
घर बनाने वालों को झटका लग सकता है। एमके (Emkay) रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सीमेंट कंपनियां 12 अक्टूबर से कीमतों में ₹10 से ₹15 प्रति बोरी तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यस्त सीजन, अनुकूल मांग-आपूर्ति स्थिति और चैनल चेक के आधार पर इस बढ़ोतरी की उच्च संभावना है। यानी यह अभी अनुमान है, कंपनियों की ओर से जारी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार बिजली और ईंधन की बढ़ती लागत पिछले 6-7 महीनों से उद्योग की सबसे बड़ी परेशानी है। जुलाई 2026 में थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन लागत फिर ऊंची हो गई। पहली तिमाही में कंपनियों ने ₹10-15 प्रति बोरी की बढ़ोतरी की थी, जो बिजली-ईंधन की महंगाई की भरपाई के लिए काफी नहीं रही। जुलाई-अगस्त में मानसून के कारण कीमतें फिर नरम पड़ीं और घाटा बढ़ गया।
रिपोर्ट का आकलन है कि ₹300-400 प्रति टन की लागत वृद्धि को संतुलित करने के लिए उद्योग को करीब ₹10 प्रति बोरी (लगभग 3 प्रतिशत) की टिकाऊ बढ़ोतरी चाहिए। इसीलिए अक्टूबर की दाम वृद्धि को "अहम" बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ईंधन के साथ पैकिंग सामग्री की कीमतें भी दबाव बढ़ा रही हैं।
कई मीडिया स्रोत भी इसी दिशा में इशारा करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सितंबर में औसतन करीब ₹7 प्रति बोरी की मामूली रिकवरी दिखी थी, जबकि दक्षिण भारत में हाल के हफ्तों में लगभग ₹11 प्रति बोरी का उछाल दर्ज हुआ। यानी असर हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होगा। रिपोर्ट में चेतावनी है कि डीलरों का प्रतिरोध और मौसमी मांग इस बढ़ोतरी के टिकने में जोखिम हैं।
लागत बढ़ने के बावजूद मांग कमजोर नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक नॉन-ट्रेड सेगमेंट के सहारे वॉल्यूम में स्थिर वृद्धि दिख रही है। सरकारी बुनियादी ढांचा खर्च और मौसमी मांग भी उद्योग को सहारा दे रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्षमता विस्तार की योजनाओं में देरी से वित्त वर्ष 2028 तक क्लिंकर उपयोग दर करीब 79 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे बाजार का संतुलन बना रहेगा।
अगर औसत बोरी ₹350-400 के आसपास मानें तो ₹10-15 की बढ़ोतरी करीब 3-4 प्रतिशत का इजाफा होगी। एक सामान्य घर में सैकड़ों बोरी सीमेंट लगती है। इसलिए निर्माण लागत में अतिरिक्त बोझ आ सकता है।