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स्पाइसजेट पर सरकार की पैनी नजर: एयरलाइन के परिचालन और वित्तीय समीक्षा के लिए DGCA ने दिए निर्देश, अब ECLGS से उम्मीद

नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) स्पाइसजेट एयरलाइनंस पर कड़ी नजर रख रहा है। DGCA ने एयरलाइन के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन दोनों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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Sep 22, 2026
DGCA action on spiceJet airline
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) बजट एयरलाइन स्पाइसजेट की वित्तीय और परिचालन स्थिति पर लगातार करीबी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में यात्री सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि डीजीसीए को एयरलाइन के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन दोनों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो सके।

कितनी गंभीर है एयरलाइन की स्थिति?

सूत्रों के मुताबिक स्पाइसजेट गंभीर वित्तीय दबाव से गुजर रही है और कंपनी में मई महीने से ही कई कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। विमान ट्रैकिंग वेबसाइट प्लेनस्पॉटर्स डॉट नेट के अनुसार एयरलाइन के पास फिलहाल परिचालन में केवल 11 विमान बचे हैं। घरेलू बाजार हिस्सेदारी भी लगातार गिर रही है। फरवरी 2026 में यह 3.9 प्रतिशत थी, जो जून में 1.9 प्रतिशत और जुलाई में घटकर मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई। 10 सितंबर को जिस दिन नायडू ने यह बयान दिया, उसी दिन स्पाइसजेट के शेयर 5.32 प्रतिशत गिरकर 8.89 रुपए पर बंद हुए थे।

हालांकि एयरलाइन ने क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम भी उठाए हैं। कंपनी ने 3 सितंबर को स्पाइसजेट ने तीन विमान परिचालकों के साथ 20 विमानों (15 बोइंग और 5 एयरबस) को डैम्प व वेट लीज पर लेने के लिए करार अंतिम किया, ताकि विंटर शेड्यूल के दौरान परिचालन क्षमता बढ़ाई जा सके। वहीं, दूसरी तरफ केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राम मोहन नायडू पिछले कुछ हफ्तों से लगातार अपना रुख सख्त बनाए हुए हैं।

एयरलाइन को ECLGS से उम्मीद

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 को 6 मई 2026 को मंजूरी दी थी। यह योजना पश्चिम एशिया में जारी तनाव, बढ़ती एटीएफ कीमतों और एयरस्पेस बाधाओं से जूझ रहे विमानन क्षेत्र सहित अन्य दबावग्रस्त क्षेत्रों को राहत देने के लिए लाई गई थी। योजना का कुल परिव्यय 18,100 करोड़ रुपए है, जिससे पात्र क्षेत्रों में 2.55 लाख करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसमें से विशेष रूप से विमानन क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपए आरक्षित रखे गए हैं।

इस योजना के तहत एयरलाइनों को प्रति उधारकर्ता अधिकतम 1,000 करोड़ रुपए तक का कर्ज मिल सकता है, और बराबर की इक्विटी डाली जाए तो अतिरिक्त 500 करोड़ रुपए तक भी मिल सकते हैं। यानी एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी शीर्ष एयरलाइनों को प्रत्येक को अधिकतम 1,500 करोड़ रुपए तक मिलने का अनुमान है।

कर्ज की अवधि सात साल तक होगी, जिसमें दो साल की मोहलत अवधि (मोरेटोरियम) शामिल है और गैर-एमएसएमई/एयरलाइनों के लिए 90 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी दी जाएगी। सरकार के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की ऊंची कीमतें, हवाई क्षेत्र संबंधी प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कमी जैसी वजहों से पूरा विमानन उद्योग दबाव में है, जिसका असर स्पाइसजेट पर भी पड़ा है।

Updated on:
22 Sept 2026 08:09 pm
Published on:
22 Sept 2026 08:09 pm