
उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। 30 अगस्त 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। उनके इस्तीफे ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि दिव्या उन अधिकारियों में गिनी जाती रही हैं, जिन्होंने IIT-IIM से पढ़ाई, विदेश में कॉरपोरेट करियर और फिर UPSC के रास्ते प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया। इस्तीफे के समय वह उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव थीं।
दिव्या मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी से हैं। उन्होंने IIT दिल्ली से B.Tech किया और इसके बाद IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने लंदन में कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी की। लेकिन विदेश में सफल करियर होने के बावजूद उन्होंने भारत लौटने और सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।
उनका UPSC का सफर भी दिलचस्प रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पहले प्रयास में उनका चयन IPS के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल कर IAS के लिए चयनित हुईं। वह उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी बनीं।
यानी जिस समय कई युवा IIT और IIM के बाद बड़ी कॉरपोरेट नौकरी को अंतिम मंजिल मानते हैं, दिव्या ने लंदन का करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना।
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी हैं। प्रशासनिक करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। शुरुआती वर्षों में मेरठ और गोंडा समेत अलग-अलग जगहों पर तैनाती के बाद उन्होंने औद्योगिक विकास और विकास प्राधिकरण से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभाईं। सितंबर 2022 में वह मिर्जापुर की जिलाधिकारी बनीं। इसके बाद फरवरी 2024 में उन्हें उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण में CEO की जिम्मेदारी मिली और जुलाई 2024 में देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया।
मई 2026 में उनका देवरिया से तबादला हुआ। 6 मई 2026 को उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यभार संभाला। यही उनकी अंतिम तैनाती रही।
दिव्या मित्तल के प्रशासनिक करियर की सबसे ज्यादा चर्चित उपलब्धियों में मिर्जापुर के हलिया ब्लॉक का लहुरियादह गांव शामिल है। यह पहाड़ी इलाका लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहा था। दिव्या मित्तल के मिर्जापुर DM रहने के दौरान यहां पाइप से पानी पहुंचाने का काम हुआ। रिपोर्टों के अनुसार गांव के करीब 125 परिवारों को इसका लाभ मिला और आजादी के लगभग 75 साल बाद गांव तक पाइप से पानी पहुंचा।
इस्तीफे के समय भी उन्होंने इस घटना को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने उस बुजुर्ग महिला का जिक्र किया, जिसने गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था। दिव्या के मुताबिक प्रशासन में रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि सरकारी फाइल के पीछे आखिरकार एक इंसान होता है और उसकी गरिमा की रक्षा करना ही न्याय का अहम हिस्सा है।
13 जुलाई 2024 को दिव्या मित्तल को देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया। यहां वह मई 2026 तक रहीं। अपने विदाई संदेश में उन्होंने देवरिया का भी खास तौर पर उल्लेख किया और कहा कि यहां के अनुभवों ने उन्हें सही बात के लिए खड़े होने की अहमियत सिखाई।
इसके बाद मई 2026 में उन्हें लखनऊ बुलाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया और लगभग चार महीने बाद उन्होंने IAS से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया।
उनके इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि एक सफल IAS अधिकारी ने अचानक सेवा क्यों छोड़ दी? दिव्या मित्तल ने साफ किया है कि उनका फैसला किसी दबाव, विवाद या किसी एक अचानक हुए 'ट्रिगर मोमेंट' का नतीजा नहीं था। उन्होंने इसे काफी सोच-विचार के बाद लिया गया व्यक्तिगत निर्णय बताया। उनके मुताबिक परिवार, अपनी प्राथमिकताएं और दूसरे क्षेत्रों में रुचि इस निर्णय के पीछे महत्वपूर्ण कारण हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि IAS की नौकरी उनके जीवन का एक अध्याय थी, पूरी जिंदगी नहीं।
इस्तीफे के बाद उनके राजनीति में आने को लेकर भी अटकलें शुरू हुईं। खासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं। लेकिन दिव्या मित्तल ने राजनीति में प्रवेश से जुड़ी अटकलों से इनकार किया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में राजनीति में जाने के सवाल पर नकारात्मक जवाब दिया।
यहां एक प्रशासनिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। दिव्या मित्तल ने स्वेच्छा से इस्तीफा सौंपने और सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा करने की जानकारी दी है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक औपचारिक स्वीकृति की प्रक्रिया अभी पूरी होना बाकी थी। इसलिए इस्तीफे की घोषणा और सेवा से औपचारिक रूप से मुक्त होने को एक ही चरण नहीं माना जाना चाहिए।
दिव्या मित्तल की कहानी में एक दिलचस्प समानता दिखाई देती है। एक समय उन्होंने IIT-IIM के बाद मिला आरामदायक कॉरपोरेट करियर और लंदन की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया था। तब लक्ष्य था प्रशासनिक सेवा के जरिए देश के लिए काम करना। करीब 13 साल बाद उन्होंने अब IAS की प्रतिष्ठित नौकरी से भी आगे बढ़ने का निर्णय लिया है।
उनकी विदाई पोस्ट का केंद्रीय संदेश भी यही था कि पद से ज्यादा महत्वपूर्ण वह असर है, जो किसी व्यक्ति के जीवन पर छोड़ा जाए। मिर्जापुर के पहाड़ी गांव में पानी पहुंचने पर बुजुर्ग महिला से मिला आशीर्वाद उनके लिए प्रशासनिक उपलब्धियों के आंकड़ों से कहीं ज्यादा व्यक्तिगत महत्व रखता दिखाई देता है।
दिव्या मित्तल का सफर IIT दिल्ली से IIM बेंगलुरु, फिर लंदन की नौकरी, UPSC, उत्तर प्रदेश के जिलों में प्रशासन और आखिरकार राजस्व विभाग के विशेष सचिव तक पहुंचा। 30 अगस्त 2026 को उनका इस्तीफा इस करीब 13 साल के प्रशासनिक सफर में बड़ा मोड़ है।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से इतना स्पष्ट है कि उन्होंने इस्तीफे को न तो किसी दबाव का नतीजा बताया है और न किसी एक विवाद से जोड़ा है। उन्होंने इसे अपनी बदलती प्राथमिकताओं, परिवार और रुचियों को ध्यान में रखकर लिया गया सोच-समझा फैसला बताया है।