
Education scholarship for labour child India: देश में लाखों परिवार ऐसे हैं जिनकी रोजी-रोटी मेहनत-मजदूरी पर टिकी है। ऐसे परिवारों के लिए बच्चे की पढ़ाई का खर्च केवल स्कूल फीस तक सीमित नहीं होता। किताबें, यूनिफॉर्म, कॉपी, कॉलेज की फीस और उच्च शिक्षा का खर्च बढ़ने के साथ परिवार पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता जाता है।
इसी बोझ को कुछ कम करने के लिए केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की एक ऐसी योजना है, जिसके बारे में बहुत कम परिवारों को पूरी जानकारी है। इसके तहत बीड़ी, सिनेमा और कुछ गैर-कोयला खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के लिए सालाना आर्थिक सहायता दी जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि सहायता कक्षा और पाठ्यक्रम के अनुसार अलग-अलग है। कक्षा 1 से शुरू होने वाली यह मदद उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों में पहुंचने पर 25 हजार रुपए सालाना तक हो सकती है।
योजना का नाम सुनकर यह मान लेना गलत होगा कि देश में किसी भी मजदूर के बच्चे को यह छात्रवृत्ति मिल जाएगी। यह सहायता विशेष रूप से बीड़ी श्रमिकों, सिनेमा श्रमिकों तथा लौह अयस्क, मैंगनीज, क्रोम अयस्क, चूना पत्थर, डोलोमाइट और अभ्रक खदानों से जुड़े पात्र श्रमिकों के बच्चों के लिए है। मंत्रालय के दस्तावेजों में इन श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा सहायता देने की बात कही गई है।
यानी इस योजना को आम तौर पर 'मजदूर छात्रवृत्ति' कहने के बजाय संबंधित श्रमिक श्रेणी के बच्चों की शिक्षा सहायता के रूप में समझना ज्यादा सही है। इसमें कुछ खनन क्षेत्रों में काम करने वाले संविदा श्रमिक भी शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे योजना की निर्धारित शर्तें पूरी करते हों।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि इन बच्चों की पढ़ाई पर सरकार कितनी राशि सहायता के रूप में देती है? 2026-27 के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यहां समझिए सहायता राशि का गणित
इसका मतलब साफ है कि 25 हजार हर बच्चे को नहीं मिलते। यह अधिकतम सहायता है और पात्र पेशेवर पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए है। मसलन, अगर किसी पात्र श्रमिक का बच्चा कक्षा 3 में पढ़ रहा है तो सहायता 1,000 रुपए सालाना होगी। वहीं वही बच्चा आगे चलकर किसी पात्र पेशेवर पाठ्यक्रम में पहुंचता है तो सहायता 25 हजार रुपए सालाना तक हो सकती है।
यह बात परिवारों को खास तौर पर समझनी चाहिए। सरकार की ओर से दी जाने वाली रकम को बच्चे की पढ़ाई के पूरे खर्च की भरपाई नहीं माना जा सकता। यह वित्तीय सहायता है, जो पढ़ाई से जुड़े खर्च का कुछ हिस्सा कम करने में मदद करती है। सरकारी दस्तावेज में कक्षा 1 से 4 के लिए सहायता को ड्रेस और किताबों जैसी जरूरतों से भी जोड़ा गया है। उच्च कक्षाओं में राशि बढ़ती जाती है और पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए सबसे ज्यादा सहायता निर्धारित है। यानी योजना का असली महत्व उस परिवार के लिए है जहां छोटी रकम भी किताब, ड्रेस, फीस या पढ़ाई से जुड़ी दूसरी जरूरत में काम आ सकती है।
यह खबर अभी इसलिए भी महत्वपूर्ण जाती है क्योंकि, शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की 10 जून 2026 की आधिकारिक सूचना के मुताबिक आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे हैं। पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 और उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 31 अक्टूबर 2026 है। आवेदन से पहले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर एक बार पंजीकरण करना होगा। यानी इस समय पात्र परिवारों के लिए यह सिर्फ जानकारी भर नहीं है, बल्कि आवेदन करने का वास्तविक अवसर है।
इस योजना की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचाई जाती है। इससे योजना का उद्देश्य सीधे विद्यार्थी तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है।
यही वजह है कि आवेदन करते समय विद्यार्थी और परिवार को बैंक खाते तथा पहचान से जुड़ी जानकारी सावधानी से भरनी चाहिए। गलत जानकारी या दस्तावेजों में अंतर होने पर आवेदन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
यह केवल आवेदन करके पैसे पाने वाली योजना नहीं है। छात्र को योजना की शर्तों के अनुसार पढ़ाई जारी रखनी होती है। मंत्रालय के योजना दस्तावेज के अनुसार गलत जानकारी देकर छात्रवृत्ति लेना, पढ़ाई छोड़ देना या निर्धारित शर्तों के विपरीत पाठ्यक्रम अथवा संस्थान बदलना जैसी परिस्थितियों में सहायता रद्द की जा सकती है। इसलिए परिवार को इसे केवल आर्थिक सहायता के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा जारी रखने में मदद करने वाली योजना के तौर पर देखना चाहिए।
इस योजना को केवल सरकार दे रही 25 हजार रुपए कहकर बताना अधूरा होगा। असल कहानी यह है कि सरकार ने शिक्षा के अलग-अलग स्तरों के लिए सहायता की अलग सीढ़ी बनाई है। कक्षा 1 से 4 के बच्चे को 1,000 रुपए से शुरू होकर पेशेवर पाठ्यक्रम तक पहुंचने पर 25 हजार रुपए सालाना तक सहायता मिल सकती है। यह रकम उस परिवार के लिए ज्यादा मायने रखती है, जिसकी आमदनी रोज की मेहनत पर निर्भर है।
एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि मंत्रालय के 2024 के मूल्यांकन दस्तावेज में बताया गया था कि इस शिक्षा योजना के तहत हर साल एक लाख से ज्यादा आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर आते हैं। उसी दस्तावेज में बीड़ी, गैर-कोयला खदान और सिनेमा क्षेत्रों से जुड़े करीब 50 लाख श्रमिकों का आंकड़ा भी दर्ज किया गया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना का संभावित लाभार्थी आधार कितना बड़ा है।
आवेदन राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर ऑनलाइन करना होता है।
अगर माता-पिता निर्माण श्रमिक हैं, तो उन्हें इस योजना के तहत आवेदन नहीं करना है। पहले यह जांचें कि श्रमिक किस श्रेणी में पंजीकृत है, उसके बाद ही सही छात्रवृत्ति योजना में आवेदन करें।
बता दें कि मजदूर परिवार के बच्चे के लिए पढ़ाई का रास्ता आसान बनाने वाली यह योजना छोटी से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक मदद देती है। कक्षा 1-4 में 1,000 रुपए से शुरू होने वाली सहायता आईटीआई, पॉलीटेक्निक और डिग्री पाठ्यक्रमों में 6,000 तथा पात्र पेशेवर पाठ्यक्रमों में 25,000 रुपए सालाना तक पहुंचती है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह लाभ हर मजदूर के बच्चे के लिए नहीं, बल्कि योजना में निर्धारित बीड़ी, सिनेमा और संबंधित गैर-कोयला खनन श्रमिक श्रेणियों के पात्र बच्चों के लिए है।
2026-27 के आवेदन खुले होने के कारण अभी उन परिवारों के लिए सही समय है जो, इस योजना के दायरे में आते हैं। सही जानकारी के साथ आवेदन किया जाए तो सरकार की यह सहायता बच्चे की पढ़ाई का पूरा खर्च भले न उठाए, लेकिन परिवार के शिक्षा खर्च का एक हिस्सा जरूर हल्का कर सकती है।