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Supermom Syndrome : थकान को कहें अलविदा, कामकाजी महिलाओं के लिए आसान और असरदार एनर्जी बूस्टर्स

कामकाजी माताओं के लिए थकान की एक बड़ी समस्या है। आइए इसे दूर करने का आसान और वैज्ञानिक तरीका जानते हैं। जानें कैसे 'वेकफुल रेस्ट' और 'शेकिंग मेडिसिन' से दिनभर बनी रहेगी ऊर्जा।
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भारत

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Chitra Badoliya

Sep 01, 2026

Mom

सुपरमॉम सिंड्रोम (AI)

आज के दौर में कामकाजी माताओं का जीवन एक निरंतर चलने वाली मैराथन जैसा हो गया है। ऑफिस की डेडलाइन्स, प्रेजेंटेशन्स, घर की जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश और सामाजिक दायित्व इन सबके बीच संतुलन साधते-साधते महिलाएं अक्सर उस स्थिति में पहुंच जाती हैं जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ 'क्रोनिक एग्जॉशन' या अत्यधिक थकान कहते हैं। समाज में अक्सर एक मां से 'सुपरमॉम' होने की उम्मीद की जाती है, जो बिना थके सब कुछ संभाल ले। लेकिन हकीकत यह है कि लगातार मल्टीटास्किंग महिलाओं की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा को पूरी तरह सोख लेती है। इस स्थिति से उबरने के लिए केवल रात की नींद काफी नहीं है, बल्कि दिनचर्या में कुछ व्यावहारिक और वैज्ञानिक बदलाव लाने की जरूरत है।

फिजियोलॉजिकल विजिलेंस: थकान की गहरी जड़

अक्सर महिलाएं भरपूर सोने के बाद भी सुबह उठते ही थकान महसूस करती हैं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इसका मुख्य कारण 'फिजियोलॉजिकल विजिलेंस' (Physiological Vigilance) है।

लगातार अलर्ट मोड: कामकाजी माताओं का मस्तिष्क हमेशा अगली जिम्मेदारी के प्रति सतर्क रहता है—बच्चे का टिफिन, स्कूल प्रोजेक्ट, ऑफिस मीटिंग या घर का राशन।

अधूरी नींद की गुणवत्ता: इस मानसिक सतर्कता के कारण शरीर का नर्वस सिस्टम कभी पूरी तरह 'रिलैक्स मोड' में नहीं जा पाता, जिससे नींद की गहराई और गुणवत्ता प्रभावित होती है।

हार्मोनल असंतुलन: लगातार तनाव से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जो ऊर्जा के प्राकृतिक चक्र को बाधित करता है।

'वेकफुल रेस्ट': बिना सोए दिमाग को रीसेट करने का विज्ञान

पारंपरिक रूप से थकान मिटाने के लिए सोने या ध्यान (मेडिटेशन) लगाने की सलाह दी जाती है। लेकिन व्यस्त दिनचर्या में मेडिटेशन के लिए शांत माहौल और समय निकालना हर बार संभव नहीं होता। यहीं पर 'वेकफुल रेस्ट' (Wakeful Rest) सबसे प्रभावी साबित होता है।

क्या है वेकफुल रेस्ट? यह 5 से 10 मिनट का एक ऐसा सचेत विश्राम है, जिसमें आप बिना सोए, बिना फोन देखे, बिना कोई पॉडकास्ट सुने या दिमाग में 'टू-डू लिस्ट' बनाए शांति से बैठते हैं।

यह मेडिटेशन से अलग कैसे है? ध्यान में सांसों या किसी विचार पर एकाग्रता साधनी होती है, जबकि वेकफुल रेस्ट में दिमाग को पूरी तरह खुला छोड़ दिया जाता है।

मस्तिष्क पर प्रभाव: न्यूरोसाइंस के अनुसार, जब मस्तिष्क बाहरी उत्तेजनाओं से मुक्त होता है, तो 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' सक्रिय होता है। यह याददाश्त को मजबूत करता है, तनाव घटाता है और मानसिक स्पष्टता लौटाता है।

सोमैटिक तकनीक: 'शेकिंग मेडिसिन' का असर

मानसिक तनाव सीधे शरीर की मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र में जमा होता है। इसे दूर करने के लिए सोमैटिक थैरेपी की सरल तकनीक 'शेकिंग मेडिसिन' (Shaking Medicine) बेहद कारगर है:

कैसे करें: दिन में जब भी अत्यधिक दबाव महसूस हो, पैरों को जमीन पर सीधा रखें और 30 सेकंड से 2 मिनट तक पूरे शरीर, कंधों और हाथों को हल्के-फुल्के झटकों के साथ हिलाएं।

जैविक लाभ: यह प्राकृतिक प्रक्रिया शरीर के फाइट-या-फ्लाइट रिस्पॉन्स को समाप्त कर पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करती है, जिससे नसों में जमा तनाव तुरंत रिलीज हो जाता है।

पोषण, दिनचर्या और प्राकृतिक उपचार

शारीरिक ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए खान-पान और जीवनशैली की छोटी-छोटी आदतें निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

  • संतुलित नाश्ते का 90 मिनट नियम: सुबह उठते ही खाली पेट कैफीन लेने के बजाय, जागने के 90 मिनट के भीतर प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और फाइबर से भरपूर नाश्ता करें (जैसे अंडे, दलिया, नट्स, योगर्ट)। यह दिनभर ब्लड शुगर और ऊर्जा को स्थिर रखता है।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का मध्यम व्यायाम, योग या स्ट्रेचिंग ऊर्जा के स्तर को 40% तक बढ़ा देता है।
  • अरोमाथेरेपी और हाइड्रोथेरेपी: दिन के अंत में लैवेंडर ऑयल का उपयोग या गुनगुने पानी से स्नान मांसपेशियों को शिथिल कर गहरी नींद को बढ़ावा देता है।

त्वरित कार्ययोजना: दैनिक ऊर्जा संतुलन

समय / क्षेत्रअनुशंसित उपायमुख्य लाभ
सुबह (जागने पर)90 मिनट में प्रोटीन युक्त नाश्तादिनभर स्थिर ऊर्जा और कम क्रैविंग्स
दोपहर (काम के बीच)5-10 मिनट 'वेकफुल रेस्ट'मानसिक थकान और ब्रेन फॉग से राहत
शाम (तनाव के समय)1-2 मिनट 'शेकिंग मेडिसिन'नर्वस सिस्टम का तुरंत रीसेट
रात (सोने से पहले)लैवेंडर ऑयल या गुनगुना स्नानगहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद
कार्यस्थलफ्लेक्सिबल वर्किंग व नियमित ब्रेक्सबर्नआउट से बचाव

कार्यस्थल पर सीमाओं का निर्धारण और स्वास्थ्य जांच

थकान को दूर करने के लिए सिर्फ व्यक्तिगत प्रयास ही नहीं, बल्कि माहौल में बदलाव भी जरूरी है।

  • 'ना' कहने की कला: घर और कार्यस्थल दोनों जगह अपनी सीमाएं तय करें। हर काम अकेले करने के बजाय जिम्मेदारियों को बांटना सीखें।
  • फ्लेक्सिबिलिटी की मांग: ऑफिस में काम के लचीले घंटे, हाइब्रिड मॉडल या समय पर छोटे ब्रेक्स की मांग करना आपका अधिकार है।
  • मेडिकल चेकअप: यदि जीवनशैली में सुधार के बाद भी कमजोरी बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेकर हीमोग्लोबिन, विटामिन B12, विटामिन D3 और थायरॉयड की जांच अवश्य कराएं।

कामकाजी माताओं के लिए खुद की देखभाल कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक बुनियादी जरूरत है। जब एक मां मानसिक और शारीरिक रूप से ऊर्जावान होती है, तभी वह परिवार और करियर दोनों में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे पाती है। 'वेकफुल रेस्ट' जैसे छोटे-छोटे पलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर आप थकान मुक्त और सशक्त जीवन की ओर कदम बढ़ा सकती हैं।