1 सितंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बदलता मानसून आपके बच्चों को बीमार कर रहा है, बचाव के लिए जानिए जरूरी टिप्स!

क्या आप जानते हैं कि बदलते मौसम का सीधा असर आपके बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है? गर्मी, बारिश और कीटों की बढ़ती संख्या बच्चों को न केवल बीमारियों का शिकार बना रही है, बल्कि उनके मानसिक विकास पर भी खतरा मंडरा रहा है। जानिए कैसे!
3 min read
Google source verification

भारत

image

Ravi Gupta

Sep 01, 2026

climate change and baby health

प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini AI

यह गर्म होती दुनिया में बच्चों की सेहत पर पड़ने वाले असर की कहानी है - जहां बदलते मौसम ने नन्हों के लिए नए खतरे खड़े कर दिए हैं। आइए समझते हैं कि वास्तव में क्या हो रहा है, क्यों यह चिंता का विषय है, और हम क्या कर सकते हैं।

बदलता मानसून और कीटजनित बीमारियां

भारत में मानसून बदल रहा है। बारिश का पैटर्न बदल गया है - कभी एक ही दिन में एक हफ्ते जितनी बारिश हो जाती है, तो कहीं लंबे सूखे के बाद अचानक बारिश होती है। इससे बाढ़ और रुके पानी की समस्या बढ़ी है, जो डेंगू, मलेरिया, हैजा, टाइफाइड और पेट की बीमारियों को बढ़ावा देती है।

सरकार ने इस पर कदम उठाए हैं - राष्ट्रव्यापी निगरानी, दवाइयों और डायग्नोस्टिक किट्स की आपूर्ति, कीट नियंत्रण और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन बच्चों के लिए यह खतरा अभी भी गंभीर बना हुआ है।

बदलते मौसम में और पोषण की लड़ाई

एक हालिया अध्ययन (NFHS-5, 2019–21) से पता चला है कि जिन जिलों में तापमान 25°C या उससे अधिक और वर्षा कम (<1350 मिमी) है, वहां बच्चों में कुपोषण (स्टंटिंग और अंडरवेट) की दर औसतन 9–12 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि गर्मी और सूखे का संयुक्त प्रभाव बच्चों की वृद्धि और पोषण पर कितना गहरा असर डालता है।

गर्भावस्था और शुरुआती उम्र में गर्मी का प्रभाव

एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि गर्भावस्था और जन्म के बाद शुरुआती महीनों में अत्यधिक गर्मी सहने वाले बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से थैलेमिक (thalamic) विकास धीमा हो सकता है, जिससे किशोरावस्था में व्यवहार संबंधी समस्याएं, जैसे आक्रामकता और नियम तोड़ने की प्रवृत्ति, बढ़ सकती हैं। यह संकेत है कि गर्मी का असर केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक विकास पर भी पड़ सकता है।

गर्मियों का बढ़ता तनाव और बच्चों की सुरक्षा

भारत में 61 प्रतिशत बच्चे लगभग 1.45 करोड़ प्रति वर्ष एक अतिरिक्त महीने तक गर्मी के तनाव (हीट स्ट्रेस) का सामना कर रहे हैं, जो सीधे जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है। यह आंकड़ा बताता है कि गर्मी अब केवल एक मौसम नहीं, बल्कि बच्चों के लिए एक स्वास्थ्य संकट बन चुकी है।

डेंगू और मलेरिया का बढ़ता खतरा

मौसम में बदलाव से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। पुणे में एक अध्ययन ने भविष्य के लिए अनुमान लगाया है कि डेंगू से होने वाली मौतों में 2020–40 के बीच 12–13% की वृद्धि हो सकती है, जबकि 2040–60 में यह 25–40% तक और 2100 तक 112% तक पहुंच सकती है—यह इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कितना बढ़ता है।

मलेरिया के संदर्भ में, भविष्य में मानसून के बाद की बारिश (नॉर्थ-ईस्ट मानसून) में पश्चिम और मध्य भारत में वर्षा 40% तक बढ़ सकती है, जिससे मच्छर जनित बीमारियों का खतरा और बढ़ेगा।

बच्चों के लिए यह सब क्यों मायने रखता है

बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, और वे गर्मी, कीटजनित तथा जलजनित बीमारियों से जल्दी प्रभावित होते हैं। पोषण की कमी, मस्तिष्क विकास पर असर और बढ़ते रोग - इन सबका प्रभाव उनकी पढ़ाई, खेल-कूद और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है।

हमारे पास कुछ ठोस उपाय हैं, जिन्हें परिवार, स्कूल और समुदाय स्तर पर अपनाया जा सकता है:

  • घर और स्कूल में ठंडा वातावरण बनाए रखें—छाया, पंखा, पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  • मानसून में रुके पानी को तुरंत साफ करें—डेंगू और मलेरिया से बचाव का यह सबसे प्रभावी तरीका है।
  • पौष्टिक भोजन और साफ पानी सुनिश्चित करें—इससे पोषण और रोग प्रतिरोधक क्षमता दोनों मजबूत होती हैं।
  • स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाएं—गर्मी, कीटजनित और जलजनित बीमारियों के लक्षण और बचाव के तरीके बताएं।
  • स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क रखें—टीकाकरण, पोषण जांच और बीमारी की शुरुआती पहचान में मदद मिलेगी।

बदलते मौसम ने बच्चों की दुनिया को बदल दिया है। यह केवल एक मौसम की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों के विकास, स्वास्थ्य और भविष्य की चुनौती है।