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सावधान! किडनी के मरीजों को हेल्दी ऑप्शन भी पहुंचा सकते हैं नुकसान, जानिए एक्सपर्ट की राय और वैज्ञानिक कारण

किडनी शरीर का बेहद जरूरी अंग है। यह हमारे शरीर में फिल्ट्रेशन सिस्टम की तरह काम करती है। यह हमारे खून को फिल्टर करती है और बेकार चीजों को शरीर से बाहर निकालती है।
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Oct 13, 2026
Kidney Damage Symptoms
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

किडनी हमारे शरीर का बेहद जरूरी अंग है। किडनी, रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ और रिबकेज के ठीक नीचे मौजूद, बीन के आकार और मुट्ठी के बराबर आकार के दो अंग हैं। ये खून को फिल्टर करते हैं, बेकार चीजों को शरीर से बाहर निकालते हैं और शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखते हैं। किडनी की बीमारी वाले लोगों के लिए आम स्वास्थ्य सलाह काम नहीं आती है।

क्या कहते हैं डॉक्टर

आम तौर पर सेहत के लिए अच्छी मानी जाने वाली चीजें भी क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) या किडनी की दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि किडनी शरीर के फिल्ट्रेशन सिस्टम की तरह काम करती है। जब यह ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में कुछ न्यूट्रिएंट्स और पानी का लेवल बढ़ने लगता है, जिससे जरूरी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।

किडनी से जुड़ी गाइडलाइंस क्यों बदलती रहती हैं?

हेल्दी किडनी शरीर से बेकार पदार्थों को फिल्टर करती है और सोडियम, पोटैशियम, फॉस्फरस और फ्लूइड्स का संतुलन बनाए रखती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो यह संतुलन बिगड़ जाता है। जो चीजें ज्यादातर लोगों के लिए फायदेमंद होती हैं, वे चुपचाप शरीर पर दबाव डाल सकती हैं। इसीलिए सेहत से जुड़ी एक ही सलाह हर किसी के लिए सही नहीं होती है।

हेल्दी ऑप्शन भी पहुंचा सकते हैं नुकसान

कम सोडियम वाला नमक- इसमें अक्सर सोडियम की जगह पोटैशियम क्लोराइड का इस्तेमाल होता है। अगर किडनी पोटैशियम को बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह खून में जमा होने लगता है। इसे हाइपरकैलिमिया कहते हैं। इससे दिल की धड़कन से जुड़ी खतरनाक समस्याएं हो सकती हैं। भारत की एक स्टडी में यह भी बताया गया है कि सेंधा नमक और लाइट नमक में अक्सर पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है।

शुगर-फ्री और जीरो-कैलोरी ड्रिंक्स- शुगर-फ्री होने का मतलब यह नहीं है कि ये किडनी के लिए सुरक्षित हैं। कुछ में सोडियम वाले एडिटिव्स होते हैं। कई शुगर-फ्री और फिजी ड्रिंक्स में स्वाद या उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सोडियम कंपाउंड, फॉस्फोरिक एसिड और फॉस्फेट एडिटिव्स मिलाए जाते हैं. इनके लगातार सेवन से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

प्रोसेस्ड डाइट फूड- इंस्टेंट नूडल्स, बिस्कुट और पैक्ड स्नैक्स में अक्सर सोडियम और फॉस्फेट छिपा होता है। फॉस्फेट एडिटिव्स शरीर में लगभग पूरी तरह से एब्जॉर्ब हो जाते हैं, जबकि साबुत खाने की चीजों से मिलने वाला फॉस्फोरस बहुत कम एब्जॉर्ब होता है।

बहुत ज्यादा पानी- आम लोगों के लिए हाइड्रेशन अच्छी सलाह है। लेकिन किडनी की गंभीर बीमारी या दिल की बीमारी में, ज्यादा फ्यूइड से सूजन और ओवरलोड की समस्या हो सकती है। फ्यूइड की मात्रा हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होनी चाहिए

जरूरत से ज्यादा पाबंदी भी बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ आम सलाह ही समस्या नहीं है। रीनल डाइट (किडनी की बीमारी में ली जाने वाली डाइट) के कड़े नियम भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई मरीजों को फल, सब्जियां, दालें और डेयरी उत्पाद न खाने के लिए कहा जाता है। ऐसे में, वे प्रोटीन और कैलोरी का सेवन बहुत कम कर देते हैं, इससे उन्हें कुपोषण हो सकता है।

मरीज डर की वजह से बीन्स, नट्स और फल खाने से बचते हैं। कुछ लोग परिवार के साथ खाना खाते समय परेशान, निराश या अकेला महसूस करते हैं। हालांकि, अब सोच बदल रही है। आधुनिक मेडिकल और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स अब सबके लिए एक ही तरह का तरीका अपनाने के बजाय, हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग डाइट प्लान बनाने की सलाह देते हैं। पोटैशियम और फॉस्फोरस पर पाबंदियां मुख्य रूप से तब लगाई जाती हैं, जब ब्लड टेस्ट में इनका लेवल बढ़ा हुआ दिखता है।

किडनी के मरीजों के लिए सुझाव


अपनी स्टेज जानें, क्योंकि शुरुआती CKD, डायलिसिस और ट्रांसप्लांट के लिए जरूरतें अलग-अलग होती हैं।
पोटैशियम, फॉस्फोरस और eGFR लेवल तय करते हैं कि क्या कम करना है और क्या बढ़ना है। इसके लिए अपने लैब रिपोर्ट का इस्तेमाल करें।
सामग्री की लिस्ट में फॉस्फोरस (Phos) और पोटैशियम की मात्रा के लिए लेबल देखें।
नमक के बजाय हर्ब्स से फ्लेवर दें। लहसुन, अदरक, नींबू, काली मिर्च और इमली अच्छा काम करते हैं।
जड़ी-बूटियों और मसालों का इस्तेमाल नमक का सेवन कम करने और खाने को स्वादिष्ट बनाने का एक शानदार तरीका है।
ताजा खाना बनाकर खाएं। इससे खाने में मौजूद छिपे हुए एडिटिव्स कम हो जाते हैं।
सप्लीमेंट या सॉल्ट सब्स्टिट्यूट लेने से पहले जांच कर लें या अपनी केयर टीम से सलाह लें।
डॉक्टर की मंजूरी के बिना आइबुप्रोफेन जैसी रेगुलर NSAID पेनकिलर न लें।

(डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं। इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।)

Updated on:
13 Oct 2026 08:28 pm
Published on:
13 Oct 2026 08:28 pm