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चार हफ्ते की डाइट में जवान हो गए बुजुर्ग: वैज्ञानिक रिसर्च में चौंकाने वाला रिजल्ट, जानिए कहां हुई शोध?

ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण खोज की है। शोधकर्ताओं ने ऐसी डाइट खोजने का दावा किया है, जो सिर्फ 4 हफ्तों में शरीर की जैविक उम्र (बायोलॉजिकल एज) घटा सकती है।
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भारत

•

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Vinay Shakya

•

Oct 03, 2026

Benefits of changing diet

सांकेतिक इमेज (सोर्स-chatgpt)

क्या सिर्फ एक महीने में खानपान बदलकर उम्र घटाई जा सकती है? ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय का एक अध्ययन इसी ओर इशारा करता है। शोध के मुताबिक, 65 से 75 साल के लोगों को सिर्फ 4 हफ्ते खास आहार योजना पर रखने के बाद उनकी बायोमार्कर-आधारित 'जैविक उम्र' में कमी दिखी। हालांकि, शोधकर्ता खुद इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं, बल्कि शुरुआती संकेत मान रहे हैं।

यह अध्यन किसने और कब किया?

सोशल मीडिया और कुछ अन्य वेबसाइटों पर यह खबर नई शोध पर आधारित बताई जा रही है। हालांकि, इसकी शोध करने वाले ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय ने इसकी जानकारी 12 मई 2026 को सार्वजनिक की थी। इस अध्ययन की अगुआई डॉ. कैटलिन एंड्रयूज (Caitlin Andrews) ने की। वे चार्ल्स पर्किन्स सेंटर और स्कूल ऑफ लाइफ एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज से जुड़ी हैं।

कैसे हुई शोध?

'न्यूट्रिशन फॉर हेल्दी लिविंग' अध्ययन में 104 प्रतिभागियों को 4 में से किसी एक डाइट पर बेतरतीब ढंग से बांटा गया। हर डाइट में ऊर्जा का 14 प्रतिशत प्रोटीन से आता था। दो डाइट ऑम्नीवोरस यानी मिश्रित थीं, जिनमें आधा प्रोटीन पशु स्रोतों से और बाकी पौधों से था। दो डाइट सेमी-वेजिटेरियन थीं, जिनमें 70 प्रतिशत प्रोटीन पौधों से आता था। यानी सेमी-वेज का मतलब पूरी तरह शाकाहारी नहीं, बल्कि मांस की मात्रा काफी कम होना है।

इसके बाद दोनों श्रेणियों में एक डाइट- ज्यादा वसा वाली और दूसरी- ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली रखी गई। जैविक उम्र आंकने के लिए 20 बायोमार्कर जोड़े गए, जिनमें कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन और सी-रिएक्टिव प्रोटीन का रक्त स्तर शामिल है। जैविक उम्र का मतलब है कि शरीर की सेहत के संकेतक कितनी उम्र के व्यक्ति जैसे दिख रहे हैं, न कि उसने कितने साल जिए हैं।

शोध का क्या परिणाम आया?

डाइट पर आधारित इस शोध के नतीजे दिलचस्प रहे। OHF यानी ज्यादा वसा वाली मिश्रित डाइट, जो प्रतिभागियों की पहले की आदतों के सबसे करीब थी, उनमें जैविक उम्र में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। बाकी 3 समूहों के लोगों में जैविक उम्र में कमी दर्ज हुई। इनमें सबसे भरोसेमंद सांख्यिकीय नतीजा OHC यानी ज्यादा कार्ब वाली मिश्रित डाइट का रहा, जिसमें 14% प्रोटीन, 28-29% वसा और 53% कार्बोहाइड्रेट था। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये बदलाव इस पुराने साक्ष्य से मेल खाते हैं कि जटिल कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट उम्र और मेटाबॉलिक सेहत के लिए अच्छी होती है।

क्या प्रतिभागियों का वजन कम हुआ?

कई सोशल मीडिया सोर्स और वेबसाइट पर दावा किया गया कि शोध में शामिल लोगों का वजन कम हुआ। हालांकि, विश्वविद्यालय द्वारा जारी रिलीज में इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। इसलिए वजन कम होने वाली बात पूरी तरह सच नहीं है। वजन घटने वाली बात अनुमान के आधार पर लिखी गई है।

शोध अध्यन की सीमाएं

अध्ययन की कई सीमाएं हैं। अध्यन में शामिल सभी प्रतिभागी गैर-धूम्रपान करने वाले, गैर-शाकाहारी थे। प्रतिभागियों को टाइप-2 डायबिटीज, कैंसर, किडनी या लिवर रोग जैसी गंभीर समस्याएं नहीं थीं। इसका मतलब है कि शोध के नतीजे सभी बुजुर्गों पर सीधे लागू नहीं होते हैं। मीडिया रिपोर्टों ने भी ध्यान दिलाया कि प्रतिभागियों की संख्या कम थी और परीक्षण सिर्फ 4 हफ्ते चला। सबसे खास बात है कि डाइट का असर टिकाऊ है या नहीं? अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

अध्यन की निगरानी करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर एलिस्टेयर सीनियर का कहना है कि बीमारी के जोखिम पर असर परखने के लिए लंबे समय के अध्ययन जरूरी हैं। डॉ. एंड्रयूज के शब्दों में, यह कहना अभी जल्दबाजी है कि कोई खास बदलाव उम्र बढ़ाएगा, पर यह जीवन के आगे के चरण में डाइट बदलने के फायदों का शुरुआती संकेत है।

भारतीय नागरिकों के लिए अध्यन के क्या मायने हैं?

यह अध्ययन ऑस्ट्रेलियाई आबादी पर हुआ है। इसलिए भारतीय खानपान पर इसे सीधे लागू करना ठीक नहीं। हालांकि, इसका सार पारंपरिक सलाह से मेल खाता है। साबुत अनाज, दाल, फल-सब्जियां और कम प्रसंस्कृत भोजन लाभकारी बताए गए हैं। अध्ययन के निष्कर्ष में भी जटिल कार्बोहाइड्रेट और पौधों पर आधारित घटकों से भरपूर डाइट को सबसे ज्यादा लाभकारी बताया गया। डायबिटीज, किडनी रोग या दवाओं पर चल रहे बुजुर्गों को डाइट बदलने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि इस अध्ययन में ऐसे मरीज शामिल ही नहीं थे।