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भारत को गहरे पानी में मिला खजाना: ONGC ने गहरे समुद्र में खोजा प्राकृतिक गैस भंडार, ऊर्जा सुरक्षा को मिली मजबूती

ओडिशा तट के पास गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस का भंडार मिला है। भारत की पब्लिक सेक्टर की तेल और गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) ने इसकी पुष्टि की है। यह प्राकृतिक गैस का भंडार ओडिशा के कोणार्क तट से करीब 43 किलोमीटर दूर मिला है।
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भारत

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Vinay Shakya

Sep 22, 2026

natural reserves gas found in sea

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) ने ओडिशा तट के पास महानदी ऑफशोर बेसिन में गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस का महत्वपूर्ण भंडार खोजा है। कंपनी के आधिकारिक बयान और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह खोज 18 सितंबर 2026 को कुएं MN-DW18-1-H-D (जिसे MDW-28 भी कहा जाता है) में हुई। यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन’ ऑफशोर अन्वेषण पहल के तहत महानदी बेसिन में ड्रिल किया गया पहला कुआं है।

गहरे समुद्र में मिला कुआं

ONGC के मुताबिक, यह कुआं ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क तट से करीब 43 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे 1,623 मीटर की लक्ष्य गहराई तक ड्रिल किया गया और 1,441 से 1,452 मीटर के अंतराल में गैस का भंडार मिला। कुएं से पिछले तीन दिनों से गैस निरंतर बह रही है और जलाशय का दबाव स्वस्थ बना हुआ है, जो सकारात्मक संकेत देता है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अभी तक वसूली योग्य भंडार की मात्रा या व्यावसायिक उत्पादन की पुष्टि नहीं की गई है। आगे के मूल्यांकन, रिजर्व आकलन और वाणिज्यिक व्यवहार्यता जांच के बाद ही विकास संबंधी फैसला लिया जाएगा।

यह खोज समुद्र मंथन अभियान के तहत एक मील का पत्थर मानी जा रही है। जुलाई 2026 में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली से वर्चुअली इस कुएं की खुदाई (स्पडिंग) शुरू की थी। 25 जुलाई को ड्रिलशिप प्लेटिनम एक्सप्लोरर पर काम शुरू हुआ। अगस्त में ONGC के चेयरमैन एवं सीईओ अरुण कुमार सिंह, डायरेक्टर (टेक्नोलॉजी एंड फील्ड सर्विसेज) विक्रम सक्सेना और डायरेक्टर (एक्सप्लोरेशन) ओ.पी. सिन्हा ने ड्रिलशिप का दौरा कर टीम को प्रोत्साहित किया था।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी जानकारी

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज का स्वागत करते हुए कहा कि ONGC समुद्र मंथन पहल के तहत भारत के डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर क्षेत्रों में नए घरेलू ऊर्जा स्रोतों को अनलॉक करना जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि यह खोज अन्य खोजों के साथ मिलकर PNG रूल्स 2025 के तहत साझा सुविधाओं के जरिए क्लस्टर डेवलपमेंट की संभावना खोलती है, जिससे गहरे समुद्र के संसाधनों को तेजी से उत्पादन में लाया जा सकता है।

महानदी ऑफशोर बेसिन ओडिशा तट के साथ एक महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन खोज क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। ONGC ने 2024 में इसी बेसिन में उत्कल (Utkal) और कोणार्क (Konark) खोजें की थीं, जिन्होंने बेसिन की संभावनाओं को मजबूत किया। नई खोज इनसे करीब 23 नॉटिकल मील दूर है और पानी की गहराई लगभग 770 मीटर बताई गई है। तट के नजदीक होने के कारण, यदि व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित हुई तो जल्दी मोनेटाइजेशन की संभावना बढ़ जाती है।

समुद्र मंथन पहल और उद्देश्य

समुद्र मंथन पहल को जुलाई 2026 में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इसमें वित्त वर्ष 2030-31 तक ₹84,084 करोड़ का आवंटन है। योजना के तहत डीपवाटर अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग, भूकंप संबंधी डेटा अधिग्रहण, साझा ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर है। इसका लक्ष्य घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करना है। भारत वर्तमान में अपनी गैस जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है।

ONGC ने कहा कि यह खोज कंपनी के गहरे पानी अन्वेषण कार्यक्रम को मजबूत करती है और भारत के स्वदेशी हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार को बढ़ाने के प्रयासों में योगदान देती है। विभिन्न समाचार स्रोतों जैसे बिजनेस स्टैंडर्ड, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे और द ट्रिब्यून की रिपोर्ट्स में भी इन तथ्यों की पुष्टि हुई है। कंपनी के आधिकारिक बयान में जोर दिया गया है कि आगे की जांच से गैस जमा का आकार, गुणवत्ता और व्यावसायिक लाभ का पता चलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, महानदी बेसिन में सफल खोजें भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि मूल्यांकन सकारात्मक रहा तो यह खोज न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाएगी बल्कि आयात बिल को भी कम करने में मदद करेगी। ONGC की टीम आगे के परीक्षण और मूल्यांकन पर काम कर रही है। यह विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और ऊर्जा सुरक्षा के विजन को मजबूत करता है।