्व (जैसे विटामिन B12, जो मुख्यतः मांस, अंडे, दूध जैसे खाद्य स्रोतों से मिलता है) पूरा करना बेहतर रहता है।
ठंडे मौसम में हर्बल चाय, सूप और गर्म पानी जैसे पेय ज्यादा आकर्षक लगते हैं और शरीर में पानी की कमी पूरा करने में मदद करते हैं। इसके अलावा संतरा, तरबूज, खीरा, नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी जैसे पानी से भरपूर फल और पेय भी हाइड्रेशन में योगदान देते हैं।
दस्त या उल्टी की स्थिति में शरीर से पानी के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं। ऐसे में ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट) इस कमी को पूरा करने में मदद करता है। WHO-मानक वाला ORS चुनें, जिसमें इलेक्ट्रोलाइट्स और ग्लूकोज का संतुलन सही हो और शक्कर की मात्रा कम हो। नारियल पानी जैसे प्राकृतिक स्रोत भी इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति में मददगार हैं।
बहुत ठंडे और फिजी ड्रिंक (जैसे सोडा) पाचन को धीमा कर सकते हैं। इनकी जगह गर्म या कमरे के तापमान का पानी, हर्बल चाय या नींबू पानी बेहतर विकल्प हैं।
सुबह के मूत्र का गहरा पीला रंग शरीर में पानी की कमी का एक आम संकेत हो सकता है—कोशिश करें कि यह हल्का पीला बना रहे। यह एक सामान्य संकेतक है, पर लगातार समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें।
| स्थिति / विकल्प | सुझाव और कारण |
|---|---|
| प्यास न लगना | नियमित अंतराल पर पानी पीएं, प्यास पर निर्भर न रहें |
| पानी की गुणवत्ता | उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या भरोसेमंद पैक्ड पानी ही पिएं |
| RO पानी | बैक्टीरिया-वायरस हटाने में कारगर, पर मिनरल्स की पूर्ति आहार से करें |
| गर्म पेय और फल | हर्बल चाय, सूप, नारियल पानी, तरबूज से हाइड्रेशन और पोषण दोनों मिलते हैं |
| इलेक्ट्रोलाइट्स | ORS या नारियल पानी से पूर्ति करें |
| ठंडे पेय से बचें | पाचन के लिए गर्म या कमरे के तापमान का पानी बेहतर |
| मात्रा और निगरानी | 2–3 लीटर तरल रोज, मूत्र का रंग हल्का पीला बनाए रखें |
मानसून में पानी की सही पसंद और नियमित सेवन से न केवल निर्जलीकरण से बचा जा सकता है, बल्कि पाचन, गुर्दे, मानसिक सतर्कता और रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बनी रहती है। परिवार में बच्चों और बुजुर्गों को भी यह आदत अपनाने में मदद करें—एक गिलास गर्म पानी, जरूरत पड़ने पर ORS, और भरोसेमंद पानी का स्रोत इस मौसम में सेहत का सबसे बड़ा साथी है।
Updated on:
24 Aug 2026 05:53 pm
Published on:
24 Aug 2026 05:53 pm
