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बेन नेविस पर ‘टोक्यो’ की चढ़ाई बनी सबक, डॉग की रोमांचक लेकिन चिंताजनक स्टोरी, आपके Pets की सेहत का कैसे रखें ख्याल?

Dog mountain rescue viral story: आपके पेट कुत्ते की कहानी एक पहाड़ी पर चढ़ाई के वक्त अगर कोई खतरनाक मोड़ ले ले तो क्या हो सकता है? एक पेट डॉग टोक्यो ने बेन नेविस की चढ़ाई के वक्त कुछ ऐसा ही किया, जो हर किसी के लिए सबक बन गया।
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भारत

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Sanjana Kumar

Sep 01, 2026

dog mountain rescue viral story

dog mountain rescue viral story: AI Creative

Dog mountain rescue viral story: पहाड़ की चढ़ाई एक आम साहसिक अनुभव हो सकती है, लेकिन इस बार यह एक कुत्ते के लिए यादगार और डरावना बन गया। टोक्यो नाम की एक काली लैब्राडोर, जो अपनी मालिक क्रिस्टीना ब्लुह्मे के साथ स्कॉटलैंड में बेन नेविस की चढ़ाई पर गई थी, एक अप्रत्याशित घटना का शिकार हो गई, जिसने उसे और उसकी मालिक को बेहद चिंताजनक स्थिति में डाल दिया।

नशे में नहीं, बल्कि 'नशे की हालत में थी टोक्यो'

टोक्यो, जो एक स्वस्थ और एक्टिव वर्किंग डॉग थी, अचानक अपनी पिछली टांगों का उपयोग खो बैठी और बेहोशी की स्थिति में चली गई। यह घटना जुलाई 2026 की शुरुआत में हुई, जब वे लगभग शिखर के करीब थे। क्रिस्टीना ने बताया कि टोक्यो 'बहुत बुरी हालत में थी' और उन्हें लगा कि वे उसे खो देंगी।

लोचाबर माउंटेन रेस्क्यू टीम लेकर आई राहत

स्थिति गंभीर होने पर क्रिस्टीना ने लोचाबर माउंटेन रेस्क्यू टीम को बुलाया। यह टीम, जो स्वयंसेवकों की है, तुरंत मौके पर पहुंची और लगभग 25 किलोग्राम वजन वाली टोक्यो को स्ट्रेचर पर लादकर खतरनाक, चट्टानी रास्तों से नीचे उतारा।

वेट क्लिनिक में इलाज और आश्चर्यजनक सुधार

नीचे पहुंचने पर टोक्यो को फोर्ट विलियम के क्राउन वेट्स क्लिनिक ले जाया गया। वहां के वरिष्ठ पशु चिकित्सकों ने उसकी हालत को न्यूरोटॉक्सिन से जुड़ा माना और पशु विष नियंत्रण केंद्र से सलाह लेकर यह निष्कर्ष निकाला कि टोक्यो ने संभवतः ट्रेल पर छोड़ी गई कैनबिस खा ली थी। उसे एक्टिव चारकोल और इंट्रावेनस फ्लूइड्स दिए गए, जिससे वह अगले ही दिन पूरी तरह ठीक हो गई।

क्यों कैनबिस कुत्तों के लिए खतरनाक है

कुत्तों के मस्तिष्क में कैनबिनॉइड रिसेप्टर्स इंसानों की तुलना में अधिक होते हैं, इसलिए THC (कैनबिस का सक्रिय घटक) उनके लिए विशेष रूप से जहरीला हो सकता है। इससे उल्टी, संतुलन खोना, दौरे और कोमा जैसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

टोक्यो की कहानी का संदेश

क्रिस्टीना ने इस घटना को 'जीवन का सबसे डरावना दिन' बताया और रेस्क्यू टीम व वेट्स की सराहना की। साथ ही उन्होंने अन्य कुत्ते मालिकों से आग्रह किया कि वे ट्रेल पर छोड़ी गई किसी भी संदिग्ध वस्तु, खासतौर पर ड्रग्स से सावधान रहें।

क्या यह सिर्फ एक मजेदार कहानी है?

कुछ लोग सोशल मीडिया पर इस घटना को हल्के में लेते हुए कहते हैं कि कच्ची कैनबिस खाने से कोई असर नहीं होता क्योंकि उसे सक्रिय (डिकार्बॉक्सिलेशन) होना जरूरी है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुत्तों में बहुत कम मात्रा में THC भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है।

टोक्यो की कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

यह घटना सिर्फ एक विचित्र किस्सा नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है, प्रकृति की सुंदरता के बीच भी खतरनाक चीजें छिपी हो सकती हैं। कुत्तों की सुरक्षा के लिए हमें ट्रेल पर सतर्क रहना चाहिए और यदि किसी विषाक्तता का संदेह हो तो तुरंत वेट से संपर्क करना चाहिए।

टोक्यो की कहानी जानने के बाद आज ही बनाए ये आदतें

  • स्वच्छता बनाए रखें - पालतू के मल और मूत्र को तुरंत साफ करें। उसके साथ खेलने या संभालने के बाद हाथ अच्छी तरह साबुन से धोएं।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं - पेट शॉप से लाए गए कुत्तों को तुरंत पशु चिकित्सक से जांच करवाएं। मल और त्वचा की जांच कराएं, खासकर अगर कोई असामान्य लक्षण दिखे।
  • संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाएं - पालतू के बर्तनों, बिस्तर और खिलौनों को नियमित रूप से साफ करें। यदि कुत्ते को कोई त्वचा संक्रमण हो, तो उसे तुरंत अलग रखें और उपचार करवाएं।
  • बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी- घर में छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं, तो उन्हें कुत्ते के मल या संक्रमित जगहों से दूर रखें। संक्रमण का खतरा कम करने के लिए हाथ धोने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  • पेट शॉप और पालतू प्रदर्शनी में सावधानी रखें - यदि आप पालतू खरीदने जा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वहां क्वारंटीन और स्वच्छता का ध्यान रखा गया हो। प्रदर्शनी या पालतू मेलों में भी सावधानी बरतना ही बेहतर है। बच्चों को सीधे जानवरों से संपर्क कम रखने दें।

टोक्यो की यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि पालतू जानवरों से जुड़ी छोटी-सी लापरवाही भी स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। लेकिन सही जानकारी और सावधानी से हम अपने प्यारे साथी और खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

ये लक्षण दिखें तो हो जाएं अलर्ट

यदि आपके कुत्ते में दस्त, खुजली, भूख में कमी, या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। साथ ही, घर में स्वच्छता बनाए रखें और नियमित जांच को प्राथमिकता दें। इस तरह आप अपने पालतू और परिवार दोनों की सेहत का ध्यान रख सकते हैं।

जानिए पेट्स की देखभाल में नई तकनीकें

आजकल, पालतू जानवरों की देखभाल में तकनीकी उपकरणों का उपयोग बढ़ रहा है। स्मार्ट कॉलर और हेल्थ ट्रैकर्स जैसे उपकरण पालतू जानवरों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रखने में मदद करते हैं। ये उपकरण न केवल मालिकों को उनके पालतू की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हैं, बल्कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या के शुरुआती संकेतों को पहचानने में भी सहायक होते हैं।

पेट्स के हेल्थ इंश्योरेंस भी है अहम

पालतू जानवरों के लिए स्वास्थ्य बीमा का महत्व भी बढ़ रहा है। यह बीमा न केवल आपातकालीन स्थितियों में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण के खर्च को भी कवर करता है। पालतू मालिकों को अपने जानवरों के लिए सही बीमा योजना का चयन करना चाहिए, ताकि वे किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार रहें।

यह कहानी सिर्फ टोक्यो की नहीं, बल्कि हर पेट्स के मालिक के लिए एक चेतावनी और सीख है, सेहत की सुरक्षा में सतर्कता ही सबसे बड़ी ताकत है। आप खुद देखिए कि, टोक्यो की तेज और पूरी तरह से ठीक होने वाली वापसी ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर सही मदद मिल जाए तो मुश्किल हालात भी पल में बदल सकते हैं।