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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: वित्त वर्ष 2026-27 में GDP वृद्धि 6.7 फीसदी रहने की उम्मीद

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP में 6.7% ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 22, 2026

india gdp expected growth (1)

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

विश्व आर्थिक मंच यानी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.7 प्रतिशत की अनुमानित GDP वृद्धि के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत विकास संभावनाओं वाला देश बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।

10 प्रमुख क्षेत्रों के आकलन के बाद तैयार हुई रिपोर्ट

सितंबर 2026 की इस रिपोर्ट में अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन, मध्य पूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका, मध्य एशिया और सब-सहारा अफ्रीका सहित 10 प्रमुख क्षेत्रों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के 92 मुख्य अर्थशास्त्रियों से राय ली गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 74 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्री भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि मई में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत था। वहीं 98 प्रतिशत विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारत की वृद्धि दर कम से कम मध्यम या उससे बेहतर रहेगी। रोजगार के मामले पर रिपोर्ट में कहा गया है कि 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले एक वर्ष में बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखाई देता। हालांकि 17 प्रतिशत विशेषज्ञों को बेरोजगारी बढ़ने और 13 प्रतिशत को इसमें कमी आने की उम्मीद है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की बेरोजगारी दर जुलाई के 5.1 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 5 प्रतिशत पर आ गई। इसी अवधि में श्रम बल भागीदारी दर 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह संकेत देता है कि मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बीच श्रम बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, हालांकि रोजगार सृजन की गति बनाए रखना अभी भी महत्वपूर्ण है।

महंगाई के मोर्चे पर भी स्थिति कुछ बेहतर हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मई की तुलना में मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। 55 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले 12 महीनों में मध्यम महंगाई की उम्मीद है, जबकि 45 प्रतिशत उच्च महंगाई की संभावना जता रहे हैं। मई में 61 प्रतिशत विशेषज्ञ उच्च या बहुत उच्च महंगाई की आशंका जता रहे थे।

अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई बढ़कर 4.8 प्रतिशत रही। यह आरबीआई के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन अभी भी 2-6 प्रतिशत के स्वीकार्य दायरे के भीतर बनी हुई है। मौद्रिक नीति को लेकर 67 प्रतिशत विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, जबकि 24 प्रतिशत नीति को और सख्त किए जाने की संभावना देख रहे हैं। अगस्त में भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखी थी और तटस्थ रुख बनाए रखा था।

राजकोषीय नीति के संदर्भ में भी अधिकांश विशेषज्ञ स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। 72 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि राजकोषीय नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, जबकि 22 प्रतिशत कुछ नरम रुख की संभावना देख रहे हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि सर्वेक्षण 20 अगस्त को पूरा हुआ था, यानी इससे पहले 31 अगस्त को पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए गए, जिनमें भारत की आर्थिक वृद्धि 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

इस मजबूत प्रदर्शन के बाद कई वैश्विक संस्थानों ने भारत के विकास अनुमान बढ़ाए हैं। उदाहरण के तौर पर, मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है।