
काम की टेंशन के बीच सेहत का ख्याल (AI)
9 से 5 की डेस्क जॉब, डेडलाइन्स का दबाव और घंटों का ट्रैफिक यह आज के अधिकांश वर्किंग प्रोफेशनल्स की दिनचर्या का सच है। इस व्यस्तता में सबसे पहले जिस चीज से समझौता होता है, वह है शारीरिक स्वास्थ्य। अक्सर लोग सोचते हैं कि फिटनेस के लिए जिम में रोजाना एक-दो घंटे पसीना बहाना जरूरी है। जब इतना समय नहीं मिलता, तो वे व्यायाम को टालते रहते हैं। लेकिन आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान और शोध यह साबित करते हैं कि सेहतमंद रहने के लिए घंटों नहीं, बल्कि सही रणनीति और निरंतरता (Consistency) की जरूरत होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, 18 से 64 वर्ष के वयस्कों को प्रति सप्ताह कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम-तीव्रता (Moderate-intensity) वाली एरोबिक गतिविधि या 75 से 150 मिनट की उच्च-तीव्रता (Vigorous-intensity) वाली कसरत करनी चाहिए। इसके साथ ही, हफ्ते में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम (Strength Training) आवश्यक हैं।
भारतीय संदर्भ में, ICMR-NIN (National Institute of Nutrition) की सिफारिशें स्पष्ट करती हैं कि हर वयस्क को प्रतिदिन कम से कम 20 से 40 मिनट मध्यम गतिविधि और 10 से 20 मिनट तीव्र गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। यह जीवनशैली जनित रोगों जैसे कि टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और हृदय रोगों से बचाव के लिए अनिवार्य है।
भारतीय कार्यस्थलों पर किए गए 'SMART-STEP' जैसे ट्रायल्स में यह बात सामने आई कि ऑफिस कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी बाधाएं हैं समय का अभाव, मानसिक थकान, काम की प्राथमिकता और कार्यस्थल पर फिटनेस संस्कृति की कमी। कई बार स्मार्टफोन ऐप्स के जरिए हर घंटे मिलने वाले रिमाइंडर भी काम के दबाव के आगे बेअसर साबित होते हैं। इसका समाधान यह है कि फिटनेस को काम से अलग कोई 'अतिरिक्त काम' मानने के बजाय, इसे ऑफिस रूटीन के भीतर ही स्वाभाविक रूप से शामिल किया जाए।
यदि आपके पास सुबह या शाम को लगातार 45 मिनट निकालने का समय नहीं है, तो इन आधुनिक तकनीकों को अपनाएं।
डेस्क जॉब में सक्रियता बनाए रखने के आसान उपाय
पोर्टेबल फिटनेस गैजेट्स: ऑफिस डेस्क के नीचे 'अंडर-डेस्क पैडल मशीन' या छोटे स्टिपर का इस्तेमाल करें। टाइपिंग या ईमेल पढ़ने के दौरान पैडल चलाने से बैठे-बैठे भी कैलोरी बर्न होती रहती है।
वॉकिंग मीटिंग्स: सहकर्मियों के साथ छोटी चर्चाओं या फोन कॉल्स के दौरान कुर्सी पर बैठने के बजाय टहलते हुए बात करें।
सीढ़ियों को बनाएं दोस्त: लिफ्ट की जगह हमेशा सीढ़ियों का चुनाव करें। यह बिना किसी अतिरिक्त उपकरण के बेहतरीन लोअर-बॉडी और कार्डियो वर्कआउट है।
पोस्चर और स्ट्रेचिंग: हर एक घंटे में गर्दन, कंधों और रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर स्ट्रेच करें ताकि सर्वाइकल और लोअर बैक पेन से बचा जा सके।
फिटनेस की शुरुआत करते समय अति-उत्साह से बचें। ICMR की सलाह के अनुसार, यदि आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है जैसे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, रीढ़ की समस्या या पुराना डायबिटीज तो कोई भी नया वर्कआउट रूटीन या हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श अवश्य लें।
फिटनेस कोई 'ऑल-और-नथिंग' (सब कुछ या कुछ नहीं) का खेल नहीं है। अगर आपके पास 1 घंटा नहीं है, तो 15 मिनट ही सही, लेकिन शुरुआत करना जरूरी है। अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव जोड़ें; यही छोटे कदम आगे चलकर एक स्वस्थ, ऊर्जावान और तनावमुक्त जीवन का आधार बनते हैं।
Updated on:
01 Sept 2026 12:11 pm
Published on:
01 Sept 2026 12:11 pm
