
सांकेतिक इमेज (सोर्स-chatgpt)
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के समर्थन में अल-कायदा इन द सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के आने से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पाकिस्तान पहले से ही TTP, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है, लेकिन इस बार इसका केंद्र अफगानिस्तान के बजाय पाकिस्तान बन गया है।
AQIS अब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में किसी अभियान को अंजाम देने से दूर रहा था और पर्दे के पीछे से घटनाक्रम पर नजर रख रहा था। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान द्वारा टीटीपी और बीएलए के खिलाफ इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) को इस्तेमाल करने की कोशिश के बाद AQIS ने भी इस संघर्ष में उतरने का फैसला किया। एक अधिकारी के अनुसार, AQIS के कई सदस्य पाकिस्तान में मौजूद हैं।
अमेरिका की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में अफगानिस्तान से बाहर किए जाने के बाद ये सदस्य पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में फैल गए थे। पिछले कई वर्षों से एक्यूआईएस का मुख्य फोकस डिजिटल प्रचार और नए सदस्यों की भर्ती पर रहा है। अधिकारी का कहना है कि लंबे अंतराल के बाद संगठन ने अब प्रत्यक्ष रूप से इस संघर्ष में शामिल होकर पाकिस्तानी प्रतिष्ठान को चुनौती देने का फैसला किया है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि एक्यूआईएस अपने संदेश और प्रचार सामग्री अपने मीडिया विंग अल-सहाब मीडिया फाउंडेशन के जरिए जारी करता है। हाल के दिनों में इस मंच से पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के खिलाफ टीटीपी के अभियानों का खुलकर समर्थन किया गया है। साथ ही एक्यूआईएस के सदस्यों से टीटीपी के साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है।
एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति पहले ही काफी चुनौतीपूर्ण है। टीटीपी के हमलों से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं बीएलए और बीएलएफ जैसे संगठनों ने भी पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाया है। अधिकारी के मुताबिक, बीएलएफ ने हाल में दावा किया कि उसके महिला दस्ते ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ अपना पहला हमला किया। बीएलए का भी एक महिला विंग है और खुफिया आकलनों में इसे एक खतरनाक इकाई बताया गया है।
टीटीपी, बीएलए और बीएलएफ के हमलों से नुकसान उठाने के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा और आईएसकेपी को भी अपने साथ जोड़ने का फैसला किया। इससे पाकिस्तान की पहले से जटिल सुरक्षा स्थिति और उलझ गई। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि पाकिस्तान अपने हितों के लिए प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों को साथ लेने को तैयार है।
क्षेत्र में पकड़ और विस्तार के मामले में एक्यूआईएस की गति आईएसकेपी की तुलना में धीमी रही है। बताया जाता है कि एक्यूआईएस के कैडर लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाने की मांग कर रहे थे और शीर्ष नेतृत्व को संदेश दे रहे थे कि वे अब केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहते। आईएसकेपी के संघर्ष में उतरने के बाद एक्यूआईएस के शीर्ष नेतृत्व के रुख में बदलाव आया और संगठन के सदस्यों को सक्रिय होने की अनुमति दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले कई महीनों से अल-कायदा की प्रचार पत्रिकाओं में टीटीपी को केवल नैतिक समर्थन दिया जा रहा था। अब स्थिति बदल गई है और एक्यूआईएस के सदस्य टीटीपी के पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, लश्कर और आईएसकेपी के खिलाफ अभियानों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। एक्यूआईएस के इस कदम से टीटीपी को भी फायदा मिलने की बात कही जा रही है।
हालांकि क्षेत्र में एक्यूआईएस कमजोर हुआ है, लेकिन उसके पास लॉजिस्टिक्स और प्रशिक्षण का अनुभव मौजूद है। अल-कायदा ने ओसामा बिन लादेन के दौर से ही प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स से संबंधित कई मैनुअल तैयार किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, टीटीपी को इस विशेषज्ञता का लाभ मिल सकता है और नए सदस्यों को युद्धक्षेत्र में भेजे जाने से पहले एक्यूआईएस द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने की बात सामने आई है।
पाकिस्तान के लिए AQIS की सक्रिय एंट्री एक अप्रत्याशित चुनौती के रूप में देखी जा रही है। एक अधिकारी के अनुसार, इस्लामाबाद को उम्मीद रही होगी कि एक्यूआईएस इस संघर्ष से दूर रहेगा, लेकिन अब उसके सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने से पाकिस्तान के सामने स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
Updated on:
02 Oct 2026 08:37 pm
Published on:
02 Oct 2026 08:37 pm
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