
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
केंद्र सरकार ने अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए बड़ा निर्देश दिया है। सरकार ने इलाज और सुविधाओं की दरें साफ तौर पर प्रदर्शित कराने पर जोर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर मौजूदा नियमों का पालन कराने एवं अन्य जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया। ऐसा करने का मकसद है कि मरीज और उनके परिजन इलाज शुरू होने से पहले ही संभावित खर्च का अंदाजा लगा सकें।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, शुल्क की स्पष्ट जानकारी से मरीज और परिवार इलाज के खर्च का अनुमान लगा सकेंगे और सही फैसले ले सकेंगे। इसके अलावा मरीज चिकित्सा खर्च की योजना बना सकेंगे। इससे अस्पतालों के बिल को लेकर होने वाली गलतफहमियों और विवादों में कमी आने की उम्मीद है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव द्वारा राज्यों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सुविधाओं की दरें ऐसी जगह लगाई जाएं, जहां मरीज और उनके तीमारदार आसानी से देख व समझ सकें।
स्वास्थ्य सचिव ने पत्र में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 का हवाला दिया है। इसके तहत बने केंद्रीय नियम, 2012 के नियम 9 में प्रावधान है कि संस्थान अपनी सेवाओं और सुविधाओं की दरें स्थानीय भाषा के साथ अंग्रेजी में भी प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करें। संसद में दिए गए सरकारी जवाबों के अनुसार यह व्यवस्था उन्हीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होती है, जिन्होंने यह कानून अपनाया है।
यह केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वहां व्यवस्था राज्यों के अपने कानूनों से चलेगी। इनमें से कुछ राज्यों के नियमों में भी दरें दिखाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल केंद्र के हलफनामे के अनुसार कानून 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनाया है, जबकि 17 राज्यों के अपने कानून हैं और लगभग सभी में दरें दिखाना जरूरी है।
स्वास्थ्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। इसलिए नियमों को लागू कराने और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। मुख्य सचिवों से कहा गया है कि वे संबंधित अधिकारियों और क्लिनिकल संस्थानों को जरूरी निर्देश जारी करें। यानी यह पत्र केंद्र का एडवाइजरी-स्वरूप निर्देश है, जिसका जमीनी असर इस पर निर्भर करेगा कि राज्य इसे कितनी सख्ती से लागू कराते हैं।
पत्र में मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के इलाज-पैकेज की दरें प्रमुखता से दिखाने के लिए संस्थानों को प्रोत्साहित करने को कहा गया है। मंत्रालय का मानना है कि इससे विदेशी मरीजों को विकल्प चुनने में आसानी होगी, कीमत से जुड़ी शिकायतें घटेंगी और भारत की चिकित्सा व आयुष सेवाओं पर भरोसा बढ़ेगा।
दरें दिखाने का प्रावधान नया नहीं है। द वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2010 के कानून के तहत अस्पतालों को दरें प्रमुख जगह पर दिखानी होती हैं, लेकिन व्यवहार में निजी अस्पताल अक्सर ऐसा नहीं करते। इसी रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के 2018 के विश्लेषण में निजी अस्पतालों के कुछ मदों पर 1737 प्रतिशत तक के मार्जिन का जिक्र है। नवंबर 2017 में तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने भी गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल के भारी बिल के आरोपों के बाद राज्यों को अस्पतालों को चेताने के लिए पत्र लिखा था।
अस्पतालों में इलाज एवं सुविधाओं की दरें दिखाने व उनकी सीमा तय करने का मुद्दा अलग है। नियम 9(ii) के तहत संस्थानों को केंद्र की ओर से राज्यों से सलाह कर तय दर-सीमा के भीतर शुल्क लेना होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी 2024 को स्वास्थ्य सचिव से राज्यों के साथ परामर्श कर इसे लागू करने का ठोस प्रस्ताव मांगा था। कई राज्यों ने इस पर चिंता जताई है कि दरें तय करने से इलाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ताजा पत्र केवल दरें प्रदर्शित करने पर केंद्रित है और इसमें दर-सीमा तय करने का जिक्र नहीं है।
Updated on:
13 Oct 2026 06:28 pm
Published on:
13 Oct 2026 06:28 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
