
ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रही दुनिया के लिए G-7 समूह ने आपात कदम उठाया है। G-7 देशों ने 4 महीनों में अपने भंडार से 10 करोड़ बैरल डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यालय से जारी साझा बयान के अनुसार, रिलीज तुरंत शुरू होगी और पहले 20 दिनों में डीजल की बड़ी खेप जारी की जाएगी। समन्वय अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) करेगी।
इमरजेंसी तेल भंडार खोलने का यह फैसला अमेरिकी दबाव का नतीजा माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन पूरे हफ्ते यूरोप पर कीमतें घटाने का दबाव बना रहा था। मैक्रों की ट्रंप से बातचीत के बाद G-7 नेताओं की वीडियो कॉन्फ्रेंस बुलाई गई। ट्रंप ने बाद में कहा कि यूरोप अपने भारी भंडार से "भारी मात्रा" में डीजल जारी करने पर राजी हुआ है।
IEA ने मार्च में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद 40 करोड़ बैरल तेल की रिलीज तय की थी, जिसका करीब दो-तिहाई अब तक जारी हो चुका है। G-7 बयान से संकेत मिलता है कि नई खेप मार्च की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद करेगी। इसलिए G-7 समूह द्वारा जारी किया जाने वाला तेल नया फैसला नहीं है। यह पूर्व में लिए गए एक निर्णय का अगला कदम होगा।
इमरजेंसी भंडार में से 100 मिलियन बैरल तेल जारी होने से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, तेल की यह मात्रा वैश्विक संदर्भ में काफी कम है। इसलिए इसका बहुत ज्यादा असर नहीं होगा। 100 मिलियन बैरल तेल को 4 महीनों में बराबर बांटें तो यह रोजाना करीब 8.3 लाख बैरल बैठता है। यह दुनिया की कुल खपत के मुकाबले छोटी राशि है।
होर्मुज स्ट्रेट में वर्तमान में भारी सुरक्षा संकट और तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बहाल करने के लिए तेल और गैस (LNG) की आवाजाही में तेजी से रिकवरी दर्ज की जा रही है. मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईरान के दांव-पेच के बीच, सितंबर 2026 से अब तक ब्रिटिश नौसेना (UKMTO) ने इस मार्ग से गुजरने वाले कम से कम 13 तेल टैंकरों पर मिसाइल हमलों की घटनाएं दर्ज की हैं।
हाल ही में, कुवैत के कच्चे तेल से भरे टैंकर 'एमटी काजिमाह III' पर भी मिसाइल हमला हुआ, जिसमें सवार भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचाया गया। इन हमलों के कारण सुरक्षा जोखिम अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे कई जहाजों को अपने ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद करके या सैन्य सुरक्षा के साये में यह संकीर्ण जलमार्ग पार करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, ईरान इस मार्ग पर अपने पूर्ण नियंत्रण का दावा कर रहा है और प्रतिबंध हटाने की शर्त पर ही इसे पूरी तरह सामान्य करने की पेशकश कर रहा है।
सुरक्षा संकट का वैश्विक तेल आयात और आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा प्रभाव पड़ा है, हालांकि हालिया हफ्तों में बाजार ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। फरवरी 2026 में तनाव शुरू होने के बाद यहाँ से तेल का ट्रैफिक लगभग ठप हो गया था, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में बाधा आई थी। हालांकि, सितंबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल का निर्यात सुधरकर 16.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है, जो युद्ध-पूर्व स्तर का लगभग 80% है।
राहत की बात यह भी है कि सितंबर में होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) कार्गो की संख्या अपने सबसे ऊंचे मासिक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे भारत और एशिया के अन्य आयातक देशों को बड़ी राहत मिली है। इसके बावजूद, लंबे समय तक चलने वाला यह तनाव आयातकों को अधिक बीमा प्रीमियम चुकाने और सुरक्षा चिंताओं के कारण खाड़ी देशों से इतर वैकल्पिक समुद्री मार्गों की तलाश करने के लिए मजबूर कर रहा है।