
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
आज के समय में जल संकट और निवेश की संभावनाएं हर शहर एवं गांव के लिए अहम सवाल बन चुकी हैं। बढ़ती आबादी, तेजी से बढ़ता उद्योग और जलवायु परिवर्तन ने जल आपूर्ति और प्रबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है। जल संकट केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर भी है। समझदारी से निवेश करके आप न केवल अपने लिए लाभ प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी योगदान दे सकते हैं। ऐसे समय में समझदारी से निवेश करना पर्यावरण के साथ ही आम नागरिकों और निवेशकों के लिए लाभकारी हो सकता है।
भारत में जल प्रबंधन क्षेत्र में निवेश के कई विकल्प खुल रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले 10 वर्षों में जल और अपशिष्ट जल अवसंरचना में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश अवसर उपलब्ध होगा, क्योंकि 2030 तक जल की मांग लगभग दोगुनी हो सकती है। इसी तरह, CRISIL की रिपोर्ट बताती है कि FY20–24 में ₹3.95 लाख करोड़ का बाजार FY25–29 में ₹6.31–6.51 लाख करोड़ तक बढ़ सकता है। इन बड़े अवसरों के बीच, निवेश के कुछ प्रमुख रास्ते हैं-
CEEW की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पारंपरिक सार्वजनिक वित्त से आगे बढ़कर, PPP और HAM जैसे मॉडल अपनाए जाएं, साथ ही उपयोगकर्ता-आधारित निवेश मॉडल, पुन: उपयोग शुल्क और नवाचार तकनीकों को भी शामिल किया जाए।
शहरी जल अवसंरचना के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड्स का उपयोग बढ़ रहा है। हाल के वर्षों में 25 से अधिक बॉन्ड लेनदेन हुए हैं, जिनमें आमतौर पर ₹200 करोड़ तक की राशि जुटाई गई है। केंद्र सरकार ने बड़े बॉन्ड (₹2,000 करोड़ तक) के लिए प्रोत्साहन भी दिए हैं। साथ ही, ब्लू बॉन्ड्स, ग्रीन बॉन्ड्स और ESG-लिंक्ड वित्तीय साधन भी उभर रहे हैं।
कई बड़े संस्थान अब केवल पूंजी ही नहीं, बल्कि फाइनेंस प्लस मॉडल के तहत परियोजना संरचना, दीर्घकालिक संचालन-रखरखाव (O&M) और क्षमता निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं। KfW कंपनी का भारत में 1.57 अरब यूरो का पोर्टफोलियो और 900 मिलियन यूरो की पाइपलाइन है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत माइक्रो-इरिगेशन, SCADA‑IoT आधारित निगरानी जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। 9 अप्रैल 2025 को कैबिनेट ने M‑CADWM (कमांड एरिया डेवलपमेंट और जल प्रबंधन) पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें 23 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 32 क्लस्टर शामिल हैं। इस योजना का कुल बजट ₹1,600 करोड़ है, जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी ₹1,100 करोड़ और राज्यों की ₹500 करोड़ है; 2026–27 के बजट में ₹550 करोड़ का आवंटन है।
CEEW की रिपोर्ट बताती है कि भारत में उपयोग किए गए जल (TUW) के पुन: उपयोग में 2047 तक USD 8.35 अरब (लगभग ₹72,597 करोड़) का बाजार हो सकता है, और 100% उपचार के लिए ₹1.56–2.31 लाख करोड़ (USD 18–27 अरब) का निवेश आवश्यक होगा। इससे एक लाख से अधिक नौकरियां भी सृजित हो सकती हैं।
Updated on:
24 Aug 2026 05:14 pm
Published on:
24 Aug 2026 05:14 pm
